{"_id":"6ab826928d845e48cc040cdb","slug":"kisanon-ke-chehre-per-khushi-kathua-news-c-201-1-knt1008-136849-2026-09-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kathua News: बनी के पहाड़ों में मक्का की सुनहरी फसल तैयार, 7500 किसानों के चेहरों पर लौटी रौनक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kathua News: बनी के पहाड़ों में मक्का की सुनहरी फसल तैयार, 7500 किसानों के चेहरों पर लौटी रौनक
विज्ञापन
हाफिज कुरैशी
बनी। सितंबर माह के अंतिम दिनों के साथ ही बनी के सुरम्य और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में पारंपरिक कृषि का सबसे बड़ा उत्सव शुरू हो गया है। अप्रैल महीने में किसानों द्वारा खेतों में बोई गई मक्का की फसल अब पूरी तरह पककर तैयार हो चुकी है। पहाड़ी आबोहवा में पांच महीने के कड़े परिश्रम के बाद तैयार यह फसल केवल ग्रामीणों की आजीविका का साधन ही नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान और खान-पान की रीढ़ भी मानी जाती है।
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, बनी उपमंडल में लगभग 3 हजार हेक्टेयर भूमि पर मक्का की खेती की जाती है, जिससे प्रत्यक्ष तौर पर करीब 7500 किसान परिवार जुड़े हैं। विभाग का अनुमान है कि अनुकूल मौसम और अच्छी देखरेख के चलते इस वर्ष प्रति हेक्टेयर औसतन 40 क्विंटल की पैदावार मिलेगी। इस आधार पर पूरे क्षेत्र में कुल उत्पादन करीब 1 लाख 20 हजार क्विंटल (लगभग 12 हजार मीट्रिक टन) रहने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बड़ा संबल मिलेगा।
कृषि विभाग के अधिकारी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के प्रयोग के लिए प्रेरित किया गया था। इस बार किसानों ने 794 रासी सीड 9621 बीओआई सीड और 612 काचन जैसी उन्नत किस्मों की बुवाई की है।
विज्ञापन
इन किस्मों के बेहतर अंकुरण और कीट-प्रतिरोधी क्षमता के कारण पहाड़ी ढलानों पर भी फसल की स्थिति काफी बेहतर देखी जा रही है।
विज्ञापन
बनी। सितंबर माह के अंतिम दिनों के साथ ही बनी के सुरम्य और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में पारंपरिक कृषि का सबसे बड़ा उत्सव शुरू हो गया है। अप्रैल महीने में किसानों द्वारा खेतों में बोई गई मक्का की फसल अब पूरी तरह पककर तैयार हो चुकी है। पहाड़ी आबोहवा में पांच महीने के कड़े परिश्रम के बाद तैयार यह फसल केवल ग्रामीणों की आजीविका का साधन ही नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान और खान-पान की रीढ़ भी मानी जाती है।
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, बनी उपमंडल में लगभग 3 हजार हेक्टेयर भूमि पर मक्का की खेती की जाती है, जिससे प्रत्यक्ष तौर पर करीब 7500 किसान परिवार जुड़े हैं। विभाग का अनुमान है कि अनुकूल मौसम और अच्छी देखरेख के चलते इस वर्ष प्रति हेक्टेयर औसतन 40 क्विंटल की पैदावार मिलेगी। इस आधार पर पूरे क्षेत्र में कुल उत्पादन करीब 1 लाख 20 हजार क्विंटल (लगभग 12 हजार मीट्रिक टन) रहने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बड़ा संबल मिलेगा।
विज्ञापन
कृषि विभाग के अधिकारी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के प्रयोग के लिए प्रेरित किया गया था। इस बार किसानों ने 794 रासी सीड 9621 बीओआई सीड और 612 काचन जैसी उन्नत किस्मों की बुवाई की है।
विज्ञापन
इन किस्मों के बेहतर अंकुरण और कीट-प्रतिरोधी क्षमता के कारण पहाड़ी ढलानों पर भी फसल की स्थिति काफी बेहतर देखी जा रही है।