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Kathua News: एनडीपीएस के 12 साल पुराने मामले में दो आरोपियों को किया बरी
Tue, 10 Mar 2026 01:42 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Tue, 10 Mar 2026 01:42 AM IST
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अदालत से
कोर्ट ने पुलिस की ओर से की गई जांच में पाई गंभीर खामियां
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीन पंडोह ने एनडीपीएस के 12 साल पुराने में दो आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पुलिस की ओर से मामले में की गई जांच में गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। इसके चलते आरोपियों के आरोप साबित नहीं हो सके।
कोर्ट में पुलिस की ओर से दायर चालान के अनुसार मामला 24 मई 2013 को हीरानगर क्षेत्र का है। इसमें पुलिस ने दो आरोपियों रोशन लाल और कुलदीप कुमार निवासी हीरानगर को गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज के पास अर्जुन चक मोड पर नाके के दौरान गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने उनसे नशीले पदार्थ बरामद किए थे। पुलिस के अनुसार तलाशी के दौरान रोशन लाल के पास से 75 नशीले कैप्सूल और 10 बोतल 100 मिलीलीटर कोरेक्स सिरप जबकि कुलदीप कुमार से 187 नशीले कैप्सूल बरामद किए थे।
पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ 27 अगस्त 2013 को कोर्ट में चालान प्रस्तुत किया था। 11 नवंबर 2013 को आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में आरोप तय किए गए जिसमें उन्होंने खुद को निर्दोष बताया और मुकदमा चलाए जाने की वकालत की थी। इसके बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष को गवाहों को प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 11 गवाहों को पेश किया। इसमें नाका ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मी, एफएसएल अधिकारी और जांच अधिकारी शामिल थे। एफएसएल रिपोर्ट में कैप्सूल और सिरप में मादक तत्वों की पुष्टि भी बताई गई।
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अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि मामले की जांच और साक्ष्य प्रस्तुत करने में कई महत्वपूर्ण कमियां हैं। इसमें अभियोजन पक्ष की ओर से जब्त नशीले पदार्थ का सुरक्षित रख-रखाव साबित नहीं हुआ। पुलिस यह साबित नहीं कर सकी कि बरामद पदार्थ को मालखाने में सुरक्षित रखा गया था या नहीं। कोर्ट ने पाया कि सिर्फ जब्त नशीले पदार्थ के नमूनों को डी सील किया गया था जबकि बाकी कैप्सूल और कोरेक्स की बोतलें खुली अवस्था में थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि इससे छेड़छाड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं, नमूने 28 मई 2013 को एफएसएल पहुंचे थे। अदालत ने कहा कि एनसीबी के निर्देशों के अनुसार नमूने 72 घंटे के भीतर भेजे जाने चाहिए थे। इसके अलावा कोर्ट ने गवाहों की गवाही में विरोधाभास पाया और पुलिस की ओर से बरामदगी के समय कोई भी स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था। अदालत ने यह भी पाया कि सील रिंग पुलिस पार्टी के ही एक सदस्य के पास रही जिससे साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका बनी रहती है। इसके बाद अदालत ने आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का फैसला सुनाया है।
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कोर्ट ने पुलिस की ओर से की गई जांच में पाई गंभीर खामियां
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीन पंडोह ने एनडीपीएस के 12 साल पुराने में दो आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पुलिस की ओर से मामले में की गई जांच में गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। इसके चलते आरोपियों के आरोप साबित नहीं हो सके।
कोर्ट में पुलिस की ओर से दायर चालान के अनुसार मामला 24 मई 2013 को हीरानगर क्षेत्र का है। इसमें पुलिस ने दो आरोपियों रोशन लाल और कुलदीप कुमार निवासी हीरानगर को गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज के पास अर्जुन चक मोड पर नाके के दौरान गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने उनसे नशीले पदार्थ बरामद किए थे। पुलिस के अनुसार तलाशी के दौरान रोशन लाल के पास से 75 नशीले कैप्सूल और 10 बोतल 100 मिलीलीटर कोरेक्स सिरप जबकि कुलदीप कुमार से 187 नशीले कैप्सूल बरामद किए थे।
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पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ 27 अगस्त 2013 को कोर्ट में चालान प्रस्तुत किया था। 11 नवंबर 2013 को आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में आरोप तय किए गए जिसमें उन्होंने खुद को निर्दोष बताया और मुकदमा चलाए जाने की वकालत की थी। इसके बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष को गवाहों को प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 11 गवाहों को पेश किया। इसमें नाका ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मी, एफएसएल अधिकारी और जांच अधिकारी शामिल थे। एफएसएल रिपोर्ट में कैप्सूल और सिरप में मादक तत्वों की पुष्टि भी बताई गई।
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अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि मामले की जांच और साक्ष्य प्रस्तुत करने में कई महत्वपूर्ण कमियां हैं। इसमें अभियोजन पक्ष की ओर से जब्त नशीले पदार्थ का सुरक्षित रख-रखाव साबित नहीं हुआ। पुलिस यह साबित नहीं कर सकी कि बरामद पदार्थ को मालखाने में सुरक्षित रखा गया था या नहीं। कोर्ट ने पाया कि सिर्फ जब्त नशीले पदार्थ के नमूनों को डी सील किया गया था जबकि बाकी कैप्सूल और कोरेक्स की बोतलें खुली अवस्था में थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि इससे छेड़छाड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं, नमूने 28 मई 2013 को एफएसएल पहुंचे थे। अदालत ने कहा कि एनसीबी के निर्देशों के अनुसार नमूने 72 घंटे के भीतर भेजे जाने चाहिए थे। इसके अलावा कोर्ट ने गवाहों की गवाही में विरोधाभास पाया और पुलिस की ओर से बरामदगी के समय कोई भी स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था। अदालत ने यह भी पाया कि सील रिंग पुलिस पार्टी के ही एक सदस्य के पास रही जिससे साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका बनी रहती है। इसके बाद अदालत ने आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का फैसला सुनाया है।