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Kathua News: जनगणना में ओबीसी का अलग कॉलम हो, तभी पता चलेगी आबादी और हिस्सेदारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। ओबीसी समुदाय की आबादी का सही आंकड़ा सामने लाने और जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए अलग कॉलम शामिल करने की मांग को लेकर शनिवार को समुदाय के लोगों ने आवाज बुलंद की। समुदाय के लोगों ने कहा कि आबादी का वास्तविक आंकड़ा सामने आए बिना ओबीसी समुदाय को उसकी हिस्सेदारी और आरक्षण का लाभ देने की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो सकती। समुदाय की ओर से इस संबंध में उपायुक्त कठुआ के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा गया।
ज्ञापन में रखी गई मांग की जानकारी देते हुए प्रजापति सभा कठुआ के प्रधान बिशनदास ने कहा कि वे लंबे समय से ओबीसी के रूप में अपनी पहचान और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन आज भी कई परिवारों को प्रमाणपत्र बनवाने और सरकारी योजनाओं व आरक्षण का लाभ लेने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना था कि 2027 में प्रस्तावित जनगणना में ओबीसी का अलग कॉलम शामिल किया जाना चाहिए, ताकि समुदाय की वास्तविक जनसंख्या का आंकड़ा सामने आए और उसी आधार पर उसकी हिस्सेदारी तय हो सके। उन्होंने विशेष रूप से नाई, कुम्हार, तेली और धोबी समुदाय से जुड़ी शिकायतें उठाते हुए कहा कि इन समुदायों के कई परिवारों के बच्चों की पढ़ाई और रोजगार से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं। उनका आरोप था कि ओबीसी प्रमाणपत्र और आरक्षण से संबंधित प्रक्रिया में उन्हें लंबे समय से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
संजय कुमार ने कहा कि जनगणना के दौरान ओबीसी के लिए अलग कॉलम नहीं होने के कारण समुदाय की वास्तविक संख्या दर्ज नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि जब तक आबादी का सही आंकड़ा सामने नहीं आएगा, तब तक सरकारी प्रतिनिधित्व और आरक्षण में हिस्सेदारी का आकलन भी स्पष्ट नहीं होगा।
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इनसेट--
ओबीसी वर्ग को संवैधानिक व कानूनी हक दिलाना लक्ष्य
-- समुदाय के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी अन्य आरक्षित वर्ग के अधिकारों का विरोध करना नहीं है, बल्कि ओबीसी समुदाय को उसका संवैधानिक और कानूनी हक दिलाना है। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति, केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन से मांग की कि 2027 की जनगणना में ओबीसी का अलग कॉलम जोड़ा जाए। साथ ही समुदाय की वास्तविक आबादी का वैज्ञानिक तरीके से आंकलन किया जाए।
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कठुआ। ओबीसी समुदाय की आबादी का सही आंकड़ा सामने लाने और जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए अलग कॉलम शामिल करने की मांग को लेकर शनिवार को समुदाय के लोगों ने आवाज बुलंद की। समुदाय के लोगों ने कहा कि आबादी का वास्तविक आंकड़ा सामने आए बिना ओबीसी समुदाय को उसकी हिस्सेदारी और आरक्षण का लाभ देने की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो सकती। समुदाय की ओर से इस संबंध में उपायुक्त कठुआ के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा गया।
ज्ञापन में रखी गई मांग की जानकारी देते हुए प्रजापति सभा कठुआ के प्रधान बिशनदास ने कहा कि वे लंबे समय से ओबीसी के रूप में अपनी पहचान और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन आज भी कई परिवारों को प्रमाणपत्र बनवाने और सरकारी योजनाओं व आरक्षण का लाभ लेने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना था कि 2027 में प्रस्तावित जनगणना में ओबीसी का अलग कॉलम शामिल किया जाना चाहिए, ताकि समुदाय की वास्तविक जनसंख्या का आंकड़ा सामने आए और उसी आधार पर उसकी हिस्सेदारी तय हो सके। उन्होंने विशेष रूप से नाई, कुम्हार, तेली और धोबी समुदाय से जुड़ी शिकायतें उठाते हुए कहा कि इन समुदायों के कई परिवारों के बच्चों की पढ़ाई और रोजगार से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं। उनका आरोप था कि ओबीसी प्रमाणपत्र और आरक्षण से संबंधित प्रक्रिया में उन्हें लंबे समय से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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संजय कुमार ने कहा कि जनगणना के दौरान ओबीसी के लिए अलग कॉलम नहीं होने के कारण समुदाय की वास्तविक संख्या दर्ज नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि जब तक आबादी का सही आंकड़ा सामने नहीं आएगा, तब तक सरकारी प्रतिनिधित्व और आरक्षण में हिस्सेदारी का आकलन भी स्पष्ट नहीं होगा।
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ओबीसी वर्ग को संवैधानिक व कानूनी हक दिलाना लक्ष्य