{"_id":"6ab6d6ecd871c68de8018aec","slug":"abkari-news-kathua-news-c-201-1-knt1009-136780-2026-09-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kathua News: आबकारी मामले में आरोपी बरी, कोर्ट ने हेड कांस्टेबल द्वारा की गई मामले की जांच को माना अयोग्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kathua News: आबकारी मामले में आरोपी बरी, कोर्ट ने हेड कांस्टेबल द्वारा की गई मामले की जांच को माना अयोग्य
विज्ञापन
अदालत से........
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। न्यायिक मजिस्ट्रेट हीरानगर ने आबकारी मामले में छह साल पुराने मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। कोर्ट ने आदेश के अनुसार, मामले की जांच हेड कांस्टेबल द्वारा की गई थी, जबकि आबकारी अधिनियम के तहत जांच करने के लिए संबंधित पुलिस अधिकारी का कम से कम उपनिरीक्षक (एसआई) स्तर का होना आवश्यक है। अदालत ने इस मामले में दोषसिद्धि की कोई संभावना नहीं देखते हुए मुकदमे की कार्यवाही समाप्त करने का आदेश दिया।
मामले की सुनवाई गत 22 सितंबर को न्यायिक मजिस्ट्रेट लक्ष्य बडयाल की अदालत में की गई। मामला 15 मार्च 2020 का है, जिसमें मढ़ीन पुलिस ने राकेश कुमार निवासी लच्छीपुर और निट्टू निवासी बनयारी, हीरानगर को अवैध शराब बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके बाद मामले की जांच हेड कांस्टेबल अवतार सिंह को सौंपी गई और उन्होंने जांच पूरी करने के बाद चालान को 24 अगस्त 2020 को कोर्ट में प्रस्तुत किया गया। हालांकि, मुकदमे की सुनवाई के दौरान दूसरे आरोपी निट्टू की मृत्यु हो गई, जिसके चलते उसके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई। अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि यह चालान लंबे समय से अदालत में लंबित था। अभियोजन पक्ष ने मामले में छह गवाहों को सूचीबद्ध किया था, लेकिन सुनवाई के दौरान किसी भी गवाह की गवाही दर्ज नहीं हुई थी। सभी गवाह पुलिस कर्मी थे। आरोपी राकेश कुमार के वकील ने अदालत में दलील दी कि आबकारी अधिनियम के तहत जांच करने का अधिकार केवल सक्षम अधिकारी को है और इस मामले में जांच अक्षम अधिकारी द्वारा की गई थी, जो कानून के अनुसार अधिकृत नहीं था। बचाव पक्ष ने इसी आधार पर मुकदमे की कार्यवाही समाप्त करने की मांग की। अदालत ने सभी तथ्यों और उच्च न्यायालय के फैसलों पर विचार करने के बाद माना कि वर्तमान मामले में आरोपी को दोषी ठहराए जाने की कोई संभावना नहीं है। अदालत ने बचाव पक्ष की अर्जी स्वीकार करते हुए आरोपी के खिलाफ चल रहे मुकदमे की कार्यवाही समाप्त कर दी और राकेश कुमार निवासी लच्छीपुर, मढ़ीन को आबकारी अधिनियम की धारा 48(ई) के आरोप से मुक्त करने का फैसला सुनाया गया।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। न्यायिक मजिस्ट्रेट हीरानगर ने आबकारी मामले में छह साल पुराने मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। कोर्ट ने आदेश के अनुसार, मामले की जांच हेड कांस्टेबल द्वारा की गई थी, जबकि आबकारी अधिनियम के तहत जांच करने के लिए संबंधित पुलिस अधिकारी का कम से कम उपनिरीक्षक (एसआई) स्तर का होना आवश्यक है। अदालत ने इस मामले में दोषसिद्धि की कोई संभावना नहीं देखते हुए मुकदमे की कार्यवाही समाप्त करने का आदेश दिया।
मामले की सुनवाई गत 22 सितंबर को न्यायिक मजिस्ट्रेट लक्ष्य बडयाल की अदालत में की गई। मामला 15 मार्च 2020 का है, जिसमें मढ़ीन पुलिस ने राकेश कुमार निवासी लच्छीपुर और निट्टू निवासी बनयारी, हीरानगर को अवैध शराब बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके बाद मामले की जांच हेड कांस्टेबल अवतार सिंह को सौंपी गई और उन्होंने जांच पूरी करने के बाद चालान को 24 अगस्त 2020 को कोर्ट में प्रस्तुत किया गया। हालांकि, मुकदमे की सुनवाई के दौरान दूसरे आरोपी निट्टू की मृत्यु हो गई, जिसके चलते उसके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई। अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि यह चालान लंबे समय से अदालत में लंबित था। अभियोजन पक्ष ने मामले में छह गवाहों को सूचीबद्ध किया था, लेकिन सुनवाई के दौरान किसी भी गवाह की गवाही दर्ज नहीं हुई थी। सभी गवाह पुलिस कर्मी थे। आरोपी राकेश कुमार के वकील ने अदालत में दलील दी कि आबकारी अधिनियम के तहत जांच करने का अधिकार केवल सक्षम अधिकारी को है और इस मामले में जांच अक्षम अधिकारी द्वारा की गई थी, जो कानून के अनुसार अधिकृत नहीं था। बचाव पक्ष ने इसी आधार पर मुकदमे की कार्यवाही समाप्त करने की मांग की। अदालत ने सभी तथ्यों और उच्च न्यायालय के फैसलों पर विचार करने के बाद माना कि वर्तमान मामले में आरोपी को दोषी ठहराए जाने की कोई संभावना नहीं है। अदालत ने बचाव पक्ष की अर्जी स्वीकार करते हुए आरोपी के खिलाफ चल रहे मुकदमे की कार्यवाही समाप्त कर दी और राकेश कुमार निवासी लच्छीपुर, मढ़ीन को आबकारी अधिनियम की धारा 48(ई) के आरोप से मुक्त करने का फैसला सुनाया गया।
विज्ञापन