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लोक निर्माण विभाग के अस्थायी कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर जताया रोष
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कठुआ। नियमितीकरण की मांग को लेकर लोक निर्माण विभाग के अस्थायी कर्मचारियों की हड़ताल सातवें दिन भी जारी रही। सोमवार को विभाग के अधीक्षक अभियंता कार्यालय के समक्ष कर्मचारियों ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर अपना रोष जताया।
ऑल डिपार्टमेंट कैजुअल लेबर यूनाइटेड फ्रंट के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का नेतृत्व कर रहे जिला प्रधान प्रवीण कुमार ने कहा कि अपने उज्जवल भविष्य की आस लेकर वर्षों से विभाग में सेवा देने वाले अस्थायी कर्मचारियों की सरकार सुध नहीं ले रही है। पिछले नौ माह से वेतन न मिलने कारण अस्थायी कर्मचारियों के घरों में अब चूल्हा भी नहीं जल पा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा-पीडीपी गठबंधन सरकार के दौरान दो दशक से ज्यादा लंबे समय से सेवा देने वाले इन कर्मचारियों को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जो आज तक पूरी नही हो पाई। केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मर को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दे दिया, लेकिन यहां अस्थायी कर्मचारियों को केंद्र शासित प्रदेश के मानक के अनुसार न्यूनतम मजदूर भी नहीं दी जा रही है। इसके कारण अब अस्थायी कर्मचारियों में सकार के प्रति रोष बढ़ता जा रहा है। उन्होंने केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के खिलाफ रोष जताते हुए कहा कि स्थानीय सांसद भले ही केंद्र में मंत्री बन गए हैं, लेकिन उन्हें सांसद बनाकर कठुआ के लोगों ने ही भेजा है। अगर वह भी उनकी समस्या का समाधान नहीं करते हैं, तो इसका खामियाजा उन्हें आने वाले लोकसभा चुनाव में उठाना पड़ेगा।
वहीं, इसी क्रम में बिलावर में जलशक्ति विभाग और लोक निर्माण विभाग के अस्थाई कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शन कर रहे लोक निर्माण विभाग के अस्थाई कर्मचारियों का नेतृत्व कर रहे जगदीश राज और जलशक्ति विभाग के बीरबल जलमेरिया ने कहा कि सरकार द्वारा लगातार की जा रही अनदेखी उनके गुस्से को भड़का रही है। लिहाजा कर्मचारियों का आंदोलन उग्र होने से पहले सरकार उनकी मांगों को पूरा करने की पहल करे।
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बसोहली में जलशक्ति विभाग के अस्थायी कर्मियों का प्रदर्शन
बसोहली। जलशक्ति विभाग बसोहली कार्यालय के समक्ष सोमवार को धरना प्रदर्शन कर सरकार के विरुद्ध अस्थायी कर्मियों ने रोष जताया। उन्होंने कहा कि सरकार उनके साथ भेदभाव कर रही है। जलशक्ति विभाग के अस्थायी कर्मियों का समर्थन करने पहुंचे बिजली विभाग के अस्थायी कर्मियों ने भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर उन्हें स्थायी करने और बकाया वेतन जारी करने की मांग की। बिजली विभाग के अस्थाई कर्मियों के प्रधान धीरज पाधा, उपप्रधान विक्रांत मिश्रा ने बताया कि वह काम छोड़ हड़ताल पर हैं और सरकार से अपनी मांगों को पूरा करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन आज तक सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया है। बिजली पानी आपूर्ति बाधित होने पर सरकार इसके लिए खुद जिम्मेदार होगी। जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होती तब तक काम छोड़ हड़ताल जारी रहेगी। सरकार नई नीति लागू कर कर्मियों को स्थायी करने के लिए कदम उठाए और उनका बकाया वेतन भी शीघ्र जारी करे।
जल शक्ति विभाग के अस्थायी कर्मियों के प्रधान शंकर सिंह ने बताया कि बीते 25 वर्षों से कर्मी विभाग के दूरदराज इलाकों में सेवाएं दे रहे हैं, 63 माह का बकाया वेतन भी उन्हें नहीं मिला है। अगर कर्मी बीते 25 वर्षों से विभाग में निशुल्क सेवाएं दे रहे हैं और अगर आज हम अपनी मांगों के साथ सड़कों पर उतर रहे हैं तो उसमें गलत क्या है। कोई भी ऐसा अस्थायी कर्मी नहीं है, जो मौजूदा समय में कर्जे में न डूबा हो। आमदनी का कोई साधन न होने पर न घर का खर्च चला पा रहे हैं और न ही बच्चों की स्कूल और ट्यूशन की फीस देने में सक्षम हैं। दुकानदारों की देनदारी भी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। परिवार व बच्चों का पालन-पोषण करना और उनकी पढ़ाई का खर्च वहन करना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
