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Kathua News: एक हजार से अधिक लंबित एनडीपीएस मामलों का विशेष फास्टट्रैक कोर्ट करेगी निपटारा
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कठुआ। सरकार की ओर से एनडीपीएस मामलों की फास्टट्रैक पर सुनवाई के लिए विशेष कोर्ट की स्वीकृति मिलने के बाद जिला न्यायालय परिसर में नई कोर्ट स्थापित करने की कवायद शुरू हो गई है। इससे विशेष कोर्ट से जिले में एक हजार से ज्यादा लंबित एनडीपीएस मामलों का जल्द निपटारा होने की संभावना है। इस विशेष कोर्ट की अध्यक्षता जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्तर के अधिकारी करेंगे।
अब तक एनडीपीएस मामलों की सुनवाई अन्य आपराधिक मामलों के साथ होने के कारण न्यायिक प्रक्रिया में समय लगता था। लेकिन विशेष कोर्ट में केवल एनडीपीएस अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई होने से पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने का रास्ता साफ हो गया है। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में जिले में एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। वहीं, नशा मुक्त अभियान के तहत चल रही पुलिस कार्रवाई से भी सैंकड़ों मामलों का इजाफा हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार हर माह औसतन 20 से 30 एनडीपीएस मामले न्यायालयों में पहुंच रहे हैं। जिससे लंबित मामलों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ता गया है। लंबित आंकड़ों की बात करे तो वर्तमान में जिला सत्र न्यायालय में 200 से ज्यादा मामले लंबित है। जबकि अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में यह संख्या 350 के करीब बताई जा रही है। लगभग इतने ही एनडीपीएस के मामले अन्य अदालतों में भी लंबित है। ऐसे में विशेष न्यायालय के गठन से लंबे समय से सुनवाई का इंतजार कर रहे मामलों के साथ-साथ नए मामलों का भी समयबद्ध तरीके से निपटारा किए जाने की उम्मीद जगी है।
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जिला एवं सत्र न्यायाधीश करेंगे विशेष कोर्ट की अध्यक्षता
-- सरकार के आदेश के अनुसार विशेष एनडीपीएस न्यायालय की अध्यक्षता जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्तर के अधिकारी करेंगे। इसके साथ ही न्यायालय के सुचारु संचालन के लिए कुल 10 पदों को स्वीकृत किया गया है। इसमें विशेष कोर्ट के लिए जिला एवं सत्र न्यायाधीश के अलावा नौ अन्य पद सृजित किए गए हैं। इनमें पीए कम सीनियर स्केल स्टेनोग्राफर, सेक्शन ऑफिसर (रीडर), हेड असिस्टेंट, क्रिमिनल क्लर्क, कॉपिस्ट और मिसलेनियस क्लर्क के पद शामिल हैं। इसके अलावा प्रत्येक न्यायालय में एक ड्राइवर और दो आर्दली भी तैनात किए जाएंगे। सरकार ने इसी तरह के विशेष कोर्ट जिला सांबा, उधमपुर और राजौरी में भी स्वीकृत किए गए है।
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अब तक एनडीपीएस मामलों की सुनवाई अन्य आपराधिक मामलों के साथ होने के कारण न्यायिक प्रक्रिया में समय लगता था। लेकिन विशेष कोर्ट में केवल एनडीपीएस अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई होने से पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने का रास्ता साफ हो गया है। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में जिले में एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। वहीं, नशा मुक्त अभियान के तहत चल रही पुलिस कार्रवाई से भी सैंकड़ों मामलों का इजाफा हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार हर माह औसतन 20 से 30 एनडीपीएस मामले न्यायालयों में पहुंच रहे हैं। जिससे लंबित मामलों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ता गया है। लंबित आंकड़ों की बात करे तो वर्तमान में जिला सत्र न्यायालय में 200 से ज्यादा मामले लंबित है। जबकि अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में यह संख्या 350 के करीब बताई जा रही है। लगभग इतने ही एनडीपीएस के मामले अन्य अदालतों में भी लंबित है। ऐसे में विशेष न्यायालय के गठन से लंबे समय से सुनवाई का इंतजार कर रहे मामलों के साथ-साथ नए मामलों का भी समयबद्ध तरीके से निपटारा किए जाने की उम्मीद जगी है।
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जिला एवं सत्र न्यायाधीश करेंगे विशेष कोर्ट की अध्यक्षता