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रामकोट में रेशम कीटों पर बीमारी का हमला
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रामकोट। थड़ा कलवाल में अज्ञात बीमारी से रेशम कीट पालक काफी परेशान हैं। किसान खुपटियां लगाने वाले थे कि बीमारी के हमले से रेशम के कीट मर रहे हैं। सरपंच आनंद किशोर और डीडीसी नारायण दत्त त्रिपाठी ने सेरीकल्चर विभाग से कीट पालकों को मुआवजा देने की मांग की है
किसान और थडा कलवाल पंचायत के नायब सरपंच प्रीतम कुमार ने बताया कि वे खुपटियां लगाने के लिए इस बार भी रेशम के कीड़े पाल रहे हैं लेकिन अचानक किसी बीमारी से 50 फीसदी कीड़े मर चुके हैं।
गांव थड़ा कलवाल के रेशम कीट पालक कुलदीप कुमार ने कहा कि उनके पाले रेशम के कीड़े काकून लगाने की कगार पर पहुंच चुके थे कि अचानक किसी बीमारी के कारण वह धीरे-धीरे मरना शुरू हो गए हैं। मेहनत पर पानी फिर गया है।
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थड़ा कलवाल की किसान सोमा देवी का कहना है कि अन्य कामों को छोड़कर सारा परिवार रेशम के कीड़ों को पालने में लगा हुआ था, लेकिन अब अंतिम दौर में कीड़े मरने लगे हैं जिससे रेशम कीट पालकों को नुकसान हो रहा है।
बिट्टू राम ने कहा कि गांव के अधिकतर लोग रेशम कीट पालन करते हैं। इससे तैयार होने वाली काकुन को सेरीकल्चर की मंडी में बेचकर अच्छा खासा मुनाफा कमाते हैं लेकिन इस बार कीट पालक बीमारी से चिंतित हैं।
बिशन दास ने बताया कि कीट पालने की शुरुआती प्रक्रिया में सब ठीक था, लेकिन 2 सप्ताह बाद अचानक ही कीट शहतूत के पत्तों पर ठहरने के बजाय कमरे में इधर-उधर भागने लगे हैं। कई कीट काकुन बनाए बगैर मर गए। उन्होंने कहा कि कीटों के मरने पर पूरी मेहनत पर पानी फिरता हुआ नजर आ रहा है।
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किसान और थडा कलवाल पंचायत के नायब सरपंच प्रीतम कुमार ने बताया कि वे खुपटियां लगाने के लिए इस बार भी रेशम के कीड़े पाल रहे हैं लेकिन अचानक किसी बीमारी से 50 फीसदी कीड़े मर चुके हैं।
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गांव थड़ा कलवाल के रेशम कीट पालक कुलदीप कुमार ने कहा कि उनके पाले रेशम के कीड़े काकून लगाने की कगार पर पहुंच चुके थे कि अचानक किसी बीमारी के कारण वह धीरे-धीरे मरना शुरू हो गए हैं। मेहनत पर पानी फिर गया है।
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थड़ा कलवाल की किसान सोमा देवी का कहना है कि अन्य कामों को छोड़कर सारा परिवार रेशम के कीड़ों को पालने में लगा हुआ था, लेकिन अब अंतिम दौर में कीड़े मरने लगे हैं जिससे रेशम कीट पालकों को नुकसान हो रहा है।
बिट्टू राम ने कहा कि गांव के अधिकतर लोग रेशम कीट पालन करते हैं। इससे तैयार होने वाली काकुन को सेरीकल्चर की मंडी में बेचकर अच्छा खासा मुनाफा कमाते हैं लेकिन इस बार कीट पालक बीमारी से चिंतित हैं।
बिशन दास ने बताया कि कीट पालने की शुरुआती प्रक्रिया में सब ठीक था, लेकिन 2 सप्ताह बाद अचानक ही कीट शहतूत के पत्तों पर ठहरने के बजाय कमरे में इधर-उधर भागने लगे हैं। कई कीट काकुन बनाए बगैर मर गए। उन्होंने कहा कि कीटों के मरने पर पूरी मेहनत पर पानी फिरता हुआ नजर आ रहा है।