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Kathua News: ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुए पलायन से सब्जी व फल मार्केट पर मंदी का असर
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कठुआ। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से बने हालात से शहर की सब्जी और फल का बाजार अब तक उबर नहीं पाया है। मौजूदा हालात यह है कि गर्मी के सीजन में आने वाली स्थानीय सब्जियों के भाव अपने न्यूनतम स्तर पर हैं, लेकिन बाजार में खरीदारों की कमी इसके उत्पादन के साथ व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी प्रभावित कर रही है।
औद्योगिक विकास के चलते कठुआ शहर में पिछले कुछ वर्षों के दौरान देश भर से आने वाले लोग जो अब यहां की अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन चुके हैं। उनके ऑपरेशन सिंदूर के बाद बड़ी संख्या में पलायन कर जाने का बाजार पर खासा प्रभाव दिखाई दे रहा है। कठुआ शहर में सब्जी के साथ-साथ फल के कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार अभी भी उनके कारोबार पर 35 से 40 प्रतिशत की मंदी चल रही है।
सब्जी और फल विक्रेता खासकर तरबूज का कारोबार करने वालों के अनुसार, वर्तमान में पिछले साल की तुलना में तरबूज की कीमत में पांच से आठ रुपये की गिरावट है। इसके बावजूद भी शहर में तरबूज के खरीदार ही नहीं हैं। इसकी बड़ी वजह फल और सब्जी विक्रेता प्रवासी मजदूर के पलायन को मान रहे हैं। उनका कहना है कि कठुआ शहर पिछले एक दशक से चारों तरफ से औद्योगिक क्षेत्र से घिर चुका है। जहां नये-नये औद्योगिक क्षेत्र जैसे भागथली, सहार, कोट पुन्नू, घाटी और गोविंदसर के साथ-साथ महरौली में बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयों का निर्माण हो रहा है। इसके चलते बड़ी संख्या में मजदूर यहां निर्माण कार्यो में लगे हुए हैं। जैसे ही ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ उसके बाद ज्यादातर नई इकाइयों ने अपना निर्माण कार्य बंद कर दिया। हालांकि तीन-चार दिन के बाद ही दोनों देशों ने युद्ध विराम की घोषणा कर दी लेकिन तब तक मजदूर अपने घरों को जा चुके थे।
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कारोबारी दर्शन लाल के अनुसार अब धीरे-धीरे निर्माण कार्य पटरी पर लौट रहा है। लेकिन प्रवासी मजदूर की कमी के चलते इसका सीधा असर सब्जी और फल विक्रेताओं पर पड़ रहा है। सब्जी के तुलनात्मक दाम कम होने के बावजूद भी उसको खरीदने वालों की काफी कमी है। वहीं, सब्जी के फुटकर विक्रेता संजीव कुमार के मुताबिक पूर्व में जब सब्जियों के दाम कम होते थे तो उनका करोबार काफी अच्छा होता था, लेकिन इस बार दाम कम होने के बाद भी बाजार में खरीदारों का अभाव बना हुआ है।
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औद्योगिक विकास के चलते कठुआ शहर में पिछले कुछ वर्षों के दौरान देश भर से आने वाले लोग जो अब यहां की अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन चुके हैं। उनके ऑपरेशन सिंदूर के बाद बड़ी संख्या में पलायन कर जाने का बाजार पर खासा प्रभाव दिखाई दे रहा है। कठुआ शहर में सब्जी के साथ-साथ फल के कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार अभी भी उनके कारोबार पर 35 से 40 प्रतिशत की मंदी चल रही है।
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सब्जी और फल विक्रेता खासकर तरबूज का कारोबार करने वालों के अनुसार, वर्तमान में पिछले साल की तुलना में तरबूज की कीमत में पांच से आठ रुपये की गिरावट है। इसके बावजूद भी शहर में तरबूज के खरीदार ही नहीं हैं। इसकी बड़ी वजह फल और सब्जी विक्रेता प्रवासी मजदूर के पलायन को मान रहे हैं। उनका कहना है कि कठुआ शहर पिछले एक दशक से चारों तरफ से औद्योगिक क्षेत्र से घिर चुका है। जहां नये-नये औद्योगिक क्षेत्र जैसे भागथली, सहार, कोट पुन्नू, घाटी और गोविंदसर के साथ-साथ महरौली में बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयों का निर्माण हो रहा है। इसके चलते बड़ी संख्या में मजदूर यहां निर्माण कार्यो में लगे हुए हैं। जैसे ही ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ उसके बाद ज्यादातर नई इकाइयों ने अपना निर्माण कार्य बंद कर दिया। हालांकि तीन-चार दिन के बाद ही दोनों देशों ने युद्ध विराम की घोषणा कर दी लेकिन तब तक मजदूर अपने घरों को जा चुके थे।
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कारोबारी दर्शन लाल के अनुसार अब धीरे-धीरे निर्माण कार्य पटरी पर लौट रहा है। लेकिन प्रवासी मजदूर की कमी के चलते इसका सीधा असर सब्जी और फल विक्रेताओं पर पड़ रहा है। सब्जी के तुलनात्मक दाम कम होने के बावजूद भी उसको खरीदने वालों की काफी कमी है। वहीं, सब्जी के फुटकर विक्रेता संजीव कुमार के मुताबिक पूर्व में जब सब्जियों के दाम कम होते थे तो उनका करोबार काफी अच्छा होता था, लेकिन इस बार दाम कम होने के बाद भी बाजार में खरीदारों का अभाव बना हुआ है।