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तहसीलदार के आते ही बंद हो जाता कार्यालय का दरवाजा, बाहर बैठ लोग करते रहते इंतजार
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अंदर से बंद तहसीलदार के कार्यालय का दरवाजा ।- संवाद।
- फोटो : KATHUA
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हीरानगर। तहसील कार्यालय में इन दिनों लोगों की अनदेखी की जा रही है। अपने कार्यों के लिए आए लोग कार्यालय के बाहर बैठकर तहसीलदार का घंटों इंतजार करते हैं, लेकिन तहसीलदार आते ही नहीं। और, जब आ भी जाते हैं तो दरवाजा बंद कर बैठ जाते हैं। उधर, बाहर बैठे लोगों को बिना काम कराए वापस लौटना पड़ता है।
दरअसल, लोगों ने शिकायत की है कि तहसीलदार जैसे ही कार्यालय में पहुंचते हैं, वैसे ही मुख्य कार्यालय का दरवाजा बंद कर दिया जाता है। ऐसे में अपने काम के लिए आए लोग परेशान होते हैं। उन्हें बाहर बैठकर दरवाजा खुलने का घंटों इंतजार करना पड़ता है। कभी-कभी निराश होकर वापस भी लौटना पड़ता है। तहसीलदार कभी-कभी कार्यालय में आते हैं। और, जब आते हैं तो कार्यालय का मुख्य दरवाजा बंद करा देते हैं।
लोगों ने बताया कि इस बारे में कई बार एसडीएम से भी शिकायत की है, लेकिन अभी तक कोई सुधार नहीं हुआ। कार्यालय के बाहर अपने दस्तावेज लेकर घूम रहे पवन कुमार ने बताया कि कई दिनों से तहसील कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। कभी तहसीलदार कार्यालय में नहीं होते, तो कभी होते हुए भी कार्यालय का दरवाजा बंद रखते हैं।
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उन्होंने बताया कि डोमिसाइल के दस्तावेज तैयार करने के लिए उन्हें बहुत परेशान होना पड़ रहा है। यहां रोजाना कई लोग तहसीलदार का घंटों इंतजार कर बिना काम कराए वापस लौट जाते हैं। रविंद्र सिंह ने बताया कि उनके खेतों के नजदीक अवैध निर्माण कार्य होने के कारण फसल बर्बाद हो रही है। इससे संबंधित जानकारी देने के लिए वह कई बार कार्यालय में आए, लेकिन कभी उनके कार्यालय में उपस्थित न होने के कारण वापस लौटना पड़ा, तो कभी उनकी मौजूदगी के बावजूद कार्यालय का दरवाजा बंद होने पर चपरासी ने बाहर से ही वापस भेज दिया।
तहसील कार्यालय आए कुछ लोगों ने यह आरोप भी लगाए कि तहसील मुख्यालय के ज्यादातर अधिकारी व कर्मचारी साढ़े 10 बजे के बाद ही आते हैं। उन पर भी सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए।
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पब्लिक ऑफिस में लोग कभी भी आ-जा सकते हैं, दरवाजा बंद रखना गलत
मेरे पास भी तहसीलदार के खिलाफ शिकायतें आई हैं कि वह कार्यालय में कम बैठते हैं। हम पहले इसकी पुष्टि करेंगे। उसके बाद जो भी कार्रवाई बनती है, वह की जाएगी। यह पब्लिक ऑफिस है। लोग कभी भी आ-जा सकते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए कि दरवाजा बंद करके बैठ गए। ऐसा कोई नियम नहीं है, और यह गलत है। जरूरत पड़ी तो इस बारे में उपायुक्त और मंडलायुक्त से भी बात करेंगे।
- राकेश शर्मा, एसडीएम
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दरअसल, लोगों ने शिकायत की है कि तहसीलदार जैसे ही कार्यालय में पहुंचते हैं, वैसे ही मुख्य कार्यालय का दरवाजा बंद कर दिया जाता है। ऐसे में अपने काम के लिए आए लोग परेशान होते हैं। उन्हें बाहर बैठकर दरवाजा खुलने का घंटों इंतजार करना पड़ता है। कभी-कभी निराश होकर वापस भी लौटना पड़ता है। तहसीलदार कभी-कभी कार्यालय में आते हैं। और, जब आते हैं तो कार्यालय का मुख्य दरवाजा बंद करा देते हैं।
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लोगों ने बताया कि इस बारे में कई बार एसडीएम से भी शिकायत की है, लेकिन अभी तक कोई सुधार नहीं हुआ। कार्यालय के बाहर अपने दस्तावेज लेकर घूम रहे पवन कुमार ने बताया कि कई दिनों से तहसील कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। कभी तहसीलदार कार्यालय में नहीं होते, तो कभी होते हुए भी कार्यालय का दरवाजा बंद रखते हैं।
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उन्होंने बताया कि डोमिसाइल के दस्तावेज तैयार करने के लिए उन्हें बहुत परेशान होना पड़ रहा है। यहां रोजाना कई लोग तहसीलदार का घंटों इंतजार कर बिना काम कराए वापस लौट जाते हैं। रविंद्र सिंह ने बताया कि उनके खेतों के नजदीक अवैध निर्माण कार्य होने के कारण फसल बर्बाद हो रही है। इससे संबंधित जानकारी देने के लिए वह कई बार कार्यालय में आए, लेकिन कभी उनके कार्यालय में उपस्थित न होने के कारण वापस लौटना पड़ा, तो कभी उनकी मौजूदगी के बावजूद कार्यालय का दरवाजा बंद होने पर चपरासी ने बाहर से ही वापस भेज दिया।
तहसील कार्यालय आए कुछ लोगों ने यह आरोप भी लगाए कि तहसील मुख्यालय के ज्यादातर अधिकारी व कर्मचारी साढ़े 10 बजे के बाद ही आते हैं। उन पर भी सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए।
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पब्लिक ऑफिस में लोग कभी भी आ-जा सकते हैं, दरवाजा बंद रखना गलत
मेरे पास भी तहसीलदार के खिलाफ शिकायतें आई हैं कि वह कार्यालय में कम बैठते हैं। हम पहले इसकी पुष्टि करेंगे। उसके बाद जो भी कार्रवाई बनती है, वह की जाएगी। यह पब्लिक ऑफिस है। लोग कभी भी आ-जा सकते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए कि दरवाजा बंद करके बैठ गए। ऐसा कोई नियम नहीं है, और यह गलत है। जरूरत पड़ी तो इस बारे में उपायुक्त और मंडलायुक्त से भी बात करेंगे।
- राकेश शर्मा, एसडीएम

मुख्यालय के अन्य कार्यालय में साढ़े दस बजे के बाद भी खाली पड़ी कुर्सी। - संवाद।- फोटो : KATHUA

कार्यालय खुलने के बाद खाली पड़ी कुर्सियां। - संवाद।- फोटो : KATHUA