फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Kathua News ›   There is no change in the health facilities of Kathua

Kathua News: चार चिकित्सा अधिकारी और दो कंसल्टेंट के सहारे उपजिला अस्पताल बनी

Mon, 16 Jun 2025 02:18 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ Updated Mon, 16 Jun 2025 02:18 AM IST
विज्ञापन
There is no change in the health facilities of Kathua
बनी ​स्थित उपजिला अस्पताल। 
कठुआ। जम्मू-कश्मीर में सरकार बनने के नौ महीने बाद भी स्वास्थ्य सुविधा में कोई बदलाव नहीं आया है। पहाड़ी उपमंडल बनी का एक मात्र उपजिला अस्पताल विशेषज्ञ डॉक्टरों के बिना संचालित है।
विज्ञापन

स्त्री रोग विशेषज्ञ और सर्जन के पद पिछले 15 सालों से खाली पड़े हैं, जबकि स्वीकृत बाल रोग विशेषज्ञ पद पर अस्पताल में कभी कोई तैनात ही नहीं हुआ। परिणामस्वरूप स्थानीय लोग इमरजेंसी इलाज पाने के लिए 150 किलोमीटर दूर राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) कठुआ या फिर 250 किलोमीटर दूर जीएमसी और एम्स जम्मू जाने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
विज्ञापन


बनी के विधायक डॉ. रामेश्वर सिंह ने हाल ही में विधानसभा के पटल पर उपजिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा उठाया था। कई बार वह व्यक्तिगत रूप से स्वास्थ्य मंत्री सहित उच्च अधिकारियों से मुलाकात कर उनके संज्ञान में भी समस्या ला चुके हैं, लेकिन महीनों बाद भी बनी में कोई भी विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती नहीं हुई है। हालांकि जच्चा-बच्चा अस्पताल से संबद्ध डॉक्टर को उपजिला अस्पताल भेजा गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बनी क्षेत्र की ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी डॉ. देव राज ने बताया कि अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर न होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी प्रसव और दुर्घटना में घायल होने वाले मरीजों को हो रही है।
स्थानीय निवासी बलदेव सिंह का कहना है कि दो दिन पहले ही सित्ती में मिनीबस की चपेट में आकर चार वर्षीय बालिका के दोनों पैर जख्मी हो गए। ऐसे में अगर उपजिला अस्पताल में सर्जन का पद भरा होता तो बच्ची को इलाज के लिए जीएमसी कठुआ नहीं लाना पड़ता।



चार चिकित्सा अधिकारी और दो कंसल्टेंट के सहारे अस्पताल

बनी विधानसभा क्षेत्र के करीब एक लाख लोगों के लिए सिर्फ चार चिकित्सा अधिकारी और दो कंसल्टेंट डाॅक्टरों की तैनाती है। इसमें भी एक चिकित्सा अधिकारी को कठुआ शहर से उठाकर फिर उपजिला अस्पताल में लगाया गया है। मौजूदा समय में बनी क्षेत्र में दो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) संचालित हैं। जहां पर एक-एक चिकित्साधिकारी को तैनात किया गया है। दोनों चिकित्साधिकारियों को ओपीडी चलाने के लिए पीएचसी से उपजिला अस्पताल में तैनात किया गया है।



दूरदराज के अस्पतालों में इन कारणों से नहीं भरे जाते विशेषज्ञों के पद

दूरदराज के अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर के पद न भरे के पीछे डॉक्टरों की शहरों में निजी प्रैक्टिस है। इस कारण वे ऐसे अस्पतालों में जाना नहीं चाहते। कई बार तबादले के बाद भी डॉक्टर दूरदराज के अस्पतालों में जाने के लिए तैयार नहीं होते। इसका नतीजा यह होता है कि सरकारी आदेश के बाद भी इन अस्पतालों में पद खाली रह जाते हैं।स्वास्थ्य विभाग ने पिछले वर्ष दो चिकित्सा अधिकारियों सहित एक कंसल्टेंट महिला रोग विशेषज्ञ का तबादला बनी अस्पताल में किया था लेकिन इन तीनों ने अस्पताल में कार्यभार ग्रहण नहीं किया था। विभाग ने उन तीनों चिकित्सकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्देश तो दिया, लेकिन दूसरे विशेषज्ञों को वहां नहीं भेजा गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed