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Kathua News: तदबीर से तकदीर लिख रहीं बनी की महिलाएं, बनीं प्रेरणा
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खास खबर
- पहाड़ी प्याज से महिलाओं ने रचा जैविक खेती से आत्मनिर्भरता का इतिहास
- 25 हेक्टेयर भूमि पर खेती कर 4 हजार क्विंटल से अधिक प्याज का बंपर उत्पादन किया
हाफिज कुरैशी
बनी। पहाड़ी इलाकों की महिलाएं अब खेती के पारंपरिक तरीकों को पीछे छोड़कर जैविक प्याज उत्पादन में नई पहचान बना रही हैं। तदबीर यानि कि नई सोच से यहां की महिलाएं अब खुद अपनी तकदीर लिख रही हैं। इस साल मेहनती महिलाओं ने लगभग 25 हेक्टेयर भूमि पर खेती कर 4 हजार क्विंटल से अधिक प्याज का बंपर उत्पादन किया है, जिससे न केवल अच्छी आमदनी हुई, बल्कि इलाके को भी एक नया नाम मिला।
बनी सब डिवीजन के पहाड़ी इलाकों में खेती के काम को मुख्य तौर से हिमाचल की तरह महिलाएं अंजाम देती हैं। यह महिलाएं चूल्हा चौका ही नहीं करतीं बल्कि खेतों से परिवार के पोषण के साथ साथ आय भी अर्जित करती हैं। बनी की पहाड़ियों की मिट्टी और मौसम प्याज की जैविक खेती के लिए बेहद उपयुक्त है। यहां उगाया गया प्याज पूरी तरह ऑर्गेनिक होता है। बिना किसी रासायनिक खाद या कीटनाशक के प्याज के स्वाद में हल्की मिठास लिए रहता है, जो खाने को और लजीज बनाता है। सेहत के लिए लाभकारी होता है। इसे लंबे समय तक भंडारित किया जा सकता है, जिससे इसका बाजार मूल्य और बढ़ जाता है। इस साल किसानों ने इलाके में एक्सपी रेड, अनियन सीलॉन एफ 1 और मलाव वैरायटी की प्याज उगाई, जिनकी गुणवत्ता ने व्यापारी और उपभोक्ताओं को आकर्षित किया।
शामिल बेगम ने बताया कि हमने अपनी जमीन पर मेहनत से प्याज उगाया। अब व्यापारी खुद आकर माल खरीदते हैं। यह हमारे लिए गर्व की बात है। द्रब्बल पंचायत से कमला देवी कहती हैं कि पहले आमदनी बहुत कम थी, अब प्याज की खेती से घर खर्च, बच्चों की पढ़ाई सब आसानी से चल रहा है। हम खुद फैसले लेने लगी हैं और अगले वर्ष लगभग 2 कैनाल की भूमि पर कोशिश करूंगी की लहसुन के साथ-साथ प्याज भी लगाऊं। सरथली की रहने वाली नाजिया बानो ने बताया कि जब हमने जैविक प्याज बेचना शुरू किया, तो लोगों ने स्वाद और ताजगी की तारीफ की। अब हमारी पहचान एक किसान नहीं, उद्यमी के रूप में हो रही है। बनी भद्रवाह मार्ग के किनारे पर दुकान कर रही राधा देवी ने बताया कि यह यहां का पहाड़ी प्याज पूरी तरह शुद्ध और प्राकृतिक है। जब ग्राहक कहते हैं कि ये प्याज बाकी से अलग है, तो लगता है वह दिन दूर नहीं जब यहां का प्याज और पहाड़ी लहसुन विश्व में जाना जाएगा।
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...............
