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Kathua News: स्टेडियम के साथ हो रहा खेल, खिलाड़ियों के साथ मजाक
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जिला स्पोटर्स स्टेडियम कठुआ
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-बीस साल से क्रिकेट कोच नहीं, मैदान में आयोजित होते हैं मेले और राजनीतिक रैलियां
-खेलों से ज्यादा सरकारी आयोजनों का अड्डा बनकर रह गया जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम
पंकज मिश्रा
कठुआ। जिले में खेलने के लिए बनाए गए स्टेडियम के साथ ही खेल हो रहा है और खिलाड़ियों के साथ मजाक। 20 साल से क्रिकेट का कोच नहीं है। इससे खिलाड़ी अभ्यास के लिए नहीं आ रहे। मैदान में या तो मेले आयोजित होते हैं या फिर राजनीतिक रैलियां। साल के दो महीने यहां बड़े टूर्नामेंट होते हैं। 10 महीने मैदान में लोग सैर करते हैं।
स्पोर्ट्स काउंसिल के अधीन आते स्टेडियम में काउंसिल खेल गतिविधियां नहीं करवा पा रही है। 70 के दशक में 62 कनाल भूमि पर स्पोर्ट्स स्टेडियम बना। तब से इसका आपेक्षित विकास नहीं हुआ। खेल गतिविधियों काे संचालित करने के कोच का अभाव हमेशा बन रहा। नतीजतन खेल प्रतिभाओं से भरे जिले से चंद खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच पाए। वर्तमान में परिषद के पास जूडो, जिम्नास्टिक जैसे इंडोर खेल के कोच हैं। खेलो इंडिया से हॉकी और ताइक्वांडो के साथ पीएमडीपी से बॉक्सिंग केे अस्थायी कोच उपलब्ध करवाए गए हैं। इनमें से चार कोच इंडोर खेल से जुड़े हैं। बॉक्सिंग के लिए रिंग है, लेकिन जूडो, जिमनास्टिक और ताइकवांडो का समान्य कमरों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम पांच दशक के इतिहास में कभी सुविधा संपन्न नहीं रहा। सबसे लोकप्रिय खेल क्रिकेट का कोच ही नियुक्त नहीं हो पाया। मौजूदा समय में यहां सभी खेलों के कोच की नियुक्ति किए जाने के साथ ओपन जिम के निर्माण की जरूरत है।
धर्मबीर सिंह जसरोटिया, पूर्व रणजी खिलाड़ी
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स्टेडियम के प्रति कभी न तो स्पोर्ट्स काउंसिल गंभीर रही और न ही प्रदेश की सरकारें। स्टेडियम के विकास के लिए प्रशासनिक भी लापरवाह रहा। लापरवाही का आलम यह है कि स्टेडियम का विकास तो दूर रख-रखाव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में इसके बनने का कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है।
पवन कुमार शर्मा, सेवानिवृत्त खेल अधिकारी
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स्टेडियम की मौजूदा स्थिति से खेल परिषद के अधिकारी अवगत हैं। इसके बारे में समय-समय पर जानकारी दी जाती है। अब परिषद के उच्चाधिकारियों को इस बारे में निर्णय लेने की जरूरत है।
जोगिंदर शर्मा, प्रबंधक, स्पोर्ट्स स्टेडियम कठुआ
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-खेलों से ज्यादा सरकारी आयोजनों का अड्डा बनकर रह गया जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम
पंकज मिश्रा
कठुआ। जिले में खेलने के लिए बनाए गए स्टेडियम के साथ ही खेल हो रहा है और खिलाड़ियों के साथ मजाक। 20 साल से क्रिकेट का कोच नहीं है। इससे खिलाड़ी अभ्यास के लिए नहीं आ रहे। मैदान में या तो मेले आयोजित होते हैं या फिर राजनीतिक रैलियां। साल के दो महीने यहां बड़े टूर्नामेंट होते हैं। 10 महीने मैदान में लोग सैर करते हैं।
स्पोर्ट्स काउंसिल के अधीन आते स्टेडियम में काउंसिल खेल गतिविधियां नहीं करवा पा रही है। 70 के दशक में 62 कनाल भूमि पर स्पोर्ट्स स्टेडियम बना। तब से इसका आपेक्षित विकास नहीं हुआ। खेल गतिविधियों काे संचालित करने के कोच का अभाव हमेशा बन रहा। नतीजतन खेल प्रतिभाओं से भरे जिले से चंद खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच पाए। वर्तमान में परिषद के पास जूडो, जिम्नास्टिक जैसे इंडोर खेल के कोच हैं। खेलो इंडिया से हॉकी और ताइक्वांडो के साथ पीएमडीपी से बॉक्सिंग केे अस्थायी कोच उपलब्ध करवाए गए हैं। इनमें से चार कोच इंडोर खेल से जुड़े हैं। बॉक्सिंग के लिए रिंग है, लेकिन जूडो, जिमनास्टिक और ताइकवांडो का समान्य कमरों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम पांच दशक के इतिहास में कभी सुविधा संपन्न नहीं रहा। सबसे लोकप्रिय खेल क्रिकेट का कोच ही नियुक्त नहीं हो पाया। मौजूदा समय में यहां सभी खेलों के कोच की नियुक्ति किए जाने के साथ ओपन जिम के निर्माण की जरूरत है।
धर्मबीर सिंह जसरोटिया, पूर्व रणजी खिलाड़ी
स्टेडियम के प्रति कभी न तो स्पोर्ट्स काउंसिल गंभीर रही और न ही प्रदेश की सरकारें। स्टेडियम के विकास के लिए प्रशासनिक भी लापरवाह रहा। लापरवाही का आलम यह है कि स्टेडियम का विकास तो दूर रख-रखाव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में इसके बनने का कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है।
पवन कुमार शर्मा, सेवानिवृत्त खेल अधिकारी
स्टेडियम की मौजूदा स्थिति से खेल परिषद के अधिकारी अवगत हैं। इसके बारे में समय-समय पर जानकारी दी जाती है। अब परिषद के उच्चाधिकारियों को इस बारे में निर्णय लेने की जरूरत है।
जोगिंदर शर्मा, प्रबंधक, स्पोर्ट्स स्टेडियम कठुआ