बिलावर। मांडली गांव में जारी श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के छठे दिन कथावाचक सुभाष शास्त्री ने पंडाल में पहुंचे श्रद्धालुओं को कथा सुनाते हुए कहा कि हम सब सुख चाहते हैं, दुख किसी को भी पसंद नहीं है। वास्तव में ही सुख लेने की चीज नहीं है, बल्कि देने की चीज है। जितना हो सके दूसरों को सुख दो स्वयं सुख की चाह छोड़ दो। जो दूसरों को सुख देता है, वह दुखी हो ही नहीं सकता।
दुखी वही होता है जो स्वयं तो सुख चाहता है पर दूसरों को सुख नहीं देता। जिसने दूसरों को सुख देना सीख लिया दुनिया में उसने जीना सीख लिया। उन्होंने कथा सुनाते हुए कहा कि हे जीव सुख-दुख तो आने और जाने वाले हैं। आत्मा-परमात्मा सदा रहने वाला है। आने-जाने वालों से संबंध कैसा? जीवन को सुख में या दुख में नहीं साधन में बनाओ। शनिवार को कथा का समापन विशाल भंडारे के साथ किया जाएगा