{"_id":"5f946ff68ebc3e9b902833c9","slug":"navratr-kathua-news-jmu221480563","type":"story","status":"publish","title_hn":"कंचक पूजन और साख विसर्जन के साथ हुआ नवरात्र का समापन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कंचक पूजन और साख विसर्जन के साथ हुआ नवरात्र का समापन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कठुआ। कंजक पूजन और साख विसर्जन के साथ नौ दिनों तक चलने वाला शारदीय नवरात्र का पर्व संपन्न हो गया। शनिवार को पर्व के अंतिम दिन श्रद्धालुओं ने सुबह से ही बहती जलधराओं में पवित्र साख का विसर्जन किया और उसके उपरांत विधिविधान से कंजक पूजन किया। वहीं, कोरोना संकट के कारण अब मंदिरों में कम दिखने वाली श्रद्धालुओं की संख्या में भी इजाफा देखा गया।
शहर के मध्य बहने वाली नहर और प्राचीन बावलियों पर सुबह से ही साख का विसर्जन करने वालों का तांता लगा रहा। वहीं, मुख्य बाजार स्थित माता आशापूर्णी के दरबार में भी काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंच कर पूजा अर्चना की। नहर पर साख विसर्जन करने आईं निर्मला देवी, अंजू शर्मा आदि ने बताया कि परंपरा के अनुसार नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालुओं द्वारा साख को लगाया जाता है। इसकी नौ दिन तक पूजा की जाती है। साख की लंबाई को मां के प्रति श्रद्धा के साथ उनकी कृपा का प्रतीक माना जाता है।
वहीं, शहर के विभिन्न मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने कंजक पूजन कर हलवा, पूड़ी और चने का प्रसाद बांटा। नवरात्र पर्व के अंतिम दिन भी मंदिरों में हजारों की संख्या में भक्तों ने माता रानी के दर्शन किए। इस दौरान जसरोटा स्थित काली माता मंदिर और नगरी स्थित माता बाला सुंदरी में मंदिर कमेटी सदस्यों द्वारा हर नवरात्र की तरह ही हवन का आयोजन किया गया। इसमें स्थानीय श्रद्धालुओं ने भी हिस्सा लिया। बाला सुंदरी मंदिर में अंतिम नवरात्र में विशाल हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। इस यज्ञ में स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के लोगों ने भी हिस्सा लिया।
विज्ञापन
माता सुकराला देवी, माता बाला सुंदरी के दरबार पहुंचे श्रद्धालु
बिलावर। अष्टमी के अवसर पर श्रद्धालुओं ने माता सुकराला देवी और माता बाला सुंदरी के चरणों में शीश नवा कर आशीर्वाद प्राप्त किया। सुबह से ही श्रद्धालुओं का माता के दरबार में दर्शन के लिए पहुंचना शुरू हो गया था। मंदिरों के पास बनाए गए हवन कुंडों में लोगों ने हवन किया, जिसके बाद कन्या पूजन किया गया। अष्टमी पर कई लोगों ने अपने घरों में कन्या पूजन किया और महामाई का आशीर्वाद प्राप्त किया। मान्यताओं के अनुसार नवरात्र के दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग नौ रूपों की भक्त आराधना करते हैं और मां दुर्गा की विशेष कृपा पाने के लिए व्रत रखते हैं। ज्यादातर लोगों ने अपने घरों में महामाई का पूजन कर कन्याओं को दान दक्षिणा दी। गांवों में लोगों ने अष्टमी के उपलक्ष्य में हलवा पूड़ी और चने का प्रसाद बांटा। संवाद
बनखंडी माता के दरबार में बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या
महानपुर। नौशेरा तहसील में स्थित ऐतिहासिक बनखंडी माता के दरबार पर अष्टमी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इसके साथ ही जगदंबे माता मंदिर महानपुर में भी माता के भक्तों ने माथा टेका। नवरात्र के अंतिम दिन माता के दरबार में भक्तों की संख्या में काफी इजाफा हुआ। इस मौके पर श्रद्धालुओं को पैक प्रसाद बांटा गया। पुजारी महंत भगवान दास ने बताया कि सुबह सामाजिक दूरी का पालन करते हुए माता के दरबार में कंचन पूजन किया गया। कस्बे में स्थित जगदंबे माता मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किए। संवाद
