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Kathua News: संतान की दीर्घायु के लिए रखा संकट चतुर्थी व्रत
Tue, 30 Jan 2024 04:38 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Tue, 30 Jan 2024 04:38 AM IST
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पर्व के चलते बाजारों में रही रौनक, व्रत का पूजन करने के लिए की गुड़, तिल, गन्ना और मूली की खरीदारी
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। अपने पुत्रों के शतायु और परिवार की सुख समृद्धि की कामना के साथ जिले में महिलाओं ने संकट चतुर्थी का व्रत रखा। सोमवार को पर्व के चलते शहर के बाजार में काफी रौनक देखने को मिली।
इस दौरान महिलाओं ने व्रत का पूजन करने के लिए गुड़, तिल, गन्ना और मूली की खरीदारी की। सुबह सरगी के साथ शुरू होने वाले व्रत को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह देखा गया। इस दौरान काफी संख्या में महिलाओं ने भगवान गणेश के मंदिरों में पूजा अर्चना की। वहीं, दिन के समय अर्घ्य देने के लिए महिलाओं ने तिल, गुड़, गन्ना, मूली आदि की खरीदारी की।
दिनभर निराहार व्रत के उपरांत रात चंद्रोदय होने पर महिलाओं ने चंद्र देव को अर्घ्य देकर अपने पुत्रों के दीर्घायु होने के साथ परिवार की सुख समृद्धि की कामना की। कई महिलाओं ने पूजन के बाद अपने पुत्रों की ढाई मुट्ठी पुगे सहित तिल, गुड़, गन्ना, मूली का दान करवाया। शहर के वार्ड 6 निवासी अमिता गुप्ता ने बताया कि व्रत को लेकर प्रचलित कथा के अनुसार भगवान श्री गणेश की भक्त एक विधवा ब्राह्मणी के बेटे को बलि देने के नियत से कुम्हार ने मिट्टी के बर्तन पकाने के लिए जलाई जाने वाली आग में डाल दिया।
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लेकिन भगवान श्री गणेश की कृपा से ब्राम्हणी का पुत्र उस आग से भी सुरक्षित रहा। जिसके बाद ग्लानि से भरा कुम्हार नगर के राजा के पास गया और सारी कथा सुनाई और ब्राह्मणी को उसका बेटा सौंप दिया। जिसके बाद राजा के आदेश से वहां हर साल माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकट चतुर्थी के रूप से परंपरा शुरू हो गई जो आज भी जारी है।
महिलाओं ने मंदिर जाकर की भगवान गणेश की वंदना
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलावर। माघ महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर सोमवार को संकट चौथ का व्रत रखा गया। महिलाओं ने सुबह मंदिरों में जाकर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की और संकट चौथ पर भगवान गणेश की वंदना करते हुए अपनी संतान की दीर्घायु की कामना की।
महिलाओं ने व्रत कथा सुनकर विधि-विधान से पूजा की। रात को चंद्रोदय के दर्शन के बाद महिलाओं ने व्रत खोला। महिला सुमन देवी, सुनीता, शकुंतला, राम मूर्ति, मंजू देवी, सुलेखा देवी, कोमल और टीना ने बताया कि संकट चौथ में महिलाएं अपने संतान की लंबी आयु और घर में सुख समृद्धि की कामना के लिए दिन में उपवास रखती है। ऐसी मान्यता है कि संकट चौथ का व्रत रखने और भगवान गणेश की पूजा अर्चना करने से आने वाले सभी संकट दूर हो जाते हैं। दिनभर आवाज रखने के बाद शाम के समय भगवान गणेश की पूजा करने के बाद चंद्रमा को जल अर्पित कर व्रत को खोलते हैं। इसके बाद महिलाएं तिल के बने खाद पदार्थ का प्रसाद के रूप में सेवन करती हैं, पंडित राधा कृष्ण शास्त्री ने बताया कि इस व्रत को संकट चौथ का व्रत भी कहा जाता है और इसे तिलकुट चौथ भी कहते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। अपने पुत्रों के शतायु और परिवार की सुख समृद्धि की कामना के साथ जिले में महिलाओं ने संकट चतुर्थी का व्रत रखा। सोमवार को पर्व के चलते शहर के बाजार में काफी रौनक देखने को मिली।
इस दौरान महिलाओं ने व्रत का पूजन करने के लिए गुड़, तिल, गन्ना और मूली की खरीदारी की। सुबह सरगी के साथ शुरू होने वाले व्रत को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह देखा गया। इस दौरान काफी संख्या में महिलाओं ने भगवान गणेश के मंदिरों में पूजा अर्चना की। वहीं, दिन के समय अर्घ्य देने के लिए महिलाओं ने तिल, गुड़, गन्ना, मूली आदि की खरीदारी की।
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दिनभर निराहार व्रत के उपरांत रात चंद्रोदय होने पर महिलाओं ने चंद्र देव को अर्घ्य देकर अपने पुत्रों के दीर्घायु होने के साथ परिवार की सुख समृद्धि की कामना की। कई महिलाओं ने पूजन के बाद अपने पुत्रों की ढाई मुट्ठी पुगे सहित तिल, गुड़, गन्ना, मूली का दान करवाया। शहर के वार्ड 6 निवासी अमिता गुप्ता ने बताया कि व्रत को लेकर प्रचलित कथा के अनुसार भगवान श्री गणेश की भक्त एक विधवा ब्राह्मणी के बेटे को बलि देने के नियत से कुम्हार ने मिट्टी के बर्तन पकाने के लिए जलाई जाने वाली आग में डाल दिया।
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लेकिन भगवान श्री गणेश की कृपा से ब्राम्हणी का पुत्र उस आग से भी सुरक्षित रहा। जिसके बाद ग्लानि से भरा कुम्हार नगर के राजा के पास गया और सारी कथा सुनाई और ब्राह्मणी को उसका बेटा सौंप दिया। जिसके बाद राजा के आदेश से वहां हर साल माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकट चतुर्थी के रूप से परंपरा शुरू हो गई जो आज भी जारी है।
महिलाओं ने मंदिर जाकर की भगवान गणेश की वंदना
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलावर। माघ महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर सोमवार को संकट चौथ का व्रत रखा गया। महिलाओं ने सुबह मंदिरों में जाकर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की और संकट चौथ पर भगवान गणेश की वंदना करते हुए अपनी संतान की दीर्घायु की कामना की।
महिलाओं ने व्रत कथा सुनकर विधि-विधान से पूजा की। रात को चंद्रोदय के दर्शन के बाद महिलाओं ने व्रत खोला। महिला सुमन देवी, सुनीता, शकुंतला, राम मूर्ति, मंजू देवी, सुलेखा देवी, कोमल और टीना ने बताया कि संकट चौथ में महिलाएं अपने संतान की लंबी आयु और घर में सुख समृद्धि की कामना के लिए दिन में उपवास रखती है। ऐसी मान्यता है कि संकट चौथ का व्रत रखने और भगवान गणेश की पूजा अर्चना करने से आने वाले सभी संकट दूर हो जाते हैं। दिनभर आवाज रखने के बाद शाम के समय भगवान गणेश की पूजा करने के बाद चंद्रमा को जल अर्पित कर व्रत को खोलते हैं। इसके बाद महिलाएं तिल के बने खाद पदार्थ का प्रसाद के रूप में सेवन करती हैं, पंडित राधा कृष्ण शास्त्री ने बताया कि इस व्रत को संकट चौथ का व्रत भी कहा जाता है और इसे तिलकुट चौथ भी कहते हैं।