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Kathua News: बनी में 50 हेक्टेयर पर ओलावृष्टि का प्रहार, पनीरी पर सबसे ज्यादा मार
Tue, 22 Apr 2025 01:15 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Tue, 22 Apr 2025 01:15 AM IST
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बनी में ओलावृष्टि से तबाह हुई मटर की फसल। संवाद
- फोटो : kathua
- ओलावृष्टि और बारिश ने कृषि को पहुंचाया भारी आर्थिक नुकसान
- किसानों से सरकार से की आर्थिक मुआवजे की मांग
बनी। भारी बारिश और ओलावृष्टि ने बनी क्षेत्र की कृषि को बुरी तरह से प्रभावित किया है। कृषि अधिकारियों के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा का सीधा असर 50 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि पर पड़ा है, जिससे किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। इसमें सब्जियों की काश्त शामिल है।
बनी क्षेत्र के किसान सब्जी उत्पादन पर निर्भर हैं, अब 20 से अधिक दिनों तक पनीरी की प्रतीक्षा करने को मजबूर होंगे। इस बारिश और ओलावृष्टि से बैंगन, मिर्च, खीरा, घीया सहित सभी खरीफ फसलों की पनीरी बुरी तरह से प्रभावित हुई है। पनीरी अपने प्रारंभिक विकास चरण में थी, जब ओलावृष्टि ने उसे पूरी तरह से नष्ट कर दिया।
स्थानीय किसानों के मुताबिक ज्यादातर किसान पहले ही महंगे हाइब्रिड बीजों पर निवेश कर चुके थे और अब इस नुकसान से उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ेगा। कृषि अधिकारियों ने बताया कि पनीरी की नई खेप तैयार होने में अब कम से कम 20-25 दिन का समय लगेगा। ऐसे में फसलें देर से तैयार होंगी। किसानों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है। संवाद
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पनीरी पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। मैंने पाॅलीहाउस नहीं लगाया था और अचानक ओलावृष्टि ने सब कुछ नष्ट कर दिया। इस बार बैंगन, मिर्ची और शिमला मिर्च की पनीरी लगाई थी। अब मुझे दोबारा बीज खरीदना होगा और पनीरी तैयार करने में समय के साथ-साथ खर्च भी दोगुना हो जाएगा।
सतीश कुमार, स्थानीय किसान
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मटर की फसल पकने की कगार पर थी और कुछ ही दिनों में उसे बाजार में बेचने की तैयारी में था। मगर अचानक हुई ओलावृष्टि ने एक कनाल की मेहनत पर पानी फेर दिया। मटर खेतों में बिखर चुकी है और अब वह बेचने लायक भी नहीं बची है।
किसान रोशन लाल, निवासी संदरून
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- किसानों से सरकार से की आर्थिक मुआवजे की मांग
बनी। भारी बारिश और ओलावृष्टि ने बनी क्षेत्र की कृषि को बुरी तरह से प्रभावित किया है। कृषि अधिकारियों के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा का सीधा असर 50 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि पर पड़ा है, जिससे किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। इसमें सब्जियों की काश्त शामिल है।
बनी क्षेत्र के किसान सब्जी उत्पादन पर निर्भर हैं, अब 20 से अधिक दिनों तक पनीरी की प्रतीक्षा करने को मजबूर होंगे। इस बारिश और ओलावृष्टि से बैंगन, मिर्च, खीरा, घीया सहित सभी खरीफ फसलों की पनीरी बुरी तरह से प्रभावित हुई है। पनीरी अपने प्रारंभिक विकास चरण में थी, जब ओलावृष्टि ने उसे पूरी तरह से नष्ट कर दिया।
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स्थानीय किसानों के मुताबिक ज्यादातर किसान पहले ही महंगे हाइब्रिड बीजों पर निवेश कर चुके थे और अब इस नुकसान से उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ेगा। कृषि अधिकारियों ने बताया कि पनीरी की नई खेप तैयार होने में अब कम से कम 20-25 दिन का समय लगेगा। ऐसे में फसलें देर से तैयार होंगी। किसानों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है। संवाद
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पनीरी पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। मैंने पाॅलीहाउस नहीं लगाया था और अचानक ओलावृष्टि ने सब कुछ नष्ट कर दिया। इस बार बैंगन, मिर्ची और शिमला मिर्च की पनीरी लगाई थी। अब मुझे दोबारा बीज खरीदना होगा और पनीरी तैयार करने में समय के साथ-साथ खर्च भी दोगुना हो जाएगा।
सतीश कुमार, स्थानीय किसान
मटर की फसल पकने की कगार पर थी और कुछ ही दिनों में उसे बाजार में बेचने की तैयारी में था। मगर अचानक हुई ओलावृष्टि ने एक कनाल की मेहनत पर पानी फेर दिया। मटर खेतों में बिखर चुकी है और अब वह बेचने लायक भी नहीं बची है।
किसान रोशन लाल, निवासी संदरून