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Kathua News: विशेष लोक अदालत में 3 एमएसीटी मामलों का निपटारा, 10.75 लाख रुपये में हुआ समझौता
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। मोटर दुर्घटना से जुड़े मामलों के त्वरित और आपसी सहमति से निपटारे के लिए शनिवार को न्यायालय परिसर में एक विशेष लोक अदालत लगाई गई। यह लोक अदालत एडीआर सेंटर में आयोजित की गई। यह लोक अदालत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के अध्यक्ष एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रवीण पंडोह के मार्गदर्शन में आयोजित की गई, जिसमें एमएसीटी (मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल) से संबंधित मामलों की सुनवाई की गई।
विशेष लोक अदालत में एक पीठ का गठन किया गया, जिसमें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रवीण पंडोह तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव उर्वशी आर. भार्गव शामिल रहीं। कुल 10 एमएसीटी मामलों को आपसी सहमति से निपटारे के लिए लिया गया, जिनमें से तीन मामलों का सफलतापूर्वक समझौते के आधार पर निपटारा किया गया। इन मामलों में समझौते के तहत कुल 10 लाख 75 हजार रुपये की राशि हासिल करने पर सहमति बनी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कहा कि विशेष लोक अदालत का आयोजन दुर्घटना पीड़ितों और संबंधित पक्षों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत देते हुए आपसी सहमति के माध्यम से मामलों के समाधान का अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया। लोक अदालत के माध्यम से मामलों के निपटारे से पक्षकारों के समय और खर्च की भी बचत होती है।
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कठुआ। मोटर दुर्घटना से जुड़े मामलों के त्वरित और आपसी सहमति से निपटारे के लिए शनिवार को न्यायालय परिसर में एक विशेष लोक अदालत लगाई गई। यह लोक अदालत एडीआर सेंटर में आयोजित की गई। यह लोक अदालत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के अध्यक्ष एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रवीण पंडोह के मार्गदर्शन में आयोजित की गई, जिसमें एमएसीटी (मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल) से संबंधित मामलों की सुनवाई की गई।
विशेष लोक अदालत में एक पीठ का गठन किया गया, जिसमें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रवीण पंडोह तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव उर्वशी आर. भार्गव शामिल रहीं। कुल 10 एमएसीटी मामलों को आपसी सहमति से निपटारे के लिए लिया गया, जिनमें से तीन मामलों का सफलतापूर्वक समझौते के आधार पर निपटारा किया गया। इन मामलों में समझौते के तहत कुल 10 लाख 75 हजार रुपये की राशि हासिल करने पर सहमति बनी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कहा कि विशेष लोक अदालत का आयोजन दुर्घटना पीड़ितों और संबंधित पक्षों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत देते हुए आपसी सहमति के माध्यम से मामलों के समाधान का अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया। लोक अदालत के माध्यम से मामलों के निपटारे से पक्षकारों के समय और खर्च की भी बचत होती है।
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