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कृषि भूमि पर बनीं कॉलोनियों का रिकार्ड तलब
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कठुआ। हाल के वर्षों में कृषि भूमि पर धड़ल्ले से तैयार की गई अवैध कॉलोनियों के मामले में जल्द कार्रवाई सामने आ सकती है। मामला मंडलायुक्त के संज्ञान में आने के बाद मिले निर्देश पर जिला प्रशासन कृषि भूमि पर तैयार की गई अवैध कॉलोनियों की जानकारी जुटाने में लग गया है।
संबंधित क्षेत्रों के पटवारियों को राजस्व विभाग की ओर से दो टूक निर्देश दिए गए हैं कि उनके पटवार हल्के के अधीन तैयार हुई कॉलोनियों की जानकारी पर रिपोर्ट जल्द से जल्द तैयार कर सौंपें। इसमें खास तौर पर कृषि जमीनों पर हुए अवैध कॉलोनियों के निर्माण की रिपोर्ट तलब की गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि जम्मू में हाल में हुई कार्रवाई की तरह प्रशासन कठुआ में भी अवैध कॉलोनियों पर बड़ी कार्रवाई कर सकता है। कायदे से कार्रवाई उन राजस्व कर्मचारियों और अधिकारियों पर भी बनती है जिन्होंने इन अवैध कॉलोनियों को तैयार होने दिया। लोगों की मानें तो इसमें राजस्व विभाग की भी बड़ी मिलीभगत है। बरवाल, नगर पल्ली मार्ग, शहर के वार्ड 21, जराई, कीड़ियां गंडियाल मार्ग, बेड़ियां पत्तन, बरनोटी सहित कई अन्य जगह पर बड़े पैमाने पर कृषि भूमि पर कॉलोनियों के निर्माण हुए। राजस्व विभाग के अधिकारी इस निर्माण पर चुप्पी साधे रहे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राजस्व विभाग की ओर से कृषि भूमि पर तैयार की गई कॉलोनियों की रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
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सरकार को हो रहा है लाखों के राजस्व का नुकसान,
कठुआ। शहर और आसपास के इलाकों में जमीन के कारोबार पर माफिया सक्रिय हैं। नियम कायदों को ताक पर रखकर कॉलोनी काटी जा रही हैं। कृषि भूमि का भू-उपयोग बदलने के नियम का भी कड़ाई से पालन नहीं हो रहा है। नियम सामने आने के बाद इन कॉलोनियों को बचाने के लिए सांठ गांठ भी शुरू कर दी गई है।
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यह खेल सियासत से गठजोड़ और प्रशासनिक स्तर पर सेटिंग से चल रहा है। इससे ना केवल सरकार को राजस्व के रूप में नुकसान पहुंचाया जा रहा है, बल्कि अनाधिकृत कॉलोनी में प्लाट खरीदने वालों को भी ठगा जा रहा है। उन्हें बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं।
कॉलोनाइजर रातों रात अवैध कॉलोनियां काटकर शुरूआती दौर में सस्ती दरों पर भूखंडों को बेचते हैं, लेकिन बाद में कृषि जमीनों के कई गुणा अधिक दाम वसूले जाते हैं। इससे सरकार को तो लाखों रुपयों की राजस्व हानि हो ही रही हैं, साथ ही खरीदने वाले लोगों को भी वैधानिक सुविधाएं नहीं मिल पाने से उनके सामने संकट खड़ा हो जाता है। नगर परिषद की हद में ऐसे कई मामले सामने आ रहे है, जिन पर शिकंजा कसने के लिए सर्वे शुरू करवाया गया है। बिना कन्वर्जन के कॉलोनी काटने से जमीन मालिकों को बिजली, पानी, सड़क, आवासीय व व्यवसायिक निर्माण करने के लिए स्वीकृति नहीं मिलती है। कॉलोनी काटने के दौरान तो कॉलोनाइजर लोगों को सुविधाएं देने के नाम पर बड़े-बड़े वादे करते है। बाद में पूरे भूखंड बिकने के बाद भूखंड मालिक कॉलोनाइजरों के चक्कर ही काटते रहते है।
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संबंधित क्षेत्रों के पटवारियों को राजस्व विभाग की ओर से दो टूक निर्देश दिए गए हैं कि उनके पटवार हल्के के अधीन तैयार हुई कॉलोनियों की जानकारी पर रिपोर्ट जल्द से जल्द तैयार कर सौंपें। इसमें खास तौर पर कृषि जमीनों पर हुए अवैध कॉलोनियों के निर्माण की रिपोर्ट तलब की गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि जम्मू में हाल में हुई कार्रवाई की तरह प्रशासन कठुआ में भी अवैध कॉलोनियों पर बड़ी कार्रवाई कर सकता है। कायदे से कार्रवाई उन राजस्व कर्मचारियों और अधिकारियों पर भी बनती है जिन्होंने इन अवैध कॉलोनियों को तैयार होने दिया। लोगों की मानें तो इसमें राजस्व विभाग की भी बड़ी मिलीभगत है। बरवाल, नगर पल्ली मार्ग, शहर के वार्ड 21, जराई, कीड़ियां गंडियाल मार्ग, बेड़ियां पत्तन, बरनोटी सहित कई अन्य जगह पर बड़े पैमाने पर कृषि भूमि पर कॉलोनियों के निर्माण हुए। राजस्व विभाग के अधिकारी इस निर्माण पर चुप्पी साधे रहे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राजस्व विभाग की ओर से कृषि भूमि पर तैयार की गई कॉलोनियों की रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
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सरकार को हो रहा है लाखों के राजस्व का नुकसान,
कठुआ। शहर और आसपास के इलाकों में जमीन के कारोबार पर माफिया सक्रिय हैं। नियम कायदों को ताक पर रखकर कॉलोनी काटी जा रही हैं। कृषि भूमि का भू-उपयोग बदलने के नियम का भी कड़ाई से पालन नहीं हो रहा है। नियम सामने आने के बाद इन कॉलोनियों को बचाने के लिए सांठ गांठ भी शुरू कर दी गई है।
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यह खेल सियासत से गठजोड़ और प्रशासनिक स्तर पर सेटिंग से चल रहा है। इससे ना केवल सरकार को राजस्व के रूप में नुकसान पहुंचाया जा रहा है, बल्कि अनाधिकृत कॉलोनी में प्लाट खरीदने वालों को भी ठगा जा रहा है। उन्हें बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं।
कॉलोनाइजर रातों रात अवैध कॉलोनियां काटकर शुरूआती दौर में सस्ती दरों पर भूखंडों को बेचते हैं, लेकिन बाद में कृषि जमीनों के कई गुणा अधिक दाम वसूले जाते हैं। इससे सरकार को तो लाखों रुपयों की राजस्व हानि हो ही रही हैं, साथ ही खरीदने वाले लोगों को भी वैधानिक सुविधाएं नहीं मिल पाने से उनके सामने संकट खड़ा हो जाता है। नगर परिषद की हद में ऐसे कई मामले सामने आ रहे है, जिन पर शिकंजा कसने के लिए सर्वे शुरू करवाया गया है। बिना कन्वर्जन के कॉलोनी काटने से जमीन मालिकों को बिजली, पानी, सड़क, आवासीय व व्यवसायिक निर्माण करने के लिए स्वीकृति नहीं मिलती है। कॉलोनी काटने के दौरान तो कॉलोनाइजर लोगों को सुविधाएं देने के नाम पर बड़े-बड़े वादे करते है। बाद में पूरे भूखंड बिकने के बाद भूखंड मालिक कॉलोनाइजरों के चक्कर ही काटते रहते है।