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ग्रामीण विरासतों को पुनर्जीवित करें-आयुक्त सचिव
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डीसी कार्यालय के कॉफ्रेंस हाल में आयोजित बैठक की अध्यक्षता करती ग्रामीण विकास विभाग की आयुक्त स?
- फोटो : KATHUA
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कठुआ। मंगलवार को ग्रामीण विकास विभाग की आयुक्त सचिव मंदीप कौर कठुआ दौरे पर पहुंचीं। जिला सचिवालय के सभागार में उन्होंने पंचायती राज प्रतिनिधियों के साथ ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की चल रही योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रगति पर समीक्षा की। इस दौरान आयुक्त ने हर क्षेत्र में दो-दो ग्रामीण विरासतों को पुनर्जीवित करने की पहल पर चर्चा की। साथ ही उन्होंने संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में दो विरासत कार्यों की पहचान करने के लिए कहा, ताकि पारंपरिक और सांस्कृतिक महत्व की ऐसी विरासतों की पहचान कर उनके संरक्षण पर काम किया जा सके। रुकी हुई परियोजनाओं के मुद्दे पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को पंचायती राज संस्थाओं के हस्तक्षेप से विवादों का तत्काल समाधान करने की सलाह दी।
आयुक्त सचिव ने बेहतर लिंकेज और समन्वय, सूचना प्रसार और इसके अपडेशन की आवश्यकता पर जोर देते हुए बताया कि आने वाले समय में सभी पंचायत घरों को भारत नेट के माध्यम से इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी।
इससे पहले बैठक में मानव संसाधन की स्थिति, यूटी कैपेक्स बजट, पीएमएवाई (ग्रामीण), मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), आरजीएसए, 14वें वित्त आयोग, आईडब्ल्यूएमपी, उम्मीद, हिमायत और अन्य विभागीय योजनाओं से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। आयुक्त सचिव ने जिले में उपलब्ध मानव संसाधन की समीक्षा करते हुए आश्वासन दिया कि बीडीओ और जेई के रिक्त पदों को जल्द भरा जाएगा।
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ब्लॉकवार निधि की उपलब्धता और अब तक के उपयोग पर भी विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने बीडीओ को कार्यों के आवंटन की उचित प्रक्रिया का पालन करने का निर्देश दिया ताकि इसके चलते विकास कार्यों में बाधा न आए। उन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यों की पहचान के लिए सभी बीडीसी, डीडीसी और पीआरआई से परामर्श करने के निर्देश दिए। डीडीसी और बीडीसी के कार्यालयों, आवर्ती व्यय एवं फर्नीचर की व्यवस्था के संबंध में आयुक्त सचिव ने उपायुक्त को आवश्यक स्वीकृतियां प्रदान करने के लिए डीपीआर बनाने के निर्देश दिए। आयुक्त सचिव ने चल रहे कार्यों की धीमी गति को गंभीरता से लेते हुए गुणवत्ता एवं मानकों को सुनिश्चित करते हुए निर्धारित समय के भीतर कार्यों को शीघ्र पूरा करने पर बल दिया। उन्होंने अधिकारियों से विभागीय पोर्टल पर पूर्ण किए गए कार्यों का विवरण अपलोड करने के लिए कहा। उन्होंने महात्मा गांधी नरेगा की समीक्षा करते हुए बीडीओ को एक सप्ताह के भीतर एमआईएस पोर्टल पर पूर्ण कार्यों से संबंधित डेटा अपडेट करने का निर्देश दिया। इसके अलावा, वित्तीय और भौतिक उपलब्धियों, धन की उपलब्धता, गैर अभिसरण कार्यों, अभिसरण कार्यों, लंबित देयता आदि पर भी चर्चा की गई। बैठक के दौरान आयुक्त सचिव ने डीडीसी, बीडीसी और पीआरआई द्वारा रखी गई मांगों को भी सुना और समाधान का आश्वासन दिया। बैठक में जिला विकास परिषद के अध्यक्ष कठुआ महान सिंह, उपायुक्त कठुआ राहुल यादव, मिशन निदेशक जेकेआरएलएम डॉ सेहरिश असगर, निदेशक ग्रामीण विकास विभाग जम्मू मोहम्मद मुमताज अली भी मौजूद रहे।
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डीडीसी बरनोटी सदस्य सुषमा कुमारी ने किया बैठक का बहिष्कार
