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नए कृषि कानूनों के खिलाफ मजदूरों ने निकाला जुलूस
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ए कृषि कानूनों के खिलाफ जुलूस निकालते मजदूर। - संवाद।
- फोटो : KATHUA
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हीरानगर। नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों के समर्थन में सोमवार को मजदूरों ने भवन निर्माण कामगार यूनियन के बैनर तले जलूस निकाला। यूनियन के कार्यालय से लेकर मढीन तहसील मुख्यालय तक निकाले गए जुलूस में भारी संख्या में मजदूरों ने हिस्सा लिया।
यूनियन के अध्यक्ष कामरेड राजकुमार ने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों के समर्थन में और श्रम कानूनों में किए गए बदलावों के खिलाफ आज जुलूस निकाला गया है। किसानों और मजदूरों के खिलाफ सरकार का रवैया इसी तरह से अड़ियल रहा, तो भविष्य में संघर्ष सड़कों पर शुरू होगा। नए कृषि कानून पूरी तरह से काले कानून हैं, जिनका किसानों को नहीं, बल्कि चंद पूंजीपतियों को लाभ होगा। इन कानूनों के खिलाफ संघर्ष कर रहे किसानों को यूनियन का पूरा समर्थन है।
उन्होंने कहा कि सरकार देश के अन्नदाता के प्रति नरम लहजा अपनाते हुए तीनों कानूनों को रद्द करे। सरकार न सिर्फ किसान विरोधी है, बल्कि मजदूरों के खिलाफ भी उन्होंने कई कानून बनाए हैं। जिनमें मजदूरों को फिर से गुलाम बनाने की कोशिश की गई है। कोरोना महामारी का इस सरकार ने लाभ उठाते हुए कई किसान और मजदूर विरोधी कानून बनाने का काम किया है। मजदूरों के अधिकारों को सुरक्षित करने वाले करीब 44 श्रम कानूनों को खत्म कर दिया गया है। हफ्ते में मजदूरों को तीन दिन की छुट्टी की चर्चा भी जोरों पर है। लेकिन, उसमें जो प्रावधान रखा गया है, वह आठ घंटे की बजाय 12 घंटे काम करने का है।
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उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि किसान और मजदूरों के प्रति सरकार का यही रुख रहा तो मजदूरों को अपनी लड़ाई सड़कों पर लड़नी पड़ेगी। इसके लिए वे पूरी तरह से तैयार हैं। जुलूस के बाद यूनियन के नेताओं ने तहसीलदार को ज्ञापन भी सौंपा। जुलूस में अजीत कुमार, सोमलाल, गरीबदास, संपूर्ण सिंह, गणेश दत्त, यशपाल, बोधराज, आदि शामिल रहे।
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यूनियन के अध्यक्ष कामरेड राजकुमार ने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों के समर्थन में और श्रम कानूनों में किए गए बदलावों के खिलाफ आज जुलूस निकाला गया है। किसानों और मजदूरों के खिलाफ सरकार का रवैया इसी तरह से अड़ियल रहा, तो भविष्य में संघर्ष सड़कों पर शुरू होगा। नए कृषि कानून पूरी तरह से काले कानून हैं, जिनका किसानों को नहीं, बल्कि चंद पूंजीपतियों को लाभ होगा। इन कानूनों के खिलाफ संघर्ष कर रहे किसानों को यूनियन का पूरा समर्थन है।
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उन्होंने कहा कि सरकार देश के अन्नदाता के प्रति नरम लहजा अपनाते हुए तीनों कानूनों को रद्द करे। सरकार न सिर्फ किसान विरोधी है, बल्कि मजदूरों के खिलाफ भी उन्होंने कई कानून बनाए हैं। जिनमें मजदूरों को फिर से गुलाम बनाने की कोशिश की गई है। कोरोना महामारी का इस सरकार ने लाभ उठाते हुए कई किसान और मजदूर विरोधी कानून बनाने का काम किया है। मजदूरों के अधिकारों को सुरक्षित करने वाले करीब 44 श्रम कानूनों को खत्म कर दिया गया है। हफ्ते में मजदूरों को तीन दिन की छुट्टी की चर्चा भी जोरों पर है। लेकिन, उसमें जो प्रावधान रखा गया है, वह आठ घंटे की बजाय 12 घंटे काम करने का है।
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उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि किसान और मजदूरों के प्रति सरकार का यही रुख रहा तो मजदूरों को अपनी लड़ाई सड़कों पर लड़नी पड़ेगी। इसके लिए वे पूरी तरह से तैयार हैं। जुलूस के बाद यूनियन के नेताओं ने तहसीलदार को ज्ञापन भी सौंपा। जुलूस में अजीत कुमार, सोमलाल, गरीबदास, संपूर्ण सिंह, गणेश दत्त, यशपाल, बोधराज, आदि शामिल रहे।