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अब जम्मू-कश्मीर में प्लास्टिक से बनेंगी सड़कें
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कठुआ। प्रदेश में अब प्लास्टिक कचरा न तो नदी-नालों में बहेगा और न ही प्लास्टिक कचरे का कहीं अंबार लगेगा। अब जम्मू-कश्मीर में सड़कों का निर्माण भी प्लास्टिक से किया जाएगा। बीडीओ निष्पादित नहीं हो पाने वाले प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल सड़कों के निर्माण में इस्तेमाल करवाना सुनिश्चित करेंगे। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के उप सचिव ने मॉडल जम्मू-कश्मीर प्लास्टिक वेस्ट प्रबंधन कानून-2020 को लागू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। ग्रामीण विकास विभाग के निदेशकों को पंचायत स्तर पर इसे लागू करने को कहा है। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रदेश सरकार का यह महत्वपूर्ण कदम है।
कानून के अनुसार निष्पादित किए जा सकने वाले प्लास्टिक कचरे को पंजीकृत प्लास्टिक कचरा निष्पादक तक पहुंचाया जाएगा और मानकों अनुसार निष्पादित किया जाएगा। इसके अलावा निष्पादित न हो पाने वाला प्लास्टिक कचरा आरडीएफ प्लांट/सीमेंट प्लांट आदि में पहुंचाया जाएगा। इसमें प्रदूषण नियंत्रण मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा। वहीं कानून के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में नियमों का उल्लंघन करने पर एक बार में एक हजार तक जुर्माने का प्रावधान है। अगर कोई बार-बार नियमों का उल्लंघन करता है तो दस गुणा जुर्माना भी किया जा सकेगा।
वहीं, खंड विकास अधिकारी निष्पादित न किए जा सकने वाले प्लास्टिक कचरे को भारतीय मार्ग संगठन के मानकों अनुसार सड़कों के निर्माण में इस्तेमाल करवाने के लिए जिम्मेदार होंगे। वहीं, कचरा प्रबंधन, एकत्रित, सेग्रीगेट या फिर डिस्पोजल सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पंचायत की होगी। इसके लिए पंचायतें अपने स्तर पर एजेंसी या फिर प्लास्टिक उत्पादक की मदद ले सकेंगे।
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नियमों में सख्ती के लिए कचरा उत्पादक के खिलाफ कार्रवाई के लिए खंड विकास अधिकारी भी अधिकृत होंगे। इसके लिए वो तहसीलदार की मदद भी ले सकेंगे। पंचायतों में इंफोर्समेंट स्कवॉड, जिसमें पंचायत निरीक्षण या सचिव पंचायत शामिल हैं, की देखरेख में कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
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कानून के अनुसार निष्पादित किए जा सकने वाले प्लास्टिक कचरे को पंजीकृत प्लास्टिक कचरा निष्पादक तक पहुंचाया जाएगा और मानकों अनुसार निष्पादित किया जाएगा। इसके अलावा निष्पादित न हो पाने वाला प्लास्टिक कचरा आरडीएफ प्लांट/सीमेंट प्लांट आदि में पहुंचाया जाएगा। इसमें प्रदूषण नियंत्रण मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा। वहीं कानून के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में नियमों का उल्लंघन करने पर एक बार में एक हजार तक जुर्माने का प्रावधान है। अगर कोई बार-बार नियमों का उल्लंघन करता है तो दस गुणा जुर्माना भी किया जा सकेगा।
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वहीं, खंड विकास अधिकारी निष्पादित न किए जा सकने वाले प्लास्टिक कचरे को भारतीय मार्ग संगठन के मानकों अनुसार सड़कों के निर्माण में इस्तेमाल करवाने के लिए जिम्मेदार होंगे। वहीं, कचरा प्रबंधन, एकत्रित, सेग्रीगेट या फिर डिस्पोजल सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पंचायत की होगी। इसके लिए पंचायतें अपने स्तर पर एजेंसी या फिर प्लास्टिक उत्पादक की मदद ले सकेंगे।
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नियमों में सख्ती के लिए कचरा उत्पादक के खिलाफ कार्रवाई के लिए खंड विकास अधिकारी भी अधिकृत होंगे। इसके लिए वो तहसीलदार की मदद भी ले सकेंगे। पंचायतों में इंफोर्समेंट स्कवॉड, जिसमें पंचायत निरीक्षण या सचिव पंचायत शामिल हैं, की देखरेख में कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।