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बारिश की फुहारों ने गर्मी से दिलाई राहत
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कठुआ। वीरवार को जिले में मौसम का बदला मिजाज आम लोगों के लिए राहत लेकर आया। 54 दिन के लंबे इंतजार के बाद आसमान से बारिश की फुहारें राहत बनकर बरसीं। पहाड़ी इलाकों में जहां अच्छी बारिश दर्ज की गई वहीं मैदानी इलाकों में तपती धरा की प्यास भी बुझ नहीं पाई है। कृषि विज्ञान केंद्र कठुआ की मौसम विज्ञान इकाई में वीरवार को मात्र दो एमएम बारिश ही दर्ज की गई है। बादलों के साथ पहाड़ों से आ रही ठंडी बयार ने अधिकतम तापमान से भी जहां तीन से चार डिग्री की राहत दी है वहीं दिन के समय पहाड़ी इलाकों में सर्दी का एहसास शुरू हो गया था।
जिले में आखिरी बारिश का दौर 25 और 26 फरवरी को 20 एमएम दर्ज किया गया था। हालांकि यह बारिश उस समय भी नाकाफी थी। फरवरी और मार्च महीने में तापमान में एकाएक वृद्ध के बीच औसत बारिश भी नहीं हुई, जिसका असर कई जगह पर फसलों की पैदावर पर भी पड़ा है। पूर्वानुमान के अनुसार वीरवार को मौसम खराब होने के बीच ही किसानों ने अपनी फसलों को समेटना शुरू कर दिया। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल यह बारिश किसानों के लिए राहत नहीं है। फसलों की कटाई में जुटे किसानों को जहां वीरवार को मौसम के साफ होने इंतजार करना पड़ा है, वहीं कटी हुई फसलों को समेटने और गीले हो रहे दानों को सुखाने के प्रबंध भी किसानों को करने होंगे। उधर, जिले के पहाड़ी बनी और मल्हार इलाकों में बारिश के बाद सर्द हवाओं में इजाफा हुआ है। इलाके में यह बारिश बागवानी के लिए अच्छी मानी जा रही है।
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जिले में आखिरी बारिश का दौर 25 और 26 फरवरी को 20 एमएम दर्ज किया गया था। हालांकि यह बारिश उस समय भी नाकाफी थी। फरवरी और मार्च महीने में तापमान में एकाएक वृद्ध के बीच औसत बारिश भी नहीं हुई, जिसका असर कई जगह पर फसलों की पैदावर पर भी पड़ा है। पूर्वानुमान के अनुसार वीरवार को मौसम खराब होने के बीच ही किसानों ने अपनी फसलों को समेटना शुरू कर दिया। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल यह बारिश किसानों के लिए राहत नहीं है। फसलों की कटाई में जुटे किसानों को जहां वीरवार को मौसम के साफ होने इंतजार करना पड़ा है, वहीं कटी हुई फसलों को समेटने और गीले हो रहे दानों को सुखाने के प्रबंध भी किसानों को करने होंगे। उधर, जिले के पहाड़ी बनी और मल्हार इलाकों में बारिश के बाद सर्द हवाओं में इजाफा हुआ है। इलाके में यह बारिश बागवानी के लिए अच्छी मानी जा रही है।
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