Kathua: पाकिस्तान से चल रहा था काला कारोबार, ड्रोन से हो रही थी नशे की तस्करी; ड्रग सिंडिकेट के चार गिरफ्तार
नेटवर्क के चार सदस्यों को जम्मू-कश्मीर और पंजाब से गिरफ्तार किया गया है। यह सिंडिकेट पाकिस्तान से संचालित हो रहा था और नशीले पदार्थों की खेप को ड्रोन के माध्यम से भारतीय क्षेत्र में गिराया जाता था।
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जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कठुआ जिले में अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। इस नेटवर्क के चार सदस्यों को जम्मू-कश्मीर और पंजाब से गिरफ्तार किया गया है। यह सिंडिकेट पाकिस्तान से संचालित हो रहा था और नशीले पदार्थों की खेप को ड्रोन के माध्यम से भारतीय क्षेत्र में गिराया जाता था। स्थानीय नेटवर्क इस खेप को तस्करों तक पहुंचाता था। इस नेटवर्क की जड़ें पंजाब से कठुआ हाेते हुए सांबा तक फैली थीं। हवाला के जरिए इसकी फंडिंग दुबई और यूएसए के जरिए पाकिस्तान तक पहुंचाई जा रही थी।
29 जुलाई को कठुआ के छन्न टांडा गांव में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास एक संदिग्ध ड्रोन गतिविधि की सूचना पुलिस को मिली थी। पुलिस और बीएसएफ की त्वरित कार्रवाई में करीब 447 ग्राम अफीम बरामद हुई। इस पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच में सामने आया कि सांबा जिले के घगवाल में नेशनल हाईवे की परियोजना में काम कर रहे दो युवक सुखविंदर सिंह निवासी अमृतसर और अर्शदीप सिंह उर्फ राजा निवासी गुरदासपुर ड्रोन से गिराई गई खेप को उठाकर आगे सप्लाई करने वाले थे। इनके पास से 411 ग्राम हेरोइन भी बरामद हुई जिसे वे अगली आगे पहुंचाने के लिए रखे हुए थे।
इनकी निशानदेही पर कठुआ के राजबाग निवासी फिरोज दीन उर्फ अल्लू को गिरफ्तार किया गया। वह सीधे तौर पर पाकिस्तान के हैंडलरों से संपर्क में था। इसके बाद पंजाब के तरनतारन से एक ड्रग फाइनेंसर को भी दबोचा गया जो हवाला के जरिए नशे की कमाई पाकिस्तान भेजता था। दोनों के पास से हेरोइन और नकदी बरामद हुई थी।
यह नेटवर्क अब तक 30 किलो से अधिक हेरोइन पंजाब और जम्मू-कश्मीर के सांबा तक ड्रोन के जरिए गिरा चुका है। एसएसपी कठुआ शोभित सक्सेना ने बताया कि यह एक अत्यंत संगठित और सतर्क सिंडिकेट था जो लंबे समय से कानून की पकड़ से बचता आ रहा था। पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर छानबीन जारी रखी है।
तस्करों और फाइनेंसरों से कोड नाम से संपर्क में थे पाकिस्तान में बैठे हैंडलर
पुलिस के अनुसार, पाकिस्तान में इस नेटवर्क को चलाने वाले व्यक्ति की पहचान कर ली गई है। वित्तीय जांच में लाखों रुपये के फर्जी बैंक ट्रांजेक्शन सामने आए हैं जिनका उद्देश्य नेटवर्क को छुपाना था। एसपी ऑपरेशन मुकुंद टिबरेवाल की निगरानी में डीएसपी बार्डर धीरज कटोच की टीम की जांच में सामने आया कि सीमा क्षेत्र में ड्रोन से हेरोइन की खेप गिराई जाती थी जिसे स्थानीय नेटवर्क उठाकर तस्करों तक पहुंचाता था। यह पूरा नेटवर्क पंजाब से संचालित हो रहा था। पाकिस्तान से हैंडलर भी अपने कोड नाम के साथ बड़े तस्करों, फाइनेंसरों के संपर्क में थे।
सौ-सौ, 50-50 ग्राम की खेप स्थानीय नेटवर्क को दी गई
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि स्थानीय तस्कर फिरोज उर्फ अलू ने सौ-सौ, 50-50 ग्राम की खेप स्थानीय नेटवर्क को दी। एक 400 ग्राम की खेप से 12 लाख रुपये की राशि एकत्रित की गई जिसमें से कमीशन काटकर 10 लाख रुपये हवाला के माध्यम से दुबई और अमेरिका होते हुए पाकिस्तान भेजे गए। पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क की पहचान कर ली है। इसमें शामिल अन्य लोगों की गिरफ्तारी और नशे की खेप को पकड़ने के लिए फिलहाल पुलिस जांच जारी है।
छोटे अपराधियों को बनाया गया वाहक
कठुआ के एसएसपी शोभित सक्सेना ने बताया कि तस्करों ने अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र के छोटे अपराधियों को कूरियर यानी वाहक के रूप में इस्तेमाल किया। उन्हें नशे की खेप उठाने और डिलीवरी देने के लिए उकसाया गया। साथ ही जेल में पैसे और कानूनी मदद का झांसा दिया गया। इस बार पुलिस ने न केवल स्थानीय तस्करों बल्कि पूरे नेटवर्क के किंगपिन और फाइनेंसर को भी गिरफ्तार किया है। बताया कि जांच अभी जारी है और इसमें कई अन्य लिंक सामने आए हैं। बीएसएफ और पुलिस की संयुक्त टीम ने ड्रोन ड्रॉपिंग पर तत्काल कार्रवाई की जिसके बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने तरनतारन, गुरदासपुर और अमृतसर में छापेमारी कर मुख्य आरोपियों को पकड़ा।
हथियार और टेरर एंगल की भी जांच
एसएसपी के अनुसार पुलिस को कुछ ऐसे फोटो मिले हैं जिनसे संकेत मिलता है कि ड्रोन के माध्यम से हथियार भी गिराए गए हो सकते हैं। इस मामले में पाकिस्तान स्थित तंजीमों के साथ संबंधों की भी जांच की जा रही है। टेरर एंगल को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। उन्होंने बताया कि इसी को देखते हुए यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया है।
इनक्रिप्टेड एप का इस्तेमाल, जेल में अपराधियों को करते थे मोटिवेट
कॉल रिकार्ड के पकड़ में आने और चैट को दो लोगों के बीच ही सुरक्षित रखने के लिए तस्कर इनक्रिप्टेड एप के माध्यम से संवाद करते थे जिससे उनकी पहचान मुश्किल हो जाती थी। पुलिस की साइबर टीम इस तकनीकी पहलू पर भी काम कर रही है। ड्रॉपिंग की घटनाएं मुख्य रूप से तरनतारन, गुरदासपुर, अमृतसर, कठुआ और सांबा में हुई हैं।
एप्पल टैग, वरच्यू फोन भी बरामद
महंगे गोल्ड प्लेटेड वरच्यू फोन के अलावा तस्करों से डॉलर, सैमसंग का पैड और एप्पल एयर टैग भी बरामद हुए हैं। एप्पल एयर टैग के संबंध में पूछे जाने पर पुलिस ने बताया कि संभवत इसका इस्तेमाल खेप को छुपाने और फिर उस तक पहुंचने के लिए किया जाता रहा हो। फिलहाल इसकी जांच जारी है।
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