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Kathua News: दिनभर निराहार, शाम को विघ्नहर्ता से संतान की दीर्घायु की पुकार
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलावर। उपमंडल में मंगलवार को महिलाओं ने घर परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की दीर्घायु के साथ कष्ट बाधाओं को दूर करने की कामना के लिए संकट चतुर्थी का व्रत रखा है। दिनभर महिलाओं ने निराहार रह कर व शाम को विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा की।
माघ माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को निर्जला (पुग्गा) व्रत के नाम से भी जाना जाता है। महिलाओं ने दिनभर निराहार रहकर शाम को भगवान श्री गणेश की पूजा करने और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य दे कर व्रत का पारण किया। वहीं, चंद्र देव से घर परिवार और संतान की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। पंडित राधा कृष्ण शास्त्री के अनुसार संकट चौथ के व्रत और पूजन का बड़ा धार्मिक महत्व होता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार संकट चौथ का व्रत और पूजन माताएं संतान की दीर्घायु और उनके जीवन की बाधाओं को दूर करने की कामना से रखती हैं। इस दिन गणेश भगवान की पूजा-अर्चना करने से जीवन में हर तरह के विघ्न समाप्त हो जाती हैं। इस दिन तिलकुट का प्रसाद बनाया जाता है और भगवान गणेश को भोग लगाया जाता है। इसलिए इसे तिलकुट चतुर्थी भी कहते हैं।
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बिलावर। उपमंडल में मंगलवार को महिलाओं ने घर परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की दीर्घायु के साथ कष्ट बाधाओं को दूर करने की कामना के लिए संकट चतुर्थी का व्रत रखा है। दिनभर महिलाओं ने निराहार रह कर व शाम को विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा की।
माघ माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को निर्जला (पुग्गा) व्रत के नाम से भी जाना जाता है। महिलाओं ने दिनभर निराहार रहकर शाम को भगवान श्री गणेश की पूजा करने और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य दे कर व्रत का पारण किया। वहीं, चंद्र देव से घर परिवार और संतान की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। पंडित राधा कृष्ण शास्त्री के अनुसार संकट चौथ के व्रत और पूजन का बड़ा धार्मिक महत्व होता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार संकट चौथ का व्रत और पूजन माताएं संतान की दीर्घायु और उनके जीवन की बाधाओं को दूर करने की कामना से रखती हैं। इस दिन गणेश भगवान की पूजा-अर्चना करने से जीवन में हर तरह के विघ्न समाप्त हो जाती हैं। इस दिन तिलकुट का प्रसाद बनाया जाता है और भगवान गणेश को भोग लगाया जाता है। इसलिए इसे तिलकुट चतुर्थी भी कहते हैं।
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