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Kathua News: महिलाओं ने बनाईं डेढ़ लाख अगरबत्तियां, धार्मिक स्थलों में महकेंगी
Wed, 24 Dec 2025 02:04 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Wed, 24 Dec 2025 02:04 AM IST
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अगरबत्ती बनाती महिलाएं
कठुआ। हस्तशिल्प विभाग सामान्य सुविधा केंद्र (सीएफसी) बिलावर को अगरबत्ती केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। हाल फिलहाल में सीएफसी में एक महीना प्रशिक्षण के दौरान 39 महिलाओं व 2 पुरुषो द्वारा तैयार डेढ़ लाख अगरबत्तियों को विभाग जल्द बाजार में उतारने की तैयारी में जुटा हुआ है।
जानकारी के अनुसार संबंधित विभाग किसी एक धार्मिक स्थल खासकर जिले के माता सुकराला देवी श्राइन बोर्ड या जम्मू स्थित अन्य किसी धार्मिक स्थल समझौता कर तैयार अगरबत्ती को बाजार में उतारने की योजना पर काम कर रहा है। इससे न केवल स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन मिलेगा बल्कि उनको आजीविका कमाने में भी सहायक साबित होगा। वहीं, स्थानीय स्तर पर तैयार अगरबत्ती जल्द धार्मिक स्थलों को महकाएंगी। इसकी कीमत अन्य अगरबत्ती के मुकाबले कम होगी। बता दें कि सीएफसी बिलावर में कुल 41 कारीगरों ने एक माह का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने के दौरान कुल डेढ़ लाख अगरबत्ती का निर्माण किया था। यह प्रशिक्षण उत्तर पूर्व बेंत और बांस विकास परिषद (एनईसीबीडीसी) के प्रशिक्षित कारीगरों की ओर से दिया गया था। इसमें अगरबत्ती निर्माण में इस्तेमाल कच्चा माल की व्यवस्था संबंधित विभाग की ओर से जबकि अगरबत्ती के इस्तेमाल स्टिक उत्तर पूर्व के राज्यों से लाई गई थी।
विभाग के अधिकारियों का कहना है सल्लन सीएफसी में जिस तरह से बांस शिल्प को बढ़ावा दिया जा रहा है। अगरबत्ती में इस्तेमाल होने स्टिक को भविष्य में सल्लन सीएफसी में तैयार करने की योजना है। इसके बाद इस उत्पाद को शत-प्रतिशत स्थानीय बनाने पर जोर दिया जाएगा।
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जानकारी के अनुसार संबंधित विभाग किसी एक धार्मिक स्थल खासकर जिले के माता सुकराला देवी श्राइन बोर्ड या जम्मू स्थित अन्य किसी धार्मिक स्थल समझौता कर तैयार अगरबत्ती को बाजार में उतारने की योजना पर काम कर रहा है। इससे न केवल स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन मिलेगा बल्कि उनको आजीविका कमाने में भी सहायक साबित होगा। वहीं, स्थानीय स्तर पर तैयार अगरबत्ती जल्द धार्मिक स्थलों को महकाएंगी। इसकी कीमत अन्य अगरबत्ती के मुकाबले कम होगी। बता दें कि सीएफसी बिलावर में कुल 41 कारीगरों ने एक माह का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने के दौरान कुल डेढ़ लाख अगरबत्ती का निर्माण किया था। यह प्रशिक्षण उत्तर पूर्व बेंत और बांस विकास परिषद (एनईसीबीडीसी) के प्रशिक्षित कारीगरों की ओर से दिया गया था। इसमें अगरबत्ती निर्माण में इस्तेमाल कच्चा माल की व्यवस्था संबंधित विभाग की ओर से जबकि अगरबत्ती के इस्तेमाल स्टिक उत्तर पूर्व के राज्यों से लाई गई थी।
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विभाग के अधिकारियों का कहना है सल्लन सीएफसी में जिस तरह से बांस शिल्प को बढ़ावा दिया जा रहा है। अगरबत्ती में इस्तेमाल होने स्टिक को भविष्य में सल्लन सीएफसी में तैयार करने की योजना है। इसके बाद इस उत्पाद को शत-प्रतिशत स्थानीय बनाने पर जोर दिया जाएगा।
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