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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   political murders in Kashmir could not restore of Article 370, terrorists are planning to breach the peace process in valley

पाकिस्तान पर 'सौ सुनार की, एक लोहार की' तर्ज पर हो चोट, कश्मीर में राजनीतिक हत्याओं से वापस नहीं मिलेगी ‘कुर्सी'

Fri, 30 Oct 2020 04:56 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 30 Oct 2020 04:56 PM IST
सार

केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा है कि कश्मीर के लोगों की जमीन कोई छीन नहीं रहा है। ये भ्रम फैलाया जा रहा है कि बाहर के लोग आकर उनकी जमीन पर कब्जा कर लेंगे। जब तक कोई व्यक्ति अपनी जमीन बेचेगा नहीं तो कोई उसे कैसे खरीदेगा...

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political murders in Kashmir could not restore of Article 370, terrorists are planning to breach the peace process in valley
Gupkar meeting - फोटो : ANI (File)

विस्तार

केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर को लेकर कई अहम फैसले लिए जा रहे हैं। ऐसे में एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और फारूक अब्दुल्ला ने केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, तो वहीं दूसरी ओर आतंकियों ने राजनीतिक हत्याओं का सिलसिला शुरू किया है। इनका मकसद है कि किसी भी तरह से नई प्रक्रिया को बाधित किया जाए।

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सुरक्षा एवं राजनीतिक विश्लेषक ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) कहते हैं कि कुछ लोग यह समझते हैं कि कश्मीर में राजनीतिक हत्याओं से वे अपनी 'पहचान और कुर्सी' वापस ले लेंगे तो ये उनका भ्रम है। नब्बे से लेकर अब तक यहां 12 हजार राजनीतिक कार्यकर्ता मारे गए हैं, क्या उससे प्रक्रिया खत्म हो गई, नहीं हुई।  
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जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक और सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) का कहना है कि पाकिस्तानी मंत्री ने पुलवामा हमले को लेकर जो बयान दिया है, उसके बाद कुछ नहीं बचता। अब वक्त है कि पाकिस्तान के खिलाफ 'सौ सुनार की, एक लोहार की' तर्ज पर सर्जीकल स्ट्राइक हो। जब तक पाकिस्तान पर नकेल नहीं कसी जाएगी, तब तक घाटी में राजनीतिक हत्याओं का दौर जारी रहेगा।
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ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में जो प्रक्रिया शुरू हुई है, वह वापस होगी, ये भ्रम अपने दिमाग से निकाल दें। जो लोग यथा स्थिति बनाए रखने का पक्ष ले रहे हैं, दरअसल वे अपनी पहचान खो चुके हैं। उनकी कुर्सी भी चली गई। कश्मीर की जनता उनके साथ नहीं है। कभी वे किंग मेकर होते थे, आज उन्हें कोई नहीं पूछ रहा। पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और फारूक अब्दुल्ला के सामने पहचान का संकट खड़ा हो गया है।

कौन नहीं जानता कि इन्हीं लोगों ने कश्मीर के कानूनों का भरपूर फायदा उठाया था। रोशनी एक्ट क्या था, अप्रत्यक्ष तरीके से जम्मू-कश्मीर के लोगों की जमीन लेकर उसे अपने परिचितों को दिलाना था। इस एक्ट से पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग किया गया। इन लोगों ने स्थानीय लोगों से जमीन लेकर उसे अपने रिश्तेदारों के नाम करा दिया। उसके बाद उन्हें मनमर्जी दाम पर बड़ी कंपनियों को दे देते थे। उसमें उनकी हिस्सेदारी रहती थी।

केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा है कि कश्मीर के लोगों की जमीन कोई छीन नहीं रहा है। ये भ्रम फैलाया जा रहा है कि बाहर के लोग आकर उनकी जमीन पर कब्जा कर लेंगे। जब तक कोई व्यक्ति अपनी जमीन बेचेगा नहीं तो कोई उसे किस तरह खरीदेगा। कोई व्यक्ति किसी की जमीन जबरन नहीं खरीद सकता। किसी को यह लगा कि दाम अच्छे मिल रहे हैं तो वह बेच सकता है।

राजनीतिक हत्याएं होती नहीं, कराई जाती हैं...

आतंकियों ने भाजपा के तीन नेताओं को मार दिया है। इसके पीछे भी राष्ट्र विरोधी ताकतें काम करती हैं। ब्रिगेडियर गुप्ता बताते हैं, राजनीतिक हत्याएं होती नहीं हैं, बल्कि कराई जाती हैं। ये किसी से छिपा नहीं है कि कौन लोग आतंकियों व अलगाववादियों की भरपूर मदद करते रहे हैं। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट बहुत कुछ कहती है।

राजनीति को खानदानी राज समझने वालों के दिन अब चले गए हैं। जब से ये लोग रिहा हुए हैं, तभी से घाटी में राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर हमले बढ़ गए हैं। जम्मू-कश्मीर में 1990 से लेकर अब तक 12 हजार से अधिक राजनीतिक कार्यकर्ता मारे जा चुके हैं। क्या शांति प्रक्रिया या राजनीतिक प्रक्रिया बंद हुई, आगे भी नहीं होगी। कश्मीर के लोग जानते हैं कि इसके पीछे कौन सी राजनीतिक ताकतें लगी हुई हैं। ये तय है कि वे लोग अपने मंसूबों में कामयाब नहीं होंगे।

पाकिस्तान को उसके बुरे कर्मों का मिले जवाब

कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) कहते हैं कि पाकिस्तान को सबक सिखाने का अब सही मौका है। सौ सुनार की और एक लुहार की, इस तर्ज पर चोट की जरूरत है। आतंकियों को खत्म करने के लिए बार-बार सर्जीकल स्ट्राइक की जाए। अभी तक पाकिस्तान, पुलवामा की घटना से मना कर रहा था, लेकिन अब उनके मंत्री ने ही सदन में पोल खोल कर रख दी है। इस मामले को तुरंत संयुक्त राष्ट्र संघ में ले जाया जाए। पाकिस्तान को आतंकी देश घोषित कराया जाए।

राजनीतिक हत्याएं एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा होती हैं। पाकिस्तान की इस साजिश में कश्मीर के कुछ नेता भी शामिल हैं। जो भी शांति व अमन की बात करता है, उसे मार दिया जाता है। इन लोगों का प्रयास है कि किसी भी तरह से कश्मीर में इनके अलावा दूसरे किसी व्यक्ति को आवाज बुलंद करने का मौका न मिले। पीडीपी का नेता आतंकियों द्वारा नहीं मारा जाता। हुर्रियत वाले भी नहीं मारे जाते।

कैप्टन अनिल के अनुसार, राजनीतिक हत्याओं को रोकना है तो उसके लिए पाकिस्तान को सबक सिखाना होगा। यहां सरकार को दोतरफा कार्रवाई करनी चाहिए। एक, पाकिस्तान में स्थित आतंकी कैंपों पर सर्जीकल स्ट्राइक की जाए और दूसरा, अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसे आतंकी राष्ट्र घोषित कराया जाए।

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