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Kathua News: घर में घुसकर महिला से मारपीट करने के मामले में आरोपी आठ साल बरी
Sun, 29 Mar 2026 01:11 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sun, 29 Mar 2026 01:11 AM IST
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अदालत से
अदालत ने आरोपी के जमानती व व्यक्तिगत बांड को खारिज करने का निर्देश दिया
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। घर में घुसकर महिला से मारपीट करने के मामले में कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया है। अदालत ने आरोपी के जमानती व व्यक्तिगत बांड को खारिज करने का निर्देश दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवानी अत्री के आदेश के अनुसार बयानों और सबूतों की कमी के चलते अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने में असफल रहा।
कोर्ट में दायर चालान के अनुसार मामला 6 फरवरी 2019 को काथल बनी का है। इसमें पीड़ित महिला ने बताया कि घटना के दिन सुबह 7:30 बजे वह रसोईघर में चाय बना रही थीं तभी आरोपी नारायण दत्त घर में घुस आया, गाली-गलौज की और बाल पकड़कर बाहर खींचते हुए गड्ढे में फेंक दिया। शिकायतकर्ता ने बताया कि आरोपी ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आरपीसी की धारा 452 (घर में घुसकर) और 323 (मारपीट) के तहत मामला दर्ज कर चालान को 2 अप्रैल 2019 को कोर्ट में प्रस्तुत किया था। आरोपी के खिलाफ आरोप 23 अप्रैल 2019 को तय किए थे। इसके बाद कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को मामले में गवाहों को पेश करने का निर्देश दिया। अभियोजन पक्ष ने कुल नौ में से सात गवाह प्रस्तुत किए। पीड़िता ने अपने बयान में बाल पकड़कर बाहर खींचने और गड्ढे में फेंकने के आरोप को दोहराया जबकि प्रत्यक्षदर्शी गवाहों ने मारपीट और गड्ढे में फेंकने की बात कही लेकिन अन्य गवाहों ने कहा कि झगड़े में गाली-गलौज दोनों तरफ से हुई और केवल थप्पड़ मारने की बात कही।
वहीं चिकित्सक ने मेडिकल रिपोर्ट में चोटों को साधारण बताया जबकि जांच अधिकारी ने कहा कि झगड़े का कारण जमीन थी। कोर्ट ने गवाहों की गवाही और रिकॉर्ड में उपलब्ध दस्तावेजों का अवलोकन करने पर पाया कि शिकायतकर्ता ने कहा कि घटना एक महीने पहले हुई थी जबकि मेडिकल रिपोर्ट घटना के दिन ही करवाई गई थी। कोर्ट ने गवाहों के विरोधाभासी बयान जैसे किसी ने कहा कि पीड़ित को गड्ढे में फेंकने की बात कही तो किसी ने कहा कि केवल थप्पड़ मारा था। पीड़ित की बेटी ने अपने बयान में कहा कि झगड़े में मां का हाथ टूट गया था लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में ऐसा कुछ भी नहीं था। जांच अधिकारी ने बताया कि जमीन की मालिकी साबित करने के लिए कोई राजस्व रिकॉर्ड या पटवारी की रिपोर्ट पेश नहीं की गई। इसके बाद अदालत ने आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया।
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अदालत ने आरोपी के जमानती व व्यक्तिगत बांड को खारिज करने का निर्देश दिया
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। घर में घुसकर महिला से मारपीट करने के मामले में कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया है। अदालत ने आरोपी के जमानती व व्यक्तिगत बांड को खारिज करने का निर्देश दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवानी अत्री के आदेश के अनुसार बयानों और सबूतों की कमी के चलते अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने में असफल रहा।
कोर्ट में दायर चालान के अनुसार मामला 6 फरवरी 2019 को काथल बनी का है। इसमें पीड़ित महिला ने बताया कि घटना के दिन सुबह 7:30 बजे वह रसोईघर में चाय बना रही थीं तभी आरोपी नारायण दत्त घर में घुस आया, गाली-गलौज की और बाल पकड़कर बाहर खींचते हुए गड्ढे में फेंक दिया। शिकायतकर्ता ने बताया कि आरोपी ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आरपीसी की धारा 452 (घर में घुसकर) और 323 (मारपीट) के तहत मामला दर्ज कर चालान को 2 अप्रैल 2019 को कोर्ट में प्रस्तुत किया था। आरोपी के खिलाफ आरोप 23 अप्रैल 2019 को तय किए थे। इसके बाद कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को मामले में गवाहों को पेश करने का निर्देश दिया। अभियोजन पक्ष ने कुल नौ में से सात गवाह प्रस्तुत किए। पीड़िता ने अपने बयान में बाल पकड़कर बाहर खींचने और गड्ढे में फेंकने के आरोप को दोहराया जबकि प्रत्यक्षदर्शी गवाहों ने मारपीट और गड्ढे में फेंकने की बात कही लेकिन अन्य गवाहों ने कहा कि झगड़े में गाली-गलौज दोनों तरफ से हुई और केवल थप्पड़ मारने की बात कही।
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वहीं चिकित्सक ने मेडिकल रिपोर्ट में चोटों को साधारण बताया जबकि जांच अधिकारी ने कहा कि झगड़े का कारण जमीन थी। कोर्ट ने गवाहों की गवाही और रिकॉर्ड में उपलब्ध दस्तावेजों का अवलोकन करने पर पाया कि शिकायतकर्ता ने कहा कि घटना एक महीने पहले हुई थी जबकि मेडिकल रिपोर्ट घटना के दिन ही करवाई गई थी। कोर्ट ने गवाहों के विरोधाभासी बयान जैसे किसी ने कहा कि पीड़ित को गड्ढे में फेंकने की बात कही तो किसी ने कहा कि केवल थप्पड़ मारा था। पीड़ित की बेटी ने अपने बयान में कहा कि झगड़े में मां का हाथ टूट गया था लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में ऐसा कुछ भी नहीं था। जांच अधिकारी ने बताया कि जमीन की मालिकी साबित करने के लिए कोई राजस्व रिकॉर्ड या पटवारी की रिपोर्ट पेश नहीं की गई। इसके बाद अदालत ने आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया।
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