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Kathua News: निशुल्क कानूनी सेवाएं व न्याय प्रदान करने के दायित्व पर दिया जोर
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राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस पर जिला न्यायालय में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस पर जिला न्यायालय में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान लोगों को न्याय प्रदान करने के लिए न्यायपालिका के दायित्व के पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में विभिन्न प्रदर्शनियों के माध्यम से निशुल्क कानूनी सेवाएं कैसे प्राप्त करें, पर प्रमुखता से जोर दिया गया। प्रदर्शनी में दर्शाया गया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति, मानव तस्करी के शिकार महिला हो या बच्चा, दिव्यांग व्यक्ति के साथ-साथ सामूहिक आपदा, जातीय हिंसा, जाति अत्याचार के अलावा बाढ़, सूखा, भूकंप और औद्योगिक आपदा का शिकार व्यक्ति न्यायालय की निशुल्क सेवा प्राप्त कर सकता है। प्रदर्शनी ने यह भी बताया गए कि कोई भी व्यक्ति जिसकी वार्षिक आय तीन लाख से कम और पांच लाख से कम है वे क्रमश: उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय से निशुल्क सेवा ले सकता है।
आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राधिकरण के अध्यक्ष जतिंदर सिंह जमवाल ने की। इसमें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रवीण पंडोह, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मुनीश कुमार मन्हास, उप-न्यायाधीश/विशेष मोबाइल मजिस्ट्रेट अमनदीप कौर और जिला मोबाइल मजिस्ट्रेट नीना ठाकुर उपस्थित रही। कार्यक्रम का आयोजन सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कामिया सिंह अंदोत्रा के मार्गदर्शन में हुआ। कार्यक्रम में आईसीडीएस, शिक्षा, स्वास्थ्य, आयुष, बागवानी, कृषि, पशुपालन, भेड़पालन, सहकारिता, हस्तशिल्प एवं हथकरघा, रोजगार, समाज कल्याण, जेएंडके बैंक, खादी (केवीआईबी और केवीआईसी), एनआरएलएम, श्रम विभाग की ओर से स्टाल लगा कर विभाग की विभिन्न योजना के बारे में बार के सदस्य और आम लोग को जागरूकता दी गई।
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प्राधिकरण के अध्यक्ष ने अपने वक्तव्य में इस दिन के महत्व और न्यायपालिका की ओर से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय प्रदान करने के दायित्व के बारे विस्तार में अपनी बात रखी। उन्होंने जनता के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की उपयोगिता पर भी जोर दिया। वहीं, प्राधिकरण सचिव ने कहा कि न्याय केवल अदालत परिसर में ही नहीं होना चाहिए। इसे जीवन के सभी क्षेत्रों में न्याय सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि चाहे आसमान क्यों न गिर जाए, न्याय अवश्य होना चाहिए। उन्होंने बताया कि समाज के कमजोर वर्गों को सिविल, आपराधिक या किसी अन्य फोरम में लंबित मामलों के साथ-साथ प्री-लिटिगेशन मामलों में भी मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस पर जिला न्यायालय में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान लोगों को न्याय प्रदान करने के लिए न्यायपालिका के दायित्व के पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में विभिन्न प्रदर्शनियों के माध्यम से निशुल्क कानूनी सेवाएं कैसे प्राप्त करें, पर प्रमुखता से जोर दिया गया। प्रदर्शनी में दर्शाया गया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति, मानव तस्करी के शिकार महिला हो या बच्चा, दिव्यांग व्यक्ति के साथ-साथ सामूहिक आपदा, जातीय हिंसा, जाति अत्याचार के अलावा बाढ़, सूखा, भूकंप और औद्योगिक आपदा का शिकार व्यक्ति न्यायालय की निशुल्क सेवा प्राप्त कर सकता है। प्रदर्शनी ने यह भी बताया गए कि कोई भी व्यक्ति जिसकी वार्षिक आय तीन लाख से कम और पांच लाख से कम है वे क्रमश: उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय से निशुल्क सेवा ले सकता है।
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आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राधिकरण के अध्यक्ष जतिंदर सिंह जमवाल ने की। इसमें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रवीण पंडोह, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मुनीश कुमार मन्हास, उप-न्यायाधीश/विशेष मोबाइल मजिस्ट्रेट अमनदीप कौर और जिला मोबाइल मजिस्ट्रेट नीना ठाकुर उपस्थित रही। कार्यक्रम का आयोजन सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कामिया सिंह अंदोत्रा के मार्गदर्शन में हुआ। कार्यक्रम में आईसीडीएस, शिक्षा, स्वास्थ्य, आयुष, बागवानी, कृषि, पशुपालन, भेड़पालन, सहकारिता, हस्तशिल्प एवं हथकरघा, रोजगार, समाज कल्याण, जेएंडके बैंक, खादी (केवीआईबी और केवीआईसी), एनआरएलएम, श्रम विभाग की ओर से स्टाल लगा कर विभाग की विभिन्न योजना के बारे में बार के सदस्य और आम लोग को जागरूकता दी गई।
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प्राधिकरण के अध्यक्ष ने अपने वक्तव्य में इस दिन के महत्व और न्यायपालिका की ओर से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय प्रदान करने के दायित्व के बारे विस्तार में अपनी बात रखी। उन्होंने जनता के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की उपयोगिता पर भी जोर दिया। वहीं, प्राधिकरण सचिव ने कहा कि न्याय केवल अदालत परिसर में ही नहीं होना चाहिए। इसे जीवन के सभी क्षेत्रों में न्याय सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि चाहे आसमान क्यों न गिर जाए, न्याय अवश्य होना चाहिए। उन्होंने बताया कि समाज के कमजोर वर्गों को सिविल, आपराधिक या किसी अन्य फोरम में लंबित मामलों के साथ-साथ प्री-लिटिगेशन मामलों में भी मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध है।