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छबील लगाकर लोगों को मीठा पानी पिलाया
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शहीद कैप्टन सुनील चौधरी के जन्मदिवस पर छबील लगाकर लोगों को मीठा पानी पिलाते शहीद के माता पिता। सं
- फोटो : KATHUA
कठुआ। शहीद कैप्टन सुनील चौधरी केे 42वें जन्मदिवस पर शहर में स्थित उनके स्मारक पर परिजनों की ओर से छबील का आयोजन किया गया। इस दौरान परिजनों ने राहगीरों को मीठा पानी पिलाया।
इस दौरान शहीद कैप्टन के माता-पिता ने पूर्व सैनिकों के साथ उनके स्मारक पर पुष्प अर्पित करते हुए छबील शुरू की और दिन भर लोगों को मीठापानी पिलाया। इस मौके पर शहीद कैप्टन के पिता सेवानिवृत्त कर्नल पीएल चौधरी ने अपने बेटे की शहादत पर गर्व करते हुए कहा कि आज भले ही उनका बेटा इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी शहादत युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इसी परिकल्पना को ध्यान में रखकर हर साल वह इस छबील का आयोजन करते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान वह बेटे का जन्मदिन मनाते हुए केक काटेंगे और शाम को उनके स्मारक पर दीपमाला भी की जाएगी।
उन्होंने सेना की भर्ती के लिए होने वाले प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आज कुछ लोग सेना को नौकरी का जरिया समझा रहे हैं। जबकि सेना नौकरी का जरिया मात्र होने के बजाए देश के लिए कुछ कर गुजरने वालों के लिए है। उन्होंने कहा कि आज प्रदर्शन के नाम पर सड़के जाम की जा रही हैं, कहीं ट्रेनों को आग लगाई जा रही हैं। ऐसे लोग जो आम आदमी के लिए परेशानी का सबब बन रहे हैं, वह कभी अच्छे सैनिक नहीं बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार के किसी निर्णय को लेकर विरोध है तो उसके भी कई लोकतांत्रिक तरीके हैं। ट्रेन और बसें जलाने वालों के खिलाफ सरकार को कड़ी कार्रवाई भी करनी चाहिए।
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इस दौरान शहीद कैप्टन के माता-पिता ने पूर्व सैनिकों के साथ उनके स्मारक पर पुष्प अर्पित करते हुए छबील शुरू की और दिन भर लोगों को मीठापानी पिलाया। इस मौके पर शहीद कैप्टन के पिता सेवानिवृत्त कर्नल पीएल चौधरी ने अपने बेटे की शहादत पर गर्व करते हुए कहा कि आज भले ही उनका बेटा इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी शहादत युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इसी परिकल्पना को ध्यान में रखकर हर साल वह इस छबील का आयोजन करते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान वह बेटे का जन्मदिन मनाते हुए केक काटेंगे और शाम को उनके स्मारक पर दीपमाला भी की जाएगी।
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उन्होंने सेना की भर्ती के लिए होने वाले प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आज कुछ लोग सेना को नौकरी का जरिया समझा रहे हैं। जबकि सेना नौकरी का जरिया मात्र होने के बजाए देश के लिए कुछ कर गुजरने वालों के लिए है। उन्होंने कहा कि आज प्रदर्शन के नाम पर सड़के जाम की जा रही हैं, कहीं ट्रेनों को आग लगाई जा रही हैं। ऐसे लोग जो आम आदमी के लिए परेशानी का सबब बन रहे हैं, वह कभी अच्छे सैनिक नहीं बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार के किसी निर्णय को लेकर विरोध है तो उसके भी कई लोकतांत्रिक तरीके हैं। ट्रेन और बसें जलाने वालों के खिलाफ सरकार को कड़ी कार्रवाई भी करनी चाहिए।
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