{"_id":"5fa2ea2e8ebc3e1a27223b06","slug":"firecrackers-kathua-news-jmu2222195170","type":"story","status":"publish","title_hn":"बारूद के ढ़ेर पर शहर, धारा 144 के बाद भी खुले में बेचे जा रहे पटाखे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बारूद के ढ़ेर पर शहर, धारा 144 के बाद भी खुले में बेचे जा रहे पटाखे
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कठुआ। दिवाली का त्यौहार नजदीक आने के साथ ही कठुआ शहर एक बार फिर बारूद के ढ़ेर पर है। चार वर्ष पूर्व शहर के मध्य बाजार में पटाखों के भीषण धमाके के बाद के हालात से इस बार भी सीख नहीं ली गई है। हालात ऐसे हैं कि इस बार भी शहर के बाजार से लेकर गली मोहल्लों में बम पटाखों की बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है। दुकानदारों को न तो प्रशासनिक टीमों का खौफ है और न ही किसी कार्रवाई का। शहर के मुख्य बाजार की संकरी गलियों में चीनी पटाखे छोटी से लेकर बड़ी दुकानों तक पहुंच चुके हैं। वहीं मनियारी से लेकर गिफ्ट आइटम की दुकानों पर भी पटाखों की बिक्री जारी है। ऐसा तब है जब जिला मेजिस्ट्रेट की ओर से निकायों की हद में पटाखों की बिक्री और भंडारण पर पूरी तरह से रोक है। यही नहीं पटाखा लाइसेंस धारकों को भी सात नवंबर तक पटाखों की किसी भी तरह से बिक्री करने पर पाबंदी लागू है। जिला मेजिस्ट्रेट के आदेशों की अवहेलना करते हुए यह धंधा जोरों से जारी है, जिसमें लोगों की जान को भी खतरे में डाला गया है।
शहर के साथ कई रिहायशी इलाकों में पटाखों के कारोबार की प्रक्रिया नई नहीं है। हर साल नियमों को ताक पर रखकर पटाखों की बिक्री से लेकर संग्रह करने का काम शहर के कुछ पॉश इलाकों में किया जाता है। प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर नियम बनाने वालों को भी इसका पता रहता है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर महज औपचारिकता ही पूरी की जाती है।
इस बार भी शहर में चल रहे पटाखों के होल सेल और रिटेल पर किसी ने भी यह सोचने की जहमत नहीं उठाई कि इन गोदामों को सुरक्षा के लिहाज से किन स्थानों पर चलाया जा रहा है। शहर में पटाखों का होल सेल और रिटेल बाजार काफी पुराना है। पंजाब से सटा इलाका होने के चलते चोरी-छिपे यहां पटाखों को लाया जाता है और यहां पर जम्मू सहित प्रदेश के अन्य हिस्सों से भी बड़ी संख्या में लोग पटाखे खरीदने पहुंचते हैं।
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जिला मेजिस्ट्रेट ने जारी किए हैं आदेश
जिला मेजिस्ट्रेट ने धारा 144 के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए लोगों की जान माल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आदेश जारी किए हैं। इसके तहत जिले के