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Kathua News: नारद मोह प्रसंग सुनाया
Wed, 25 Feb 2026 01:21 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Wed, 25 Feb 2026 01:21 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। बसोहली उपमंडल के सननघाट स्थित शिव मंदिर में शिवमहापुराण कथा जारी है। कथाव्यास राम दास अनुरागी के प्रवचनों को सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।
मंगलवार को कथा के तीसरे दिन यजमानों ने सर्वदेव पूजन कर शिवपुराण की विधिवत पूजा की। इसके बाद कथाव्यास ने भक्तों को नारद मोह का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि जब अप्सराओं की भाव-भंगिमाओं का नारद जी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा तो उन्हें अभिमान हो गया कि उन्होंने काम पर विजय प्राप्त कर ली है। वास्तव में जिस स्थान पर नारद जी तपस्या कर रहे थे, वहीं महादेव ने पूर्व में कामदेव को भस्म किया था। इसी कारण उस क्षेत्र में काम का प्रभाव नहीं हो सकता था। बाद में जब नारद जी अपनी विजय कथा सुनाने महादेव के पास पहुंचे तो महादेव बोले कि यह बात किसी और को न बताना।
अपने चंचल स्वभाव के कारण नारद जी ने यह प्रसंग भगवान विष्णु को सुनाया तब विष्णु ने उन्हें महादेव के कामदेव को भस्म करने की कथा सुनाई। यह जानकर नारद लज्जित हुए और उनका अभिमान भंग हो गया। कथा के दौरान कथाव्यास के मधुर भजनों और श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
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कठुआ। बसोहली उपमंडल के सननघाट स्थित शिव मंदिर में शिवमहापुराण कथा जारी है। कथाव्यास राम दास अनुरागी के प्रवचनों को सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।
मंगलवार को कथा के तीसरे दिन यजमानों ने सर्वदेव पूजन कर शिवपुराण की विधिवत पूजा की। इसके बाद कथाव्यास ने भक्तों को नारद मोह का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि जब अप्सराओं की भाव-भंगिमाओं का नारद जी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा तो उन्हें अभिमान हो गया कि उन्होंने काम पर विजय प्राप्त कर ली है। वास्तव में जिस स्थान पर नारद जी तपस्या कर रहे थे, वहीं महादेव ने पूर्व में कामदेव को भस्म किया था। इसी कारण उस क्षेत्र में काम का प्रभाव नहीं हो सकता था। बाद में जब नारद जी अपनी विजय कथा सुनाने महादेव के पास पहुंचे तो महादेव बोले कि यह बात किसी और को न बताना।
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अपने चंचल स्वभाव के कारण नारद जी ने यह प्रसंग भगवान विष्णु को सुनाया तब विष्णु ने उन्हें महादेव के कामदेव को भस्म करने की कथा सुनाई। यह जानकर नारद लज्जित हुए और उनका अभिमान भंग हो गया। कथा के दौरान कथाव्यास के मधुर भजनों और श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
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