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Kathua News: कोर्ट ने दिए तलाक के आदेश, 14 लाख गुजारा भत्ते पर बनी सहमति
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कठुआ। जिला प्रधान एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने दो पक्षों की आपसी सहमति के बाद तलाक का आदेश दिया है। आदेश में वर पक्ष की ओर से वधु पक्ष को गुजारा भत्ता के तौर पर 14 लाख की राशि दिए जाने पर भी सहमति बन गई है। इसमें से 5 लाख की राशि नाबालिग संतान के नाम पर एक खाते में सावधि जमा के रूप में जमा की जाएगी।
तलाक के मामले में हरदीप सिंह पुत्र हरदयाल सिंह निवासी राइका, रामगढ़, सांबा और अमनदीप कौर पुत्री स्वर्गीय मोहिंदर सिंह पत्नी हरदीप सिंह निवासी टांडा, मढ़ीन, कठुआ की ओर से 15 मई 2024 को आपसी सहमति से अपने विवाह को भंग करने के लिए न्यायालय के समक्ष अर्जी दाखिल की गई थी। इसके बाद न्यायालय ने दोनों पक्षों के बीच सुलह की संभावना तलाशने और मामले में फिर से चिंतन करने का भी वक्त दिया गया, लेकिन व्यर्थ साबित हुआ।
बता दे कि कि दोनों पक्षों का विवाह 10 नवंबर 2015 को जिला कठुआ के टांडा स्थित गांव में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ था। इसमें याचिकाकर्ताओं की एक लड़की भी हुई थी। लगातार आपसी मतभेदों के परिणामस्वरूप अक्सर झगड़े होते रहते थे। जिसके बाद दोनों अलग रहने लगे। दोनों परिवारों के सदस्यों और रिश्तेदारों द्वारा किए गए प्रयास भी इन मतभेदों को सुलझा नहीं सके। परिणामस्वरूप दोनों परिवारों की ओर से इस विवाह को भंग करना ही उचित समझा गया। इसके बाद कोर्ट में मामला दर्ज किया गया। दोनों पक्षों के रिश्तेदारों और परिवार वालों की ओर से स्थायी गुजारा भत्ता और दहेज के सामान से संबंधित मुद्दों को पहले से ही सुलझा लिया था। इसमें यह सहमति हुई थी कि याचिकाकर्ता पति को याचिकाकर्ता पत्नी को स्त्रीधन, दहेज के सामान और स्थायी गुजारा भत्ता के लिए 14 लाख की राशि का भुगतान करना होगा। जिसको विवाह भंग होने की तारीख से पहले तक वर पक्ष की ओर से वधु पक्ष के बैंक खाते में डाल दिया गया था।
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मामले में 16 नवंबर 2024 को न्यायाधीश जतिंद्र सिंह जम्वाल ने अंतिम सुनवाई करते हुए हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13-बी के तहत आदेश की तारीख से याचिकाकर्ताओं के बीच आपसी सहमति से विवाह को भंग करने का आदेश दिया। न्यायाधीश ने कहा कि यह आदेश याचिकाकर्ताओं के विवाह से पैदा हुई लड़की के अधिकारों को प्रभावित नहीं करेगा। क्योंकि नाबालिग बच्ची को पिता से भरण-पोषण का दावा करने का अधिकार सहित सह-संपत्ति या स्व-अर्जित संपत्ति आदि का हिस्सा शामिल है।
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तलाक के मामले में हरदीप सिंह पुत्र हरदयाल सिंह निवासी राइका, रामगढ़, सांबा और अमनदीप कौर पुत्री स्वर्गीय मोहिंदर सिंह पत्नी हरदीप सिंह निवासी टांडा, मढ़ीन, कठुआ की ओर से 15 मई 2024 को आपसी सहमति से अपने विवाह को भंग करने के लिए न्यायालय के समक्ष अर्जी दाखिल की गई थी। इसके बाद न्यायालय ने दोनों पक्षों के बीच सुलह की संभावना तलाशने और मामले में फिर से चिंतन करने का भी वक्त दिया गया, लेकिन व्यर्थ साबित हुआ।
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बता दे कि कि दोनों पक्षों का विवाह 10 नवंबर 2015 को जिला कठुआ के टांडा स्थित गांव में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ था। इसमें याचिकाकर्ताओं की एक लड़की भी हुई थी। लगातार आपसी मतभेदों के परिणामस्वरूप अक्सर झगड़े होते रहते थे। जिसके बाद दोनों अलग रहने लगे। दोनों परिवारों के सदस्यों और रिश्तेदारों द्वारा किए गए प्रयास भी इन मतभेदों को सुलझा नहीं सके। परिणामस्वरूप दोनों परिवारों की ओर से इस विवाह को भंग करना ही उचित समझा गया। इसके बाद कोर्ट में मामला दर्ज किया गया। दोनों पक्षों के रिश्तेदारों और परिवार वालों की ओर से स्थायी गुजारा भत्ता और दहेज के सामान से संबंधित मुद्दों को पहले से ही सुलझा लिया था। इसमें यह सहमति हुई थी कि याचिकाकर्ता पति को याचिकाकर्ता पत्नी को स्त्रीधन, दहेज के सामान और स्थायी गुजारा भत्ता के लिए 14 लाख की राशि का भुगतान करना होगा। जिसको विवाह भंग होने की तारीख से पहले तक वर पक्ष की ओर से वधु पक्ष के बैंक खाते में डाल दिया गया था।
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मामले में 16 नवंबर 2024 को न्यायाधीश जतिंद्र सिंह जम्वाल ने अंतिम सुनवाई करते हुए हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13-बी के तहत आदेश की तारीख से याचिकाकर्ताओं के बीच आपसी सहमति से विवाह को भंग करने का आदेश दिया। न्यायाधीश ने कहा कि यह आदेश याचिकाकर्ताओं के विवाह से पैदा हुई लड़की के अधिकारों को प्रभावित नहीं करेगा। क्योंकि नाबालिग बच्ची को पिता से भरण-पोषण का दावा करने का अधिकार सहित सह-संपत्ति या स्व-अर्जित संपत्ति आदि का हिस्सा शामिल है।