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बनी में बल्लियों पर टिका बिजली विभाग
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कठुआ। केंद्र व प्रदेश सरकार भले ही बिजली पर करोड़ों रुपये खर्च करने के दावा कर रही हों, लेकिन जमीनी हकीकत इससे परे है। बनी और मल्हार में बिजली विभाग बल्लियों के सहारे टिका है। ग्रामीण इलाकों में बिजली के तार लकड़ी के पोल पर टांगे गए हैं, जिससे हर समय हादसे का डर बना रहता है। कई इलाके तो ऐसे भी हैं जहां खंभा न हो तो पेड़ से ही काम चलाया जा रहा है। जहां बिजली का कंडक्टर न हो वहां क्रेट वायर ही चल पड़ती है। यह हाल तब है जब केंद्र सरकार हर घर में 24 घंटे बिजली देने के लोगों को सब्जबाग दिखा रही है।
बनी उपमंडल की पंचायत रौलका, दौलका, बरमौता, कांथल, चांदल, डुग्गन, ढग्गर, चलोग, भंडर सहित लगभग हर पंचायत में बिजली ढांचा तीन से चार दशक पुरानी लकड़ी की बल्लियों के सहारे चल रहा है। ऐसा ही हाल लोहाई मल्हार, बग्गन, बांजल भटवाल आदि का भी है, जहां के इलाकों में आज भी कई सौ खंभे लकड़ी के हैं।
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जिले में तीन हजार लकड़ी के खंभों
पर लटकाए गए हैं बिजली के तार
आधिकारिक सूत्रों की मानें तो जिले में लगभग तीन हजार खंभे लकड़ी के हैं, जिन्हें आजतक बदला नहीं जा सका है। एक लकड़ी के खंभे की अधिकतम मियाद साल के लगभग रहती है, लेकिन बनी में लगे खंभे तो तीन से चार दशक पुराने हो चुके हैं। यही वजह है कि जरा सी हवा चलने या बारिश हो तो बिजली गुल हो जाती है, जो कई-कई दिनों तक बहाल नहीं हो पाती। हालात तब और भी खराब होते हैं जब इलाका पहाड़ी हो। जहां आबादी दूर-दराज के गांव में होती है और एक ही लाइनमैन के पास दस से 15 ट्रांसफार्मर की जिम्मेदारी हो।
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- ‘सौभाग्य’ से भी नहीं बदली बिजली ढांचे की किस्मत
- बढ़ता गया ढांचा, घटती गई लाइनमैनों की संख्या
जिले के लगभग हर सब डिवीजन में हर एक लाइनमैन के पास दर्जनभर या इससे भी अधिक ट्रांसफार्मर हैं। पिछले चार दशक में लाइनमैन की संख्या भी लगातार घटती गई तो वहीं ढांचा बढ़ गया है। विभाग ने पहले इन लकड़ी की खंभों को सौभाग्य योजना के तहत बदले जाने का प्रावधान रखा था, लेकिन यह योजना भी लोगों का सौभाग्य नहीं बदल पाई।
ढग्गर पंचायत के सरपंच अमीर चंद ने बताया कि बर्फबारी के दिनों में महीनों तक बिजली आपूर्ति बंद रहती है। कमोवेश ऐसी ही स्थिति बरसात और आंधी-तूफान के दिनों में भी रहती है। ये इलाके ऐसे हैं जहां मौसम का कोई अनुमान नहीं है। लोग आजादी के दशकों बाद भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
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आरडीएसएस योजना में इन लकड़ी के खंभों को बदलने की योजना रखी गई है। पुराने ढांचे और इन खंभों के सहारे बिजली नेटवर्क को चलाना मुश्किल और जोखिम भरा है। कोशिश की जा रही है कि जल्द इन्हें बदलकर व्यवस्थित बिजली ढांचा सुनिश्चित किया जा सके।
मदन लाल भगत, कार्यकारी अभियंता, बिजली विभाग, कठुआ
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बनी उपमंडल की पंचायत रौलका, दौलका, बरमौता, कांथल, चांदल, डुग्गन, ढग्गर, चलोग, भंडर सहित लगभग हर पंचायत में बिजली ढांचा तीन से चार दशक पुरानी लकड़ी की बल्लियों के सहारे चल रहा है। ऐसा ही हाल लोहाई मल्हार, बग्गन, बांजल भटवाल आदि का भी है, जहां के इलाकों में आज भी कई सौ खंभे लकड़ी के हैं।
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जिले में तीन हजार लकड़ी के खंभों
पर लटकाए गए हैं बिजली के तार
आधिकारिक सूत्रों की मानें तो जिले में लगभग तीन हजार खंभे लकड़ी के हैं, जिन्हें आजतक बदला नहीं जा सका है। एक लकड़ी के खंभे की अधिकतम मियाद साल के लगभग रहती है, लेकिन बनी में लगे खंभे तो तीन से चार दशक पुराने हो चुके हैं। यही वजह है कि जरा सी हवा चलने या बारिश हो तो बिजली गुल हो जाती है, जो कई-कई दिनों तक बहाल नहीं हो पाती। हालात तब और भी खराब होते हैं जब इलाका पहाड़ी हो। जहां आबादी दूर-दराज के गांव में होती है और एक ही लाइनमैन के पास दस से 15 ट्रांसफार्मर की जिम्मेदारी हो।
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- ‘सौभाग्य’ से भी नहीं बदली बिजली ढांचे की किस्मत
- बढ़ता गया ढांचा, घटती गई लाइनमैनों की संख्या
जिले के लगभग हर सब डिवीजन में हर एक लाइनमैन के पास दर्जनभर या इससे भी अधिक ट्रांसफार्मर हैं। पिछले चार दशक में लाइनमैन की संख्या भी लगातार घटती गई तो वहीं ढांचा बढ़ गया है। विभाग ने पहले इन लकड़ी की खंभों को सौभाग्य योजना के तहत बदले जाने का प्रावधान रखा था, लेकिन यह योजना भी लोगों का सौभाग्य नहीं बदल पाई।
ढग्गर पंचायत के सरपंच अमीर चंद ने बताया कि बर्फबारी के दिनों में महीनों तक बिजली आपूर्ति बंद रहती है। कमोवेश ऐसी ही स्थिति बरसात और आंधी-तूफान के दिनों में भी रहती है। ये इलाके ऐसे हैं जहां मौसम का कोई अनुमान नहीं है। लोग आजादी के दशकों बाद भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
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आरडीएसएस योजना में इन लकड़ी के खंभों को बदलने की योजना रखी गई है। पुराने ढांचे और इन खंभों के सहारे बिजली नेटवर्क को चलाना मुश्किल और जोखिम भरा है। कोशिश की जा रही है कि जल्द इन्हें बदलकर व्यवस्थित बिजली ढांचा सुनिश्चित किया जा सके।
मदन लाल भगत, कार्यकारी अभियंता, बिजली विभाग, कठुआ