रींगडी माता मंदिर में रामायण पाठ का हुआ समापन
बिलावर। रामकोट तहसील के गढ़ी रींगडी माता मंदिर में शनिवार को नवरात्र में शुरू किए गए रामायण पाठ का समापन हो गया। मंदिर परिसर में स्थानीय लोगों की ओर से अष्टमी के उपलक्ष्य में हवन का आयोजन भी हुआ। इसके बाद भजन कीर्तन किया गया। ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर में वार्षिक भंडारे का आयोजन भी हुआ। इसमें आसपास के कई गांवों के लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। दोपहर दो बजे शुरू हुआ भंडारा शाम पांच बजे तक जारी रहा। मंदिर के महंत विशाल गिरी ने बताया कि नवरात्र में हर वर्ष भंडारे का आयोजन किया जाता है। इस मौके पर मंदिर के प्रधान वेद प्रकाश शास्त्री, कैप्टन पवन कुमार शर्मा, पंडित शशि पाल, रतन चंद, राजू, विनय शर्मा सहित कई लोग मौजूद रहे। संवाद
महानवमी के अवसर पर हवन यज्ञ कर मांगी कोरोना से मुक्ति
हीरानगर। महानवमी के अवसर पर उपमंडल के विभिन्न मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदिरों में हवन यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें लोगों ने विश्व शांति की प्रार्थना के साथ कोरोना महामारी से मुक्ति की कामना की। माता चिंतपूर्णी मंदिर में हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। लोगों ने विश्व कल्याण की कामना करते हुए आहुतियां दीं। जसरोटा स्थित काली माता मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। माता के चरणों में शीश झुका कर आशीर्वाद ग्रहण करने के बाद यहां आयोजित भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। कोरोना के चलते नियमों का ध्यान रखते हुए मंदिर कमेटी की ओर से भंडारे में पैक भोजन की व्यवस्था की गई। कस्बे के नजदीक ऐतिहासिक किला माता मंदिर में भी दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। संवाद
विज्ञापन
शहर के मध्य बहने वाली नहर और प्राचीन बावलियों पर सुबह से ही साख का विसर्जन करने वालों का तांता लगा रहा। वहीं, मुख्य बाजार स्थित माता आशापूर्णी के दरबार में भी काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंच कर पूजा अर्चना की। नहर पर साख विसर्जन करने आईं निर्मला देवी, अंजू शर्मा आदि ने बताया कि परंपरा के अनुसार नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालुओं द्वारा साख को लगाया जाता है। इसकी नौ दिन तक पूजा की जाती है। साख की लंबाई को मां के प्रति श्रद्धा के साथ उनकी कृपा का प्रतीक माना जाता है।
विज्ञापन
वहीं, शहर के विभिन्न मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने कंजक पूजन कर हलवा, पूड़ी और चने का प्रसाद बांटा। नवरात्र पर्व के अंतिम दिन भी मंदिरों में हजारों की संख्या में भक्तों ने माता रानी के दर्शन किए। इस दौरान जसरोटा स्थित काली माता मंदिर और नगरी स्थित माता बाला सुंदरी में मंदिर कमेटी सदस्यों द्वारा हर नवरात्र की तरह ही हवन का आयोजन किया गया। इसमें स्थानीय श्रद्धालुओं ने भी हिस्सा लिया। बाला सुंदरी मंदिर में अंतिम नवरात्र में विशाल हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। इस यज्ञ में स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के लोगों ने भी हिस्सा लिया।
विज्ञापन