कोट
हमने महिला किसानों को बीज, तकनीकी प्रशिक्षण और जैविक उर्वरक निर्माण की जानकारी प्रदान की। इस सफलता का श्रेय महिलाओं की लगन और मेहनत को जाता है। पिछले साल उत्पादन 3000 क्विंटल था, जो इस बार 4000 क्विंटल से अधिक हुआ है। खेती के प्रति लोगों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है और हम इसे अन्य गांवों में भी विस्तार देने की योजना पर काम कर रहे हैं। कठुआ के पहाड़ी क्षेत्रों की महिलाएं अब जैविक प्याज की खेती से अपनी पहचान गढ़ रही हैं।
सुरेंद्र कुमार, कृषि विस्तार अधिकारी, बनी
फोटो सहित
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- पहाड़ी प्याज से महिलाओं ने रचा जैविक खेती से आत्मनिर्भरता का इतिहास
- 25 हेक्टेयर भूमि पर खेती कर 4 हजार क्विंटल से अधिक प्याज का बंपर उत्पादन किया
हाफिज कुरैशी
बनी। पहाड़ी इलाकों की महिलाएं अब खेती के पारंपरिक तरीकों को पीछे छोड़कर जैविक प्याज उत्पादन में नई पहचान बना रही हैं। तदबीर यानि कि नई सोच से यहां की महिलाएं अब खुद अपनी तकदीर लिख रही हैं। इस साल मेहनती महिलाओं ने लगभग 25 हेक्टेयर भूमि पर खेती कर 4 हजार क्विंटल से अधिक प्याज का बंपर उत्पादन किया है, जिससे न केवल अच्छी आमदनी हुई, बल्कि इलाके को भी एक नया नाम मिला।
बनी सब डिवीजन के पहाड़ी इलाकों में खेती के काम को मुख्य तौर से हिमाचल की तरह महिलाएं अंजाम देती हैं। यह महिलाएं चूल्हा चौका ही नहीं करतीं बल्कि खेतों से परिवार के पोषण के साथ साथ आय भी अर्जित करती हैं। बनी की पहाड़ियों की मिट्टी और मौसम प्याज की जैविक खेती के लिए बेहद उपयुक्त है। यहां उगाया गया प्याज पूरी तरह ऑर्गेनिक होता है। बिना किसी रासायनिक खाद या कीटनाशक के प्याज के स्वाद में हल्की मिठास लिए रहता है, जो खाने को और लजीज बनाता है। सेहत के लिए लाभकारी होता है। इसे लंबे समय तक भंडारित किया जा सकता है, जिससे इसका बाजार मूल्य और बढ़ जाता है। इस साल किसानों ने इलाके में एक्सपी रेड, अनियन सीलॉन एफ 1 और मलाव वैरायटी की प्याज उगाई, जिनकी गुणवत्ता ने व्यापारी और उपभोक्ताओं को आकर्षित किया।
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शामिल बेगम ने बताया कि हमने अपनी जमीन पर मेहनत से प्याज उगाया। अब व्यापारी खुद आकर माल खरीदते हैं। यह हमारे लिए गर्व की बात है। द्रब्बल पंचायत से कमला देवी कहती हैं कि पहले आमदनी बहुत कम थी, अब प्याज की खेती से घर खर्च, बच्चों की पढ़ाई सब आसानी से चल रहा है। हम खुद फैसले लेने लगी हैं और अगले वर्ष लगभग 2 कैनाल की भूमि पर कोशिश करूंगी की लहसुन के साथ-साथ प्याज भी लगाऊं। सरथली की रहने वाली नाजिया बानो ने बताया कि जब हमने जैविक प्याज बेचना शुरू किया, तो लोगों ने स्वाद और ताजगी की तारीफ की। अब हमारी पहचान एक किसान नहीं, उद्यमी के रूप में हो रही है। बनी भद्रवाह मार्ग के किनारे पर दुकान कर रही राधा देवी ने बताया कि यह यहां का पहाड़ी प्याज पूरी तरह शुद्ध और प्राकृतिक है। जब ग्राहक कहते हैं कि ये प्याज बाकी से अलग है, तो लगता है वह दिन दूर नहीं जब यहां का प्याज और पहाड़ी लहसुन विश्व में जाना जाएगा।
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हमने महिला किसानों को बीज, तकनीकी प्रशिक्षण और जैविक उर्वरक निर्माण की जानकारी प्रदान की। इस सफलता का श्रेय महिलाओं की लगन और मेहनत को जाता है। पिछले साल उत्पादन 3000 क्विंटल था, जो इस बार 4000 क्विंटल से अधिक हुआ है। खेती के प्रति लोगों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है और हम इसे अन्य गांवों में भी विस्तार देने की योजना पर काम कर रहे हैं। कठुआ के पहाड़ी क्षेत्रों की महिलाएं अब जैविक प्याज की खेती से अपनी पहचान गढ़ रही हैं।
सुरेंद्र कुमार, कृषि विस्तार अधिकारी, बनी
फोटो सहित