कठुआ। सहार खड्ड के अपस्ट्रीम में हो रहे खनन के खिलाफ ग्रामीण लामबंद हो गए हैं। खड्ड के किनारे खनन लीज को रोकने के लिए जहां उन्होंने धरना शुरू कर दिया वहीं जमकर नारेबाजी कर प्रदर्शन भी किया। उन्होंने दो टूक कहा कि खनन से इलाके की संपदा प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों को पूछे बिना उनकी खड्डों में बड़े पैमाने पर खनन की अनुमति दे दी गई है, जिसे जब तक वापस नहीं लिया जाता, ग्रामीण चुप बैठने वाले नही हैं।
सरपंच भोली सिंह जसरोटिया ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि सहार और त्रेहड़ा पंचायतों के लोगों को प्रशासन और खनन विभाग ने धरने पर बैठने को मजबूर कर दिया है। कहा कि नेशनल हाईवे सहार पुल से लेकर कठेरा तक 11 किलोमीटर का इलाका है। आसपास के गांव के लोगों से पूछे बिना ही माइनिंग की लीज जारी कर दी गई है। सीधे तौर पर यह अवैध खनन है, जो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह ग्रामीणों को उजाड़ने की साजिश है। प्रदर्शनकारियों में शामिल पंचायत प्रतिनिधियों ने कहा कि तीन दिन पहले भी एक्सकेवेटर लगाकर खनन शुरू किया गया था। ग्रामीणों को कोई जानकारी नहीं है कि यहां खनन की अनुमति किसने दी और एनओसी आसपास के गांव से क्यों नहीं ली गई। उन्होंने कहा कि खड्ड का अधिकांश हिस्सा सूख है। व्यापक स्तर पर उस हिस्से में माइनिंग शुरू की गई है जहां खड्ड में पानी जमा होता है। जो आसपास के जलाशयों और खेतों के लिए भी स्रोत है। माइनिंग से इन जमीनों को बंजर कर आसपास के गांव को उजाड़ने की साजिश रची जा रही है, जो कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कहा कि यही हालात रहा तो जल्द अमृतसरोवर भी सूख जाएगा। ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि प्रशासन यदि अब भी नहीं जागा तो आमरण अनशन के लिए ग्रामीण मजबूर हो जाएंगे।