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Kathua News: भगवान के 24 अवतारों की जानकारी दी
Sat, 26 Apr 2025 01:27 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sat, 26 Apr 2025 01:27 AM IST
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ब्राह्मण सभा में भगवान परशुराम जन्मोत्सव कार्यक्रम के तहत श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन
कठुआ। शहर के ब्राह्मण सभा में भगवान परशुराम जन्मोत्सव कार्यक्रम के तहत श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन जारी है। कथा के तीसरे दिन कथाव्यास कुलदीप शास्त्री ने अपने प्रवचनों की अमृतवर्षा करते हुए भक्तों को सच्चा सुख प्राप्त करने के लिए सत्संग करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि सत्संग व्यक्ति को जीवन मरण के बंधन से छुटकारा दिला सकता है।
शुक्रवार को जारी कथा के दौरान शास्त्री जी महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को श्री सूत जी और शनकादिक ऋषि को भागवत का उपदेश देते हुए भगवान की कथाओं का प्रसंग सुनाया। जिसमें सूत जी महाराज ने हरि अनंत हरि कथा अनंता का उदाहरण देते हुए कहा कि परमात्मा की लीला को कोई पार नहीं पा सकता है। उन्होंने श्रीमद्भागवत पुराण में भगवान के 24 अवतारों का विस्तार से वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को बताया कि इस घर धरती पर जब भी धर्म की हानि होती है, तो उसकी स्थापना के लिए परमात्मा अवतार लेते आए हैं। भगवान संतों, ब्राह्मणों, गो माता और अपने भक्तों की रक्षा के लिए विकराल रूप धारण कर लेते हैं। जैसे भगवान अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए नरसिंह का रूप धारण कर पापी हिरण्यकश्यप का वध किया और भक्त प्रहलाद की रक्षा की।
उन्होंने कहा कि भगवान को जानने के लिए हमें भागवत पुराण की कथा को जानना होगा। यह भगवान के स्वरूप का अनुभव कराने वाला और समस्त वेदों का सार है। शास्त्री जी ने कहा कि मनुष्य भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए अपना पूरा जीवन खर्च कर देता है और अंत में वह खाली हाथ इस लोक से चला जाता है। उसे परमधाम की प्राप्ति नहीं हो पाती है। संवाद
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कठुआ। शहर के ब्राह्मण सभा में भगवान परशुराम जन्मोत्सव कार्यक्रम के तहत श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन जारी है। कथा के तीसरे दिन कथाव्यास कुलदीप शास्त्री ने अपने प्रवचनों की अमृतवर्षा करते हुए भक्तों को सच्चा सुख प्राप्त करने के लिए सत्संग करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि सत्संग व्यक्ति को जीवन मरण के बंधन से छुटकारा दिला सकता है।
शुक्रवार को जारी कथा के दौरान शास्त्री जी महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को श्री सूत जी और शनकादिक ऋषि को भागवत का उपदेश देते हुए भगवान की कथाओं का प्रसंग सुनाया। जिसमें सूत जी महाराज ने हरि अनंत हरि कथा अनंता का उदाहरण देते हुए कहा कि परमात्मा की लीला को कोई पार नहीं पा सकता है। उन्होंने श्रीमद्भागवत पुराण में भगवान के 24 अवतारों का विस्तार से वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को बताया कि इस घर धरती पर जब भी धर्म की हानि होती है, तो उसकी स्थापना के लिए परमात्मा अवतार लेते आए हैं। भगवान संतों, ब्राह्मणों, गो माता और अपने भक्तों की रक्षा के लिए विकराल रूप धारण कर लेते हैं। जैसे भगवान अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए नरसिंह का रूप धारण कर पापी हिरण्यकश्यप का वध किया और भक्त प्रहलाद की रक्षा की।
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उन्होंने कहा कि भगवान को जानने के लिए हमें भागवत पुराण की कथा को जानना होगा। यह भगवान के स्वरूप का अनुभव कराने वाला और समस्त वेदों का सार है। शास्त्री जी ने कहा कि मनुष्य भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए अपना पूरा जीवन खर्च कर देता है और अंत में वह खाली हाथ इस लोक से चला जाता है। उसे परमधाम की प्राप्ति नहीं हो पाती है। संवाद
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