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ऑल डिपार्टमेंट कैजुअल लेबर यूनाइटेड फ्रंट के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का नेतृत्व कर रहे जिला प्रधान प्रवीण कुमार ने कहा कि अपने उज्जवल भविष्य की आस लेकर वर्षों से विभाग में सेवा देने वाले अस्थायी कर्मचारियों की सरकार सुध नहीं ले रही है। पिछले नौ माह से वेतन न मिलने कारण अस्थायी कर्मचारियों के घरों में अब चूल्हा भी नहीं जल पा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा-पीडीपी गठबंधन सरकार के दौरान दो दशक से ज्यादा लंबे समय से सेवा देने वाले इन कर्मचारियों को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जो आज तक पूरी नही हो पाई। केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मर को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दे दिया, लेकिन यहां अस्थायी कर्मचारियों को केंद्र शासित प्रदेश के मानक के अनुसार न्यूनतम मजदूर भी नहीं दी जा रही है। इसके कारण अब अस्थायी कर्मचारियों में सकार के प्रति रोष बढ़ता जा रहा है। उन्होंने केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के खिलाफ रोष जताते हुए कहा कि स्थानीय सांसद भले ही केंद्र में मंत्री बन गए हैं, लेकिन उन्हें सांसद बनाकर कठुआ के लोगों ने ही भेजा है। अगर वह भी उनकी समस्या का समाधान नहीं करते हैं, तो इसका खामियाजा उन्हें आने वाले लोकसभा चुनाव में उठाना पड़ेगा।
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वहीं, इसी क्रम में बिलावर में जलशक्ति विभाग और लोक निर्माण विभाग के अस्थाई कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शन कर रहे लोक निर्माण विभाग के अस्थाई कर्मचारियों का नेतृत्व कर रहे जगदीश राज और जलशक्ति विभाग के बीरबल जलमेरिया ने कहा कि सरकार द्वारा लगातार की जा रही अनदेखी उनके गुस्से को भड़का रही है। लिहाजा कर्मचारियों का आंदोलन उग्र होने से पहले सरकार उनकी मांगों को पूरा करने की पहल करे।
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बसोहली में जलशक्ति विभाग के अस्थायी कर्मियों का प्रदर्शन
बसोहली। जलशक्ति विभाग बसोहली कार्यालय के समक्ष सोमवार को धरना प्रदर्शन कर सरकार के विरुद्ध अस्थायी कर्मियों ने रोष जताया। उन्होंने कहा कि सरकार उनके साथ भेदभाव कर रही है। जलशक्ति विभाग के अस्थायी कर्मियों का समर्थन करने पहुंचे बिजली विभाग के अस्थायी कर्मियों ने भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर उन्हें स्थायी करने और बकाया वेतन जारी करने की मांग की। बिजली विभाग के अस्थाई कर्मियों के प्रधान धीरज पाधा, उपप्रधान विक्रांत मिश्रा ने बताया कि वह काम छोड़ हड़ताल पर हैं और सरकार से अपनी मांगों को पूरा करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन आज तक सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया है। बिजली पानी आपूर्ति बाधित होने पर सरकार इसके लिए खुद जिम्मेदार होगी। जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होती तब तक काम छोड़ हड़ताल जारी रहेगी। सरकार नई नीति लागू कर कर्मियों को स्थायी करने के लिए कदम उठाए और उनका बकाया वेतन भी शीघ्र जारी करे।
जल शक्ति विभाग के अस्थायी कर्मियों के प्रधान शंकर सिंह ने बताया कि बीते 25 वर्षों से कर्मी विभाग के दूरदराज इलाकों में सेवाएं दे रहे हैं, 63 माह का बकाया वेतन भी उन्हें नहीं मिला है। अगर कर्मी बीते 25 वर्षों से विभाग में निशुल्क सेवाएं दे रहे हैं और अगर आज हम अपनी मांगों के साथ सड़कों पर उतर रहे हैं तो उसमें गलत क्या है। कोई भी ऐसा अस्थायी कर्मी नहीं है, जो मौजूदा समय में कर्जे में न डूबा हो। आमदनी का कोई साधन न होने पर न घर का खर्च चला पा रहे हैं और न ही बच्चों की स्कूल और ट्यूशन की फीस देने में सक्षम हैं। दुकानदारों की देनदारी भी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। परिवार व बच्चों का पालन-पोषण करना और उनकी पढ़ाई का खर्च वहन करना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है।