माता सुकराला देवी, माता बाला सुंदरी के दरबार पहुंचे श्रद्धालु
बिलावर। अष्टमी के अवसर पर श्रद्धालुओं ने माता सुकराला देवी और माता बाला सुंदरी के चरणों में शीश नवा कर आशीर्वाद प्राप्त किया। सुबह से ही श्रद्धालुओं का माता के दरबार में दर्शन के लिए पहुंचना शुरू हो गया था। मंदिरों के पास बनाए गए हवन कुंडों में लोगों ने हवन किया, जिसके बाद कन्या पूजन किया गया। अष्टमी पर कई लोगों ने अपने घरों में कन्या पूजन किया और महामाई का आशीर्वाद प्राप्त किया। मान्यताओं के अनुसार नवरात्र के दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग नौ रूपों की भक्त आराधना करते हैं और मां दुर्गा की विशेष कृपा पाने के लिए व्रत रखते हैं। ज्यादातर लोगों ने अपने घरों में महामाई का पूजन कर कन्याओं को दान दक्षिणा दी। गांवों में लोगों ने अष्टमी के उपलक्ष्य में हलवा पूड़ी और चने का प्रसाद बांटा। संवाद
बनखंडी माता के दरबार में बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या
महानपुर। नौशेरा तहसील में स्थित ऐतिहासिक बनखंडी माता के दरबार पर अष्टमी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इसके साथ ही जगदंबे माता मंदिर महानपुर में भी माता के भक्तों ने माथा टेका। नवरात्र के अंतिम दिन माता के दरबार में भक्तों की संख्या में काफी इजाफा हुआ। इस मौके पर श्रद्धालुओं को पैक प्रसाद बांटा गया। पुजारी महंत भगवान दास ने बताया कि सुबह सामाजिक दूरी का पालन करते हुए माता के दरबार में कंचन पूजन किया गया। कस्बे में स्थित जगदंबे माता मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किए। संवाद
रींगडी माता मंदिर में रामायण पाठ का हुआ समापन
बिलावर। रामकोट तहसील के गढ़ी रींगडी माता मंदिर में शनिवार को नवरात्र में शुरू किए गए रामायण पाठ का समापन हो गया। मंदिर परिसर में स्थानीय लोगों की ओर से अष्टमी के उपलक्ष्य में हवन का आयोजन भी हुआ। इसके बाद भजन कीर्तन किया गया। ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर में वार्षिक भंडारे का आयोजन भी हुआ। इसमें आसपास के कई गांवों के लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। दोपहर दो बजे शुरू हुआ भंडारा शाम पांच बजे तक जारी रहा। मंदिर के महंत विशाल गिरी ने बताया कि नवरात्र में हर वर्ष भंडारे का आयोजन किया जाता है। इस मौके पर मंदिर के प्रधान वेद प्रकाश शास्त्री, कैप्टन पवन कुमार शर्मा, पंडित शशि पाल, रतन चंद, राजू, विनय शर्मा सहित कई लोग मौजूद रहे। संवाद
महानवमी के अवसर पर हवन यज्ञ कर मांगी कोरोना से मुक्ति
हीरानगर। महानवमी के अवसर पर उपमंडल के विभिन्न मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदिरों में हवन यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें लोगों ने विश्व शांति की प्रार्थना के साथ कोरोना महामारी से मुक्ति की कामना की। माता चिंतपूर्णी मंदिर में हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। लोगों ने विश्व कल्याण की कामना करते हुए आहुतियां दीं। जसरोटा स्थित काली माता मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। माता के चरणों में शीश झुका कर आशीर्वाद ग्रहण करने के बाद यहां आयोजित भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। कोरोना के चलते नियमों का ध्यान रखते हुए मंदिर कमेटी की ओर से भंडारे में पैक भोजन की व्यवस्था की गई। कस्बे के नजदीक ऐतिहासिक किला माता मंदिर में भी दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। संवाद