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Kathua News: जिले में दूर हो रहा दूध का संकट, पांच साल में ही लगभग दोगुना हुआ उत्पादन

Sun, 01 Jun 2025 01:00 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ Updated Sun, 01 Jun 2025 01:00 AM IST
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The milk crisis in the district is getting resolved, production has almost doubled in just five years
विश्व दूध दिवस
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गर्मी के सीजन में कठुआ के मैदानी इलाकों में रहने वाला दूध का संकट अब कम




संवाद न्यूज एजेंसी



कठुआ। प्रदेश में इंटीग्रेटेड डेयरी विकास योजना से किसानों और गोपालकों में डेयरी के प्रति बढ़े रुझान से जिले में दूध उत्पादन की दशा पांच सालों में बेहतर लगभग दोगुना हो गई है। आम तौर पर गर्मी के सीजन में कठुआ के मैदानी इलाकों में रहने वाला दूध का संकट भी अब कम हो गया है।
साल 2019-20 में जहां जिले में 1200 लाख लीटर दूध का उत्पादन सरकारी आंकड़ों में दर्ज किया गया था। वहीं, बीते वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक यह बढ़कर 2266.40 लाख लीटर पहुंच गया है।
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कठुआ जिले की सात लाख आबादी में प्रति व्यक्ति 827 मिली लीटर दूध की उपलब्धता वर्तमान में पहुंच गई है। यह पांच वर्ष पहले के मुकाबले में दोगुना है। जिले में वर्तमान में दो लाख पांच हजार के लगभग गाय और 70 हजार भैंसे पशुपालकों की ओर से पाली जा रही हैं। मगर खास बात यह है कि पिछले पांच वर्ष में पशु पालकों का रुझान बेहतर किस्म और बेहतर गुणवत्ता का दूध देने वाली गायों की ओर भी बढ़ा है। पिछले दो साल में विभाग ने जहां साहिवाल नस्ल की गाय के दूध की गुणवत्ता के प्रति गोपालकों को जागरूक किया है।
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विभाग के मुताबिक इसमें दूध उत्पादन बेहतर है, इसमें ए वन प्रोटीन है और बीमारियों से लड़ने में भी मदद करता है। इसके अलावा जर्सी और एचएफ को भी जिले के किसान खूब पसंद कर रहे हैं। एचएफ नस्ल से रोज 50 से 60 लीटर तक दूध हासिल किया जा सकता है। ऐसे में दूध उत्पादक बेहतर आय के लिए पहली तरजीह इसे ही देते हैं।


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कोट



पिछले कुछ वर्षों में दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं का सीधा असर प्रदेश के पहले जिले कठुआ में भी देखने को मिला है। यहां न सिर्फ दूध का उत्पादन पूर्व के मुकाबले बढ़ा है, बल्कि इस व्यवसाय को लेकर नए स्टार्टअप और स्वयं सहायता समूहों की रुचि भी काफी बढ़ गई है। एचएपीडी के जिले में कई नई परियोजनाओं ने डेयरी व्यवसाय और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया है। पशुपालकों का रुझान बढ़ा है, जिसके सकारात्मक नतीजे सामने आने लगे हैं।

युगल किशोर, मुख्य पशुपालन अधिकारी
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