बैठक के दौरान अपनी बात रखने का समय न दिए जाने का आरोप लगाते हुए बरनोटी से जिला विकास परिषद की सदस्य सुषमा कुमारी ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि बैठक में समय का अभाव बताते हुए केवल डीडीसी और बीडीसी से एक एक प्रतिनिधि को बोलने का मौका देने की बात कही गई। ऐसे में पहाड़ी इलाके के प्रतिनिधियों को अन्य जगह की जानकारी कैसे होगी। उन्होंने कहा कि पहले भी बैठकों में ऐसा होता रहा है जिससे वे आहत हैं और बैठक का बहिष्कार किया है। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी जिला विकास परिषद अध्यक्ष को कहा गया था कि कम से कम दो दो मिनट का समय दिया जाए। उधर, जिला विकास परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि यह बैठक भाषण के लिए नहीं थी, मुद्दों पर बैठक रखी गई थी। यदि डीडीसी सदस्य को कोई नाराजगी है तो घर की बात है मामला सुलझा लिया जाएगा।
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आयुक्त सचिव ने बेहतर लिंकेज और समन्वय, सूचना प्रसार और इसके अपडेशन की आवश्यकता पर जोर देते हुए बताया कि आने वाले समय में सभी पंचायत घरों को भारत नेट के माध्यम से इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी।
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इससे पहले बैठक में मानव संसाधन की स्थिति, यूटी कैपेक्स बजट, पीएमएवाई (ग्रामीण), मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), आरजीएसए, 14वें वित्त आयोग, आईडब्ल्यूएमपी, उम्मीद, हिमायत और अन्य विभागीय योजनाओं से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। आयुक्त सचिव ने जिले में उपलब्ध मानव संसाधन की समीक्षा करते हुए आश्वासन दिया कि बीडीओ और जेई के रिक्त पदों को जल्द भरा जाएगा।
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ब्लॉकवार निधि की उपलब्धता और अब तक के उपयोग पर भी विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने बीडीओ को कार्यों के आवंटन की उचित प्रक्रिया का पालन करने का निर्देश दिया ताकि इसके चलते विकास कार्यों में बाधा न आए। उन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यों की पहचान के लिए सभी बीडीसी, डीडीसी और पीआरआई से परामर्श करने के निर्देश दिए। डीडीसी और बीडीसी के कार्यालयों, आवर्ती व्यय एवं फर्नीचर की व्यवस्था के संबंध में आयुक्त सचिव ने उपायुक्त को आवश्यक स्वीकृतियां प्रदान करने के लिए डीपीआर बनाने के निर्देश दिए। आयुक्त सचिव ने चल रहे कार्यों की धीमी गति को गंभीरता से लेते हुए गुणवत्ता एवं मानकों को सुनिश्चित करते हुए निर्धारित समय के भीतर कार्यों को शीघ्र पूरा करने पर बल दिया। उन्होंने अधिकारियों से विभागीय पोर्टल पर पूर्ण किए गए कार्यों का विवरण अपलोड करने के लिए कहा। उन्होंने महात्मा गांधी नरेगा की समीक्षा करते हुए बीडीओ को एक सप्ताह के भीतर एमआईएस पोर्टल पर पूर्ण कार्यों से संबंधित डेटा अपडेट करने का निर्देश दिया। इसके अलावा, वित्तीय और भौतिक उपलब्धियों, धन की उपलब्धता, गैर अभिसरण कार्यों, अभिसरण कार्यों, लंबित देयता आदि पर भी चर्चा की गई। बैठक के दौरान आयुक्त सचिव ने डीडीसी, बीडीसी और पीआरआई द्वारा रखी गई मांगों को भी सुना और समाधान का आश्वासन दिया। बैठक में जिला विकास परिषद के अध्यक्ष कठुआ महान सिंह, उपायुक्त कठुआ राहुल यादव, मिशन निदेशक जेकेआरएलएम डॉ सेहरिश असगर, निदेशक ग्रामीण विकास विभाग जम्मू मोहम्मद मुमताज अली भी मौजूद रहे।
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डीडीसी बरनोटी सदस्य सुषमा कुमारी ने किया बैठक का बहिष्कार
बैठक के दौरान अपनी बात रखने का समय न दिए जाने का आरोप लगाते हुए बरनोटी से जिला विकास परिषद की सदस्य सुषमा कुमारी ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि बैठक में समय का अभाव बताते हुए केवल डीडीसी और बीडीसी से एक एक प्रतिनिधि को बोलने का मौका देने की बात कही गई। ऐसे में पहाड़ी इलाके के प्रतिनिधियों को अन्य जगह की जानकारी कैसे होगी। उन्होंने कहा कि पहले भी बैठकों में ऐसा होता रहा है जिससे वे आहत हैं और बैठक का बहिष्कार किया है। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी जिला विकास परिषद अध्यक्ष को कहा गया था कि कम से कम दो दो मिनट का समय दिया जाए। उधर, जिला विकास परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि यह बैठक भाषण के लिए नहीं थी, मुद्दों पर बैठक रखी गई थी। यदि डीडीसी सदस्य को कोई नाराजगी है तो घर की बात है मामला सुलझा लिया जाएगा।