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Kathua News: सरथल बनेगा बीज गांव, आलू उत्पादन से फूटेगा खुशहाली का अंकुर
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सरथल आलू विलेज परियोजना के तहत चिन्हित जगह
-आलू फार्म के अतिरिक्त स्थानीय किसानों की 60 कनाल जमीन पर तैयार किए जाएंगे बीज
- 20 हजार से अधिक किसान इस साल करेंगे आलू का उत्पादन, आमदनी बढ़ेगी और कृषि अर्थव्यवस्था मजबूत होगी
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिले के पर्यटन स्थल सरथल में सरकारी आलू सीड फार्म के साथ-साथ बीज गांव कार्यक्रम के तहत पहली बार 60 कनाल भूमि पर आलू की खेती की जाएगी। यह पहल क्षेत्र के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। बीज गांव से किसानों की खुशहाली का अंकुर फूटेगा। न केवल आमदनी बढ़ेगी बल्कि क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
किसानों को उन्नत कृषि तकनीक और उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के उपयोग का लाभ मिलेगा। योजना के तहत किसानों को उच्च किस्म का बीज विभाग की ओर से प्रदान किया जाएगा। आलू के उत्पादन के बाद किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना है। क्योंकि उत्पादन के बाद विभाग किसानों से आलू की खरीद करेगा। इससे स्थानीय किसानों को लाभ मिलेगा। मुख्य कृषि अधिकारी संजीव राय गुप्ता के अनुसार, विभाग इस पहल को सफल बनाने के लिए किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और विपणन सुविधाएं प्रदान कर रहा है। इससे न केवल किसानों को नई कृषि तकनीकों से लाभ मिलेगा, बल्कि वे आत्मनिर्भर बनकर क्षेत्र में बीज उत्पादन और कृषि व्यवसाय को आगे बढ़ाने में भी सक्षम होंगे।
बताया कि बनी क्षेत्र में 200 से अधिक किसानों को 50 क्विंटल आलू का बीज विभाग की ओर से सब्सिडी के दाम पर वितरित किया गया है। इस सीजन में इसका उत्पादन बढ़कर 200 क्विंटल के आसपास पहुंच जाएगा, जिसमें अच्छी गुणवत्ता वाले कुफरी हिमालिनी आलू के बीज वितरित किए गए हैं। कठुआ जिले में इस साल किसानों की संख्या भी बढ़ी है। जिसमें 20 हजार से अधिक ऐसे किसान हैं जो आलू का उत्पादन इस साल करेंगे।
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बनी क्षेत्र में पिछले साल तीन नंबर जोन में 700 कनाल की भूमि पर आलू की फसल लगाई गई थी, लेकिन किसानों की बढ़ती रुचि के कारण इस साल यह बढ़कर 900 कनाल के आसपास होने की संभावना है। इससे स्पष्ट है कि किसान अब कृषि की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने के प्रति जागरूक हो रहे हैं। सरथल के किसान इस पहल को लेकर उत्साहित हैं।
एक किसान रत्न लाल बैरागी ने बताया कि पहली बार इस स्तर पर आलू की खेती की जा रही है। हमें उम्मीद है कि इससे हमारी आमदनी बढ़ेगी और हम अपने खेतों में और भी उन्नत फसलें उगा सकेंगे।
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- 20 हजार से अधिक किसान इस साल करेंगे आलू का उत्पादन, आमदनी बढ़ेगी और कृषि अर्थव्यवस्था मजबूत होगी
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिले के पर्यटन स्थल सरथल में सरकारी आलू सीड फार्म के साथ-साथ बीज गांव कार्यक्रम के तहत पहली बार 60 कनाल भूमि पर आलू की खेती की जाएगी। यह पहल क्षेत्र के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। बीज गांव से किसानों की खुशहाली का अंकुर फूटेगा। न केवल आमदनी बढ़ेगी बल्कि क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
किसानों को उन्नत कृषि तकनीक और उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के उपयोग का लाभ मिलेगा। योजना के तहत किसानों को उच्च किस्म का बीज विभाग की ओर से प्रदान किया जाएगा। आलू के उत्पादन के बाद किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना है। क्योंकि उत्पादन के बाद विभाग किसानों से आलू की खरीद करेगा। इससे स्थानीय किसानों को लाभ मिलेगा। मुख्य कृषि अधिकारी संजीव राय गुप्ता के अनुसार, विभाग इस पहल को सफल बनाने के लिए किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और विपणन सुविधाएं प्रदान कर रहा है। इससे न केवल किसानों को नई कृषि तकनीकों से लाभ मिलेगा, बल्कि वे आत्मनिर्भर बनकर क्षेत्र में बीज उत्पादन और कृषि व्यवसाय को आगे बढ़ाने में भी सक्षम होंगे।
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बताया कि बनी क्षेत्र में 200 से अधिक किसानों को 50 क्विंटल आलू का बीज विभाग की ओर से सब्सिडी के दाम पर वितरित किया गया है। इस सीजन में इसका उत्पादन बढ़कर 200 क्विंटल के आसपास पहुंच जाएगा, जिसमें अच्छी गुणवत्ता वाले कुफरी हिमालिनी आलू के बीज वितरित किए गए हैं। कठुआ जिले में इस साल किसानों की संख्या भी बढ़ी है। जिसमें 20 हजार से अधिक ऐसे किसान हैं जो आलू का उत्पादन इस साल करेंगे।
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बनी क्षेत्र में पिछले साल तीन नंबर जोन में 700 कनाल की भूमि पर आलू की फसल लगाई गई थी, लेकिन किसानों की बढ़ती रुचि के कारण इस साल यह बढ़कर 900 कनाल के आसपास होने की संभावना है। इससे स्पष्ट है कि किसान अब कृषि की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने के प्रति जागरूक हो रहे हैं। सरथल के किसान इस पहल को लेकर उत्साहित हैं।
एक किसान रत्न लाल बैरागी ने बताया कि पहली बार इस स्तर पर आलू की खेती की जा रही है। हमें उम्मीद है कि इससे हमारी आमदनी बढ़ेगी और हम अपने खेतों में और भी उन्नत फसलें उगा सकेंगे।