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आईबी से सटे गांवों में सड़कें खस्ताहाल, लोग परेशान
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अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) से सटे गांवों में खस्ताहाल सड़कों की वजह से लोगों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जीरो लाइन पर बेहतर सड़क सुविधा न होने से लोगों में सरकार के प्रति रोष है। लोगों का कहना है कि सीमा से सटे इलाके में रहने वाले लोगों को अब तक बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा गया है।
जीरो लाइन के पास गांव में रहने वाले रतन लाल ने बताया कि पहाड़पुर से लेकर बोबिया तक सड़क की हालत इतनी खस्ता हो चुकी है कि यहां वाहन लेकर चलना तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से यहां यातायात की सुविधा भी लोगों को नहीं मिल रही है।
ओल्ड सांबा-कठुआ रोड से सीमावर्ती इलाकों के जितने भी संपर्क मार्ग हैं, उनकी भी हालत बेहद खराब है। जीरो लाइन पर करीब 50 गांवों को जोड़ने वाली सड़क खड्ड में तब्दील हो गई है। इस बारे में संबंधित विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों से बात कर चुके हैं लेकिन समाधान नहीं हुआ है।
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पूर्व सरपंच राकेश कुमार ने कहा चकड़ा, भगवाना चक, कडयाला, गुज्जर चक, चक चंगा, मानियारी, पानसर आदि गांवों को आपस में सीधा जोड़ने वाली सड़क पिछले कई वर्षों से पूरी तरह से टूट चुकी है। अब तो हालत यह हो चुकी है कि नजदीक के ही गांव जाने के लिए दूसरे गांवों से होकर जाना पड़ता है। इस रूट पर यातायात की सुविधा भी बंद हो गई है। यात्री बस पकड़ने के लिए यहां के लोगों को पैदल चलकर दूसरे गांव जाना पड़ता है।
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जीरो लाइन के पास गांव में रहने वाले रतन लाल ने बताया कि पहाड़पुर से लेकर बोबिया तक सड़क की हालत इतनी खस्ता हो चुकी है कि यहां वाहन लेकर चलना तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से यहां यातायात की सुविधा भी लोगों को नहीं मिल रही है।
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ओल्ड सांबा-कठुआ रोड से सीमावर्ती इलाकों के जितने भी संपर्क मार्ग हैं, उनकी भी हालत बेहद खराब है। जीरो लाइन पर करीब 50 गांवों को जोड़ने वाली सड़क खड्ड में तब्दील हो गई है। इस बारे में संबंधित विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों से बात कर चुके हैं लेकिन समाधान नहीं हुआ है।
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पूर्व सरपंच राकेश कुमार ने कहा चकड़ा, भगवाना चक, कडयाला, गुज्जर चक, चक चंगा, मानियारी, पानसर आदि गांवों को आपस में सीधा जोड़ने वाली सड़क पिछले कई वर्षों से पूरी तरह से टूट चुकी है। अब तो हालत यह हो चुकी है कि नजदीक के ही गांव जाने के लिए दूसरे गांवों से होकर जाना पड़ता है। इस रूट पर यातायात की सुविधा भी बंद हो गई है। यात्री बस पकड़ने के लिए यहां के लोगों को पैदल चलकर दूसरे गांव जाना पड़ता है।