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Kathua News: भगवान श्री कृष्ण के जन्म और बाल लीलाओं का किया वर्णन
Sat, 03 Jan 2026 12:44 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sat, 03 Jan 2026 12:44 AM IST
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देवल में श्रीमद भगवत कथा के दौरान भजनों पर झूमते भक्त, स्रोत आयोजक।
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलावर। सूखा तालाब देवल के राम मंदिर में जारी श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन कथावाचक ने श्री कृष्ण के जन्म और बाल लीलाओं का वर्णन किया। कथावाचक सुनील शास्त्री ने श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए पंडाल में पहुंचे श्रद्धालुओं को कथा सुनाई।
कथावाचक ने कहा कि मनुष्य का जीवन विषय वस्तु को भोगने के लिए नहीं बना है लेकिन आज का मानव भगवान की भक्ति को छोड़कर विषय वस्तुओं को भोगने में भी लगा हुआ है। जीवन में सदैव दूसरों के भलाई के काम करते रहना चाहिए।
कथावाचक ने कहा कि यह मानव शरीर 84 लाख योनियों भोगने के बाद मिलता है इसलिए इसलिए मनुष्य जीवन में मानव कल्याण के कार्य करने चाहिए। अपने जीवन में सदैव दूसरों के हित का कार्य करें। जब धरती पर धर्म नष्ट होकर अधर्म बढ़ता है तब तब भगवान इस धरती पर अवतरित होते हैं और भक्तों का उद्धार कर पापियों का नाश करते हैं।
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भगवान कृष्ण के पैदा होने के बाद कंस ने भगवान कृष्ण को मारने के लिए षड्यंत्र रचा। राजा कंस ने राज्य की सर्वाधिक बलवान राक्षसी पूतना को भगवान का वध करने के लिए भेजता है।
पूतना अपना वेश बदल कर भगवान श्री कृष्ण को अपने सतन से जहरीला दूध पिलाने का प्रयास करती है, लेकिन करनी को कुछ और ही मंजूर था भगवान श्री कृष्ण राक्षसी पूतना को ही मौत के घाट उतार देते हैं जिससे उसका उद्धार होता है और वह स्वर्ग को प्राप्त होती है। इस अवसर पर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु ने हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल का जय घोष भी किया। इससे दिनभर गांव का वातावरण भक्तिमय बना रहा।
इस मौके पर भगवान श्री कृष्ण की झांकी भी निकाली गई जिसमें बाल कृष्ण को लोगों ने मिश्री और माखन का भोग लगाया। शाम को कथा का समापन ओम जय जगदीश हरे की आरती के साथ हुआ। इसके पश्चात लोगों में प्रसाद का वितरण किया गया।
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बिलावर। सूखा तालाब देवल के राम मंदिर में जारी श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन कथावाचक ने श्री कृष्ण के जन्म और बाल लीलाओं का वर्णन किया। कथावाचक सुनील शास्त्री ने श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए पंडाल में पहुंचे श्रद्धालुओं को कथा सुनाई।
कथावाचक ने कहा कि मनुष्य का जीवन विषय वस्तु को भोगने के लिए नहीं बना है लेकिन आज का मानव भगवान की भक्ति को छोड़कर विषय वस्तुओं को भोगने में भी लगा हुआ है। जीवन में सदैव दूसरों के भलाई के काम करते रहना चाहिए।
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कथावाचक ने कहा कि यह मानव शरीर 84 लाख योनियों भोगने के बाद मिलता है इसलिए इसलिए मनुष्य जीवन में मानव कल्याण के कार्य करने चाहिए। अपने जीवन में सदैव दूसरों के हित का कार्य करें। जब धरती पर धर्म नष्ट होकर अधर्म बढ़ता है तब तब भगवान इस धरती पर अवतरित होते हैं और भक्तों का उद्धार कर पापियों का नाश करते हैं।
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भगवान कृष्ण के पैदा होने के बाद कंस ने भगवान कृष्ण को मारने के लिए षड्यंत्र रचा। राजा कंस ने राज्य की सर्वाधिक बलवान राक्षसी पूतना को भगवान का वध करने के लिए भेजता है।
पूतना अपना वेश बदल कर भगवान श्री कृष्ण को अपने सतन से जहरीला दूध पिलाने का प्रयास करती है, लेकिन करनी को कुछ और ही मंजूर था भगवान श्री कृष्ण राक्षसी पूतना को ही मौत के घाट उतार देते हैं जिससे उसका उद्धार होता है और वह स्वर्ग को प्राप्त होती है। इस अवसर पर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु ने हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल का जय घोष भी किया। इससे दिनभर गांव का वातावरण भक्तिमय बना रहा।
इस मौके पर भगवान श्री कृष्ण की झांकी भी निकाली गई जिसमें बाल कृष्ण को लोगों ने मिश्री और माखन का भोग लगाया। शाम को कथा का समापन ओम जय जगदीश हरे की आरती के साथ हुआ। इसके पश्चात लोगों में प्रसाद का वितरण किया गया।

देवल में श्रीमद भगवत कथा के दौरान भजनों पर झूमते भक्त, स्रोत आयोजक।

देवल में श्रीमद भगवत कथा के दौरान भजनों पर झूमते भक्त, स्रोत आयोजक।