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कठुआ नॉर्थ अब जसरोटा और साउथ का नाम कठुआ विधानसभा हलका होगा
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कठुआ। ढाई दशक के लंबे अंतराल के बाद कठुआ जिले में नए विधानसभा क्षेत्र को अंतिम रूप दे दिया गया है। अंतरिम मसौदे में कठुआ नॉर्थ और कठुआ साउथ बनाए गए दो नए विधानसभा हलकों का नामकरण भी फाइनल हो गया है। लोगों की मांग को देखते हुए परिसिमन आयोग ने कठुआ नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र का नाम अब जसरोटा कर दिया है। वहीं, कठुआ साउथ विधानसभा क्षेत्र जिसे अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया था उसे कठुआ विधानसभा क्षेत्र के नाम से ही जाना जाएगा। लेकिन अंतरिम रिपोर्ट के बाद जिले से सामने आई कई आपत्तियां सिरे से खारिज हो गई हैं। अंतिम रिपोर्ट में अंतरिम रिपोर्ट का ही मसौदा लागू हुआ है।
ऐसे में जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा में कठुआ की अब छह सीटें होंगी। आयोग की अंतिम रिपोर्ट के बाद अब सात दशक पुराने कठुआ विधानसभा क्षेत्र को दो हिस्सों में विभाजित कर दिया गया है। 25 साल तक आरक्षित रहे हीरानगर विधानसभा क्षेत्र को भी अनारक्षित श्रेणी में डाला गया है। बसोहली विधानसभा क्षेत्र के कुछ इलाके कठुआ तो वहीं कुछ जसरोटा विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा बन गए हैं। रिपोर्ट के बाद राजनीतिक सरगर्मियां और भी तेज होने जा रही हैं।
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परिसिमन आयोग से मिले थे कठुआ के 15 प्रतिनिधिमंडल
कठुआ जिले से आयोग के पास दर्ज हुई 15 आपत्तियों और सुझावों में कंडी और अंधड़ के इलाकों को अलग-अलग ही रखने की मांग खास तौर पर शामिल रही। हाईवे के निचले हिस्से में नगरी, मढ़ीन और कठुआ पटवार के इलाकों की एक जैसी समस्याओं और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए इसे एक विधानसभा क्षेत्र ही रखने, जबकि कंडी की एक जैसी समस्याओं और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए इसे अलग विधानसभा क्षेत्र में रखने की मांग शामिल थी। आयोग की अंतिम रिपोर्ट में फिलहाल पूर्व में प्रस्तुत किए गए प्रारूप से कोई छेड़छाड़ नजर नहीं आ रही है। ऐसे में यह मांग सीधे तौर पर खारिज कर दी गई है।
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- ये रखी गई थी मांगें और सुझाव
- विधानसभा क्षेत्र कठुआ नॉर्थ का नाम डिंगा अंब करने की मांग। यदि ऐसा नहीं होता है तो डिंगा अंब ब्लॉक की कठुआ नॉर्थ से जुड़ी दो पंचायतों को हीरानगर विधानसभा क्षेत्र के साथ जोड़ने की मांग थी।
- चिलख वेस्ट और ढल्ली पंचायतों को हीरानगर विधानसभा क्षेत्र में शामिल करने की मांग थी।
- चंदवा, हमीरपुर, सेहस्वां और हरदो मुट्ठी पंचायतों को हीरानगर विधानसभा क्षेत्र के साथ जोड़ने की मांग।
- नजोत के ग्रामीणों की मांग थी कि पूर्व की तरह ही उन्हें बिलावर विधानसभा क्षेत्र में रखा जाए। परिसीमन की रिपोर्ट में नजोत को बनी विधानसभा क्षेत्र से जोड़ दिया गया है।
- हाईवे के निचली ओर नगरी, कठुआ और मढ़ीन के इलाकों को कंडी के इलाकों से न जोड़ने की मांग थी। दोनों क्षेत्रों की अलग समस्याओं को देखते हुए कंडी को अलग विधानसभा क्षेत्र ही रखने की मांग थी।
- कठुआ नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र का नाम जय जसरोटा विधानसभा क्षेत्र करने की मांग थी।
- कठुआ नार्थ और साउथ विधानसभा क्षेत्र हल्कों में एक समान समस्याओं और भौगोलिक परिस्थितियों वाले इलाकों को जोड़ा जाना चाहिए था। हाईवे के ऊपरी और निचले हिस्सों को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्र बनाया जाना चाहिए।
- सुमवां पंचायत राजस्व हलका फ्लोट बी है, लेकिन पटवार हलका फ्लोट, सुमवां, पटियाड़ी, त्रेहड़ा आदि इलाके शामिल हैं। इस पूरे इलाके को हाईवे निचले इलाके से उठाकर कंडी के साथ जोड़ दिया गया है। ऐसे में दो प्रतिनिधिमंडल परिसीमन आयोग से इसी मांग को लेकर मिले थे।
- बिलावर विधानसभा क्षेत्र को आरक्षित किए जाने की मांग रखी गई थी।
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ऐसे में जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा में कठुआ की अब छह सीटें होंगी। आयोग की अंतिम रिपोर्ट के बाद अब सात दशक पुराने कठुआ विधानसभा क्षेत्र को दो हिस्सों में विभाजित कर दिया गया है। 25 साल तक आरक्षित रहे हीरानगर विधानसभा क्षेत्र को भी अनारक्षित श्रेणी में डाला गया है। बसोहली विधानसभा क्षेत्र के कुछ इलाके कठुआ तो वहीं कुछ जसरोटा विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा बन गए हैं। रिपोर्ट के बाद राजनीतिक सरगर्मियां और भी तेज होने जा रही हैं।
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परिसिमन आयोग से मिले थे कठुआ के 15 प्रतिनिधिमंडल
कठुआ जिले से आयोग के पास दर्ज हुई 15 आपत्तियों और सुझावों में कंडी और अंधड़ के इलाकों को अलग-अलग ही रखने की मांग खास तौर पर शामिल रही। हाईवे के निचले हिस्से में नगरी, मढ़ीन और कठुआ पटवार के इलाकों की एक जैसी समस्याओं और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए इसे एक विधानसभा क्षेत्र ही रखने, जबकि कंडी की एक जैसी समस्याओं और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए इसे अलग विधानसभा क्षेत्र में रखने की मांग शामिल थी। आयोग की अंतिम रिपोर्ट में फिलहाल पूर्व में प्रस्तुत किए गए प्रारूप से कोई छेड़छाड़ नजर नहीं आ रही है। ऐसे में यह मांग सीधे तौर पर खारिज कर दी गई है।
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- ये रखी गई थी मांगें और सुझाव
- विधानसभा क्षेत्र कठुआ नॉर्थ का नाम डिंगा अंब करने की मांग। यदि ऐसा नहीं होता है तो डिंगा अंब ब्लॉक की कठुआ नॉर्थ से जुड़ी दो पंचायतों को हीरानगर विधानसभा क्षेत्र के साथ जोड़ने की मांग थी।
- चिलख वेस्ट और ढल्ली पंचायतों को हीरानगर विधानसभा क्षेत्र में शामिल करने की मांग थी।
- चंदवा, हमीरपुर, सेहस्वां और हरदो मुट्ठी पंचायतों को हीरानगर विधानसभा क्षेत्र के साथ जोड़ने की मांग।
- नजोत के ग्रामीणों की मांग थी कि पूर्व की तरह ही उन्हें बिलावर विधानसभा क्षेत्र में रखा जाए। परिसीमन की रिपोर्ट में नजोत को बनी विधानसभा क्षेत्र से जोड़ दिया गया है।
- हाईवे के निचली ओर नगरी, कठुआ और मढ़ीन के इलाकों को कंडी के इलाकों से न जोड़ने की मांग थी। दोनों क्षेत्रों की अलग समस्याओं को देखते हुए कंडी को अलग विधानसभा क्षेत्र ही रखने की मांग थी।
- कठुआ नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र का नाम जय जसरोटा विधानसभा क्षेत्र करने की मांग थी।
- कठुआ नार्थ और साउथ विधानसभा क्षेत्र हल्कों में एक समान समस्याओं और भौगोलिक परिस्थितियों वाले इलाकों को जोड़ा जाना चाहिए था। हाईवे के ऊपरी और निचले हिस्सों को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्र बनाया जाना चाहिए।
- सुमवां पंचायत राजस्व हलका फ्लोट बी है, लेकिन पटवार हलका फ्लोट, सुमवां, पटियाड़ी, त्रेहड़ा आदि इलाके शामिल हैं। इस पूरे इलाके को हाईवे निचले इलाके से उठाकर कंडी के साथ जोड़ दिया गया है। ऐसे में दो प्रतिनिधिमंडल परिसीमन आयोग से इसी मांग को लेकर मिले थे।
- बिलावर विधानसभा क्षेत्र को आरक्षित किए जाने की मांग रखी गई थी।