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रामलीला : राम सीता विवाह, मंथरा-कैकई संवाद का मंचन
Thu, 26 Mar 2026 01:36 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Thu, 26 Mar 2026 01:36 AM IST
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धार महानपुर रामलीला का दृश्यसंवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। चैत्र नवरात्र के दौरान धार-महानपुर में रामलीला का मंचन पूरे उत्साह के साथ किया जा रहा है। देर रात तक चलने वाले इस आयोजन को लेकर लोगों में इतना उत्साह है कि ठंड के बावजूद दर्शक रामलीला का एक भी दृश्य छोड़ने को तैयार नहीं है
मंगलवार की रात होने वाली रामलीला मंचन के दौरान प्रभु श्री राम और माता सीता के विवाह का दृश्य प्रस्तुत किया गया।वही रामलीला मंचन के दौरान पारंपरिक डोली में माता सीता की विदाई हुई। डोगरा संस्कृति के अनुरूप होने वाले इस दृश्य में जब पारंपरिक डोली पर माता की विदाई का दृश्य प्रस्तुत किया गया तो राजा जनक का विलास देखकर हर किसी की आंखें भर आई।
रामलीला मंचन के अगले दृश्य में भगवान के राजतिलक की तैयारी का दृश्य पेश किया गया। जिसमें दासी मंथरा द्वारा रानी कैकई से कहा कि यदि राम राजा बन जाएंगे, तो उनके पुत्र भरत को कुछ नहीं मिलेगा। मंथरा की बातों से प्रभावित होकर कैकई कोप भवन में चली गईं और वहां जाकर बैठ गईं। जब राजा दशरथ को इसका पता चला, तो वे कोप भवन पहुंचे और कैकई से उनके दुख का कारण पूछा। कैकई ने राजा दशरथ से अपने दो वचन मांगे। उन्होंने भरत के लिए राज गद्दी और राम के लिए चौदह वर्ष का वनवास मांगा। यह सुनकर राजा दशरथ अत्यंत दुखी हुए।
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कठुआ। चैत्र नवरात्र के दौरान धार-महानपुर में रामलीला का मंचन पूरे उत्साह के साथ किया जा रहा है। देर रात तक चलने वाले इस आयोजन को लेकर लोगों में इतना उत्साह है कि ठंड के बावजूद दर्शक रामलीला का एक भी दृश्य छोड़ने को तैयार नहीं है
मंगलवार की रात होने वाली रामलीला मंचन के दौरान प्रभु श्री राम और माता सीता के विवाह का दृश्य प्रस्तुत किया गया।वही रामलीला मंचन के दौरान पारंपरिक डोली में माता सीता की विदाई हुई। डोगरा संस्कृति के अनुरूप होने वाले इस दृश्य में जब पारंपरिक डोली पर माता की विदाई का दृश्य प्रस्तुत किया गया तो राजा जनक का विलास देखकर हर किसी की आंखें भर आई।
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रामलीला मंचन के अगले दृश्य में भगवान के राजतिलक की तैयारी का दृश्य पेश किया गया। जिसमें दासी मंथरा द्वारा रानी कैकई से कहा कि यदि राम राजा बन जाएंगे, तो उनके पुत्र भरत को कुछ नहीं मिलेगा। मंथरा की बातों से प्रभावित होकर कैकई कोप भवन में चली गईं और वहां जाकर बैठ गईं। जब राजा दशरथ को इसका पता चला, तो वे कोप भवन पहुंचे और कैकई से उनके दुख का कारण पूछा। कैकई ने राजा दशरथ से अपने दो वचन मांगे। उन्होंने भरत के लिए राज गद्दी और राम के लिए चौदह वर्ष का वनवास मांगा। यह सुनकर राजा दशरथ अत्यंत दुखी हुए।
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