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बाजार बंद, बनी में नहीं मांग, मशरूम उत्पादक परेशाान
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प्रकृति का दिया बनी सब डिवीजन में सब कुछ है। लेकिन हालात ऐसे हैं कि इस क्षेत्र में बेहतर फल आदि की पैदावार का लाभ यहां के किसानों को नहीं मिलता है। सब्जियों की बेहतर पैदावार और बाजार उपलब्ध न होने से पहले ही जहां किसान परेशान हैं, वहीं अब मशरूम के बेहतरीन उत्पादन के बाद बाजार न मिलने से किसानों की रही सही उम्मीद भी खत्म होती जा रही है।
दरअसल, बनी सब डिवीजन में कृषि विभाग के सहयोग से प्रायोगिक तौर पर एक दर्जन से अधिक किसानों ने मशरूम की खेती की। परिणाम भी बेहतरीन निकले। अब रोजाना एक क्विंटल से अधिक मशरूम की पैदावार के बाद भी किसानों को न तो दाम मिल रहे हैं और न ही बाजार। लॉकडाउन के बीच दुकानें बंद होने और बनी से कठुआ के बीच यात्री वाहन न चलने से किसानों की कमर टूट चुकी है। हालात यह हैं कि औने-पौने दाम में बेचने को किसान मजबूर हो रहे हैं। और अब इसे लगाने से भी कतराने लगे हैं।
उधर, कृषि विभाग अपने स्तर पर भी इसके लिए प्रयास करने में जुट गया है। मुख्य कृषि अधिकारी विजय कुमार उपाध्याय ने बीएसएफ के अधिकारियों से भी पेशकश की है। वे किसानों की फसल को खरीदें। बताया गया है कि बीएसएफ की ओर से सप्ताह में दो बार मशरूम खरीद को लेकर कृषि विभाग को हामी भी भर दी गई है। लेकिन अभी भी पेंच बनी से कठुआ तक मशरूम को कैसे पहुंचाया जाए इस पर फंसा हुआ है।
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कार्यालय परिसर में सेल काउंटर खोलने पर विचार कर रहा कृषि विभाग
कठुआ और पठानकोट के बाजार में मशरूम के दाम डेढ़ सौ से दो सौ रुपये प्रति किलो तक आसानी से मिल जाते हैं। बाजार बंद और शादियों में मांग कम हो जाने से आफ सीजन मशरूम की पैदावार को बड़ा झटका लगा है। मुख्य कृषि अधिकारी विजय उपाध्याय ने बताया कि कृषि विभाग कार्यालय परिसर में ही सेल काउंटर खोलने पर भी विचार कर रहा है, ताकि किसानों को बेहतर मूल्य के साथ साथ समर्थन मिल सके।
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दरअसल, बनी सब डिवीजन में कृषि विभाग के सहयोग से प्रायोगिक तौर पर एक दर्जन से अधिक किसानों ने मशरूम की खेती की। परिणाम भी बेहतरीन निकले। अब रोजाना एक क्विंटल से अधिक मशरूम की पैदावार के बाद भी किसानों को न तो दाम मिल रहे हैं और न ही बाजार। लॉकडाउन के बीच दुकानें बंद होने और बनी से कठुआ के बीच यात्री वाहन न चलने से किसानों की कमर टूट चुकी है। हालात यह हैं कि औने-पौने दाम में बेचने को किसान मजबूर हो रहे हैं। और अब इसे लगाने से भी कतराने लगे हैं।
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उधर, कृषि विभाग अपने स्तर पर भी इसके लिए प्रयास करने में जुट गया है। मुख्य कृषि अधिकारी विजय कुमार उपाध्याय ने बीएसएफ के अधिकारियों से भी पेशकश की है। वे किसानों की फसल को खरीदें। बताया गया है कि बीएसएफ की ओर से सप्ताह में दो बार मशरूम खरीद को लेकर कृषि विभाग को हामी भी भर दी गई है। लेकिन अभी भी पेंच बनी से कठुआ तक मशरूम को कैसे पहुंचाया जाए इस पर फंसा हुआ है।
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कार्यालय परिसर में सेल काउंटर खोलने पर विचार कर रहा कृषि विभाग
कठुआ और पठानकोट के बाजार में मशरूम के दाम डेढ़ सौ से दो सौ रुपये प्रति किलो तक आसानी से मिल जाते हैं। बाजार बंद और शादियों में मांग कम हो जाने से आफ सीजन मशरूम की पैदावार को बड़ा झटका लगा है। मुख्य कृषि अधिकारी विजय उपाध्याय ने बताया कि कृषि विभाग कार्यालय परिसर में ही सेल काउंटर खोलने पर भी विचार कर रहा है, ताकि किसानों को बेहतर मूल्य के साथ साथ समर्थन मिल सके।