फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Kathua News ›   Work on the construction of an approach road at Juthana Bridge at a cost of Rs 50 lakh will begin soon.

Kathua News: जुथाना पुल में 50 लाख से अप्रोच सड़क बनाने का काम जल्द होगा शुरू

विज्ञापन
Work on the construction of an approach road at Juthana Bridge at a cost of Rs 50 lakh will begin soon.
कठुआ। जुथाना पुल बनकर तैयार होने के बाद भी एक वर्ष के लंबे इंतजार के बाद अब इसकी अप्रोच सड़क को लेकर काम शुरू करने की तैयारी है। ऐसे में लगभग 10 हजार की आबादी का सपना पूरा होने जा रहा है। उम्मीद है कि अगले वित्तीय वर्ष से पहले तारकोल डलने के साथ ही इस पुल पर वाहनों की व्यवस्थित आवाजाही भी शुरू हो जाएगी।
विज्ञापन

जुथाना पुल की अप्रोच सड़क को तैयार करने के लिए लगभग 50 लाख की राशि मंजूर की गई है। इसी साल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने पुल निर्माण को लेकर मौके का दौरा किया था और खामियों को दुरुस्त करने के बाद काम पूरा करने के निर्देश दिए थे। 36 करोड़ की लागत से तैयार पुल का निर्माण पूरा होने में आठ साल का लंबा समय लग गया।
विज्ञापन

परियोजना को जम्मू-कश्मीर प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन (जेकेपीसीसी) की ओर से शुरू करवाया गया। परियोजना में बजट की कमी और ठेकेदार की बकायादारी ने क्षेत्र की आबादी को आधे-अधूरे पुल के बीच अटका दिया। दो साल तक पुल का काम पूरी तरह से बंद रहने के बाद इसी साल फरवरी में फिर से काम शुरू हुआ। जेकेपीसीसी का लोक निर्माण विभाग में विलय होने के बाद काम ने रफ्तार पकड़ा और अब आखिरी स्लैब भी डाल दिया गया है। पुल में कुल 14 स्लैब थे जिसमें से छह का काम जेकेपीसीसी की ओर से किया गया था और शेष आठ का काम अब पूरा कर लिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन




2016 में जखोल से जुथाना के बीच में उज्ज दरिया पर बन रहे पुल का काम कीड़ियां गंडियाल के पुल के साथ शुरू किया गया था। कीड़ियां गंडियाल का पुल तय समयावधि में बनकर तैयार हो गया। केंद्रीय सड़क फंड्स (सीआरएफ) के तहत 30 करोड़ से इस परियोजना का काम निर्धारित किया गया जो वर्ष 2016 में शुरू हो गया। आधे-अधूरे काम के बीच सीआरएफ बंद हो गया जिसके बाद इसे लंबित परियोजनाओं में तब्दील कर दिया गया। अंधेरा ढलने के बाद ग्रामीणों का उज्ज के पार आना लगभग नामुमकिन हो जाता है तो वहीं सुबह स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर पुल पार करना पड़ता था।
जान जोखिम में डाल पुल पार करते रहे लोग


वर्षों तक लोग जान जोखिम में डाल इसके अधूरे पिलर के डेढ़ फुट संकरी पट्टी पर चलते रहे हैं, जो मौत के कुएं से कम नहीं रहा। रोजाना पुल पार करने वालों में स्कूली विद्यार्थी, कामकाजी लोग व स्थानीय व्यापारी थे। एक अनुमान के मुताबिक रोजाना लगभग 200 स्कूली बच्चे और सैकड़ों ग्रामीण इसी रास्ते से होकर आवाजाही करते हैं। पहले जुगाड़ लगाकर पुल पर चढ़ने के लिए लगाई लोहे की खड़ी सीढ़ियां चढ़नी पड़ती थीं और फिर डेढ़ फुट के पिलर से पुल पार करना पड़ता था। कभी कभार आने वालों की यहां पहुंचकर सांसें तक अटक जाती थीं। बाढ़ के दिनों में तो हालात और भी बदतर होते रहे।

बीमार लोगों को पुल पार करवाने में आती थी दिक्कत


जुथाना के ग्रामीण बताते हैं कि पुल पार की पंचायतों वाले गांवों के लोग अपनी बेटियों की शादी इस ओर करने से परहेज करते थे। अगर रिश्ता पक्का हो भी जाए तो शादी की सारी रस्में पुल के इस पार जखोल में ही करनी पड़ती थीं। गर्भवती और बीमार लोगों को पुल से पार करवाने में भारी दिक्कत आती रहीं। बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती थी, बीमार लोग इलाज के अभाव में दम तोड़ देते थे। उज्ज दरिया उफान पर आने के बाद इस इलाके के लोग कटकर रह जाते थे। कई पीढ़ियां पुल के इंतजार में चली गईं लेकिन अब इसका काम पूरा होने से इस गांव की तकदीर बदल जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed