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Kathua News: भौतिक वस्तु से नहीं सत्संग से मिलेगा सच्चा सुख
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। सच्चा सुख भौतिक वस्तुओं में नहीं सत्संग से मिलता है इसलिए हम सभी को सत्संग जरूर सुनना चाहिए। सत्संग ही व्यक्ति को जीवन मरण के बंधन से मुक्ति दिला सकता है। शहर के वार्ड नंबर 19 बाबा लाल दयाल आश्रम में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन आदियोगी गौतम जी महाराज ने उपस्थित संगत का मार्गदर्शन करते हुए यह बातें कही। स्वामी जी महाराज जी ने अपने प्रवचन के दौरान भक्तों को परीक्षित की जन्म की कथा एवं उनके द्वारा संतों की सेवा करके अपने जीवन को सफल बनाने का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने अपने प्रवचन के दौरान सूत जी और सनकादिक ऋषि को भागवत का उपदेश सुनाने का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जिसमें सूत जी महाराज ने हरि अनंत हरि कथा अनंता का उदाहरण देते हुए कहा कि परमात्मा की लीला को कोई पार नहीं पा सकता। उन्होंने श्रीमद् भागवत पुराण में भगवान के 24 अवतारों का विस्तार से वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को बताया कि इस धरती पर जब भी धर्म की हानि होती है, तो उसकी स्थापना के लिए परमात्मा अवतार लेते हैं। भगवान संतो, ब्राह्मणों, गो माता और अपने भक्तों को रक्षा के लिए विकराल रूप धारण कर लेते हैं। जैसे भगवान ने अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए नरसिंह का रूप धारण कर पापी हिरण्यकश्यप का वध किया और भक्त प्रहलाद की रक्षा की।उन्होंने कहा कि भगवान को जानने के लिए हमें भागवत कथा को जानना होगा। यह ग्रंथ भगवान के स्वरूप का अनुभव कराने वाला और समस्त वेदों का सार है। मनुष्य भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए अपना पूरा जीवन खर्च कर देता है और अंतत: खाली हाथ इस लोक से चला जाता है और उसे परमधाम की प्राप्ति नहीं हो पाती है। लिहाजा हमें परमधाम की प्राप्ति के भागवत कथा का श्रवण करना होगा।
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कठुआ। सच्चा सुख भौतिक वस्तुओं में नहीं सत्संग से मिलता है इसलिए हम सभी को सत्संग जरूर सुनना चाहिए। सत्संग ही व्यक्ति को जीवन मरण के बंधन से मुक्ति दिला सकता है। शहर के वार्ड नंबर 19 बाबा लाल दयाल आश्रम में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन आदियोगी गौतम जी महाराज ने उपस्थित संगत का मार्गदर्शन करते हुए यह बातें कही। स्वामी जी महाराज जी ने अपने प्रवचन के दौरान भक्तों को परीक्षित की जन्म की कथा एवं उनके द्वारा संतों की सेवा करके अपने जीवन को सफल बनाने का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने अपने प्रवचन के दौरान सूत जी और सनकादिक ऋषि को भागवत का उपदेश सुनाने का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जिसमें सूत जी महाराज ने हरि अनंत हरि कथा अनंता का उदाहरण देते हुए कहा कि परमात्मा की लीला को कोई पार नहीं पा सकता। उन्होंने श्रीमद् भागवत पुराण में भगवान के 24 अवतारों का विस्तार से वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को बताया कि इस धरती पर जब भी धर्म की हानि होती है, तो उसकी स्थापना के लिए परमात्मा अवतार लेते हैं। भगवान संतो, ब्राह्मणों, गो माता और अपने भक्तों को रक्षा के लिए विकराल रूप धारण कर लेते हैं। जैसे भगवान ने अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए नरसिंह का रूप धारण कर पापी हिरण्यकश्यप का वध किया और भक्त प्रहलाद की रक्षा की।उन्होंने कहा कि भगवान को जानने के लिए हमें भागवत कथा को जानना होगा। यह ग्रंथ भगवान के स्वरूप का अनुभव कराने वाला और समस्त वेदों का सार है। मनुष्य भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए अपना पूरा जीवन खर्च कर देता है और अंतत: खाली हाथ इस लोक से चला जाता है और उसे परमधाम की प्राप्ति नहीं हो पाती है। लिहाजा हमें परमधाम की प्राप्ति के भागवत कथा का श्रवण करना होगा।
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