{"_id":"61a71027b28ee4645d3f3422","slug":"to-avoid-anemia-attention-will-have-to-be-given-to-the-diet-kathua-news-jmu248923933","type":"story","status":"publish","title_hn":"एनीमिया से बचने के लिए खानपान पर देना होगा ध्यान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एनीमिया से बचने के लिए खानपान पर देना होगा ध्यान
विज्ञापन
आईसीडीएस विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में एनीमिया के बारे में महिलाओं को जानकारी देते आयुष विभ
- फोटो : KATHUA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कठुआ। एनीमिया के कारण शरीर में आने वाली दुर्बलता को लेकर शहर के इंदिरा कॉलोनी में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आईसीडीएस प्रोजेक्ट द्वारा आयोजित कार्यक्रम के दौरान आयुष विभाग के डॉ नितिन शर्मा इस मौके पर विशेष वक्ता के तौर पर उपस्थित रहे। जिन्होंने उपस्थित महिलाओं और बच्चों को एनीमिया से बचाव के उपाय बताएं।
उपस्थित लोगों से रूबरू होते हुए डॉ नितिन शर्मा ने कहा कि एनीमिया का अर्थ हमारे शरीर में खून की कमी हो जाना है। उन्होंने बताया कि हमारे रक्त में हीमोग्लोबिन एक ऐसा तत्व है जो शरीर में मौजूद खून की मात्रा को बताता है। पुरुषों में इसकी मात्रा 12 से 16 प्रतिशत और महिलाओं में 11 से 14 प्रतिशत के बीच होनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं है तो उसे एनीमिया हो सकता है। उन्होंने बताया कि उक्त समस्या सबसे ज्यादा गर्भवती महिलाओं बढ़ते शिशुओं में होती है। भारत में 80 प्रतिशत से अधिक गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित है। एनीमिया होने की स्थिति में गर्भवती महिलाओं को कई प्रकार की अन्य बीमारियों के हो जाने की संभावना बढ़ जाती है। लिहाजा इसे हमें गंभीरता से लेना होगा। शर्मा ने कहा कि त्वचा का सफेद होना, जीभ, नाखूनों, पलकों के अंदर सफेदी का आना, बहुत अधिक थकावट महसूस करना, सांस फूलना कुछ ऐसे लक्षण हैं जिससे एनीमिया होने का पता चलता है। उन्होंने कहा कि शरीर में होने वाली इस बीमारी से लड़ने के लिए दवाएं तो उपलब्ध है लेकिन इससे बचने के लिए हमें अपने खानपान पर विशेष ध्यान देना होगा। क्योंकि एक बार एनीमिया हो जाने के बाद उसे ठीक होने में काफी समय लग जाता है। लिहाजा हम अपने रोज के खाने में हरी पत्तेदार सब्जियां, मूंगफली, अंडे, दालें, मछली जैसे पौष्टिक आहार के उपयोग को बढ़ावा देना होगा।
कार्यक्रम के दौरान वहां आए हुए लोगों को आयुष विभाग द्वारा एनीमिया से बचाव के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाली दवाएं भी वितरित की गई।
विज्ञापन
उपस्थित लोगों से रूबरू होते हुए डॉ नितिन शर्मा ने कहा कि एनीमिया का अर्थ हमारे शरीर में खून की कमी हो जाना है। उन्होंने बताया कि हमारे रक्त में हीमोग्लोबिन एक ऐसा तत्व है जो शरीर में मौजूद खून की मात्रा को बताता है। पुरुषों में इसकी मात्रा 12 से 16 प्रतिशत और महिलाओं में 11 से 14 प्रतिशत के बीच होनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं है तो उसे एनीमिया हो सकता है। उन्होंने बताया कि उक्त समस्या सबसे ज्यादा गर्भवती महिलाओं बढ़ते शिशुओं में होती है। भारत में 80 प्रतिशत से अधिक गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित है। एनीमिया होने की स्थिति में गर्भवती महिलाओं को कई प्रकार की अन्य बीमारियों के हो जाने की संभावना बढ़ जाती है। लिहाजा इसे हमें गंभीरता से लेना होगा। शर्मा ने कहा कि त्वचा का सफेद होना, जीभ, नाखूनों, पलकों के अंदर सफेदी का आना, बहुत अधिक थकावट महसूस करना, सांस फूलना कुछ ऐसे लक्षण हैं जिससे एनीमिया होने का पता चलता है। उन्होंने कहा कि शरीर में होने वाली इस बीमारी से लड़ने के लिए दवाएं तो उपलब्ध है लेकिन इससे बचने के लिए हमें अपने खानपान पर विशेष ध्यान देना होगा। क्योंकि एक बार एनीमिया हो जाने के बाद उसे ठीक होने में काफी समय लग जाता है। लिहाजा हम अपने रोज के खाने में हरी पत्तेदार सब्जियां, मूंगफली, अंडे, दालें, मछली जैसे पौष्टिक आहार के उपयोग को बढ़ावा देना होगा।
विज्ञापन
कार्यक्रम के दौरान वहां आए हुए लोगों को आयुष विभाग द्वारा एनीमिया से बचाव के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाली दवाएं भी वितरित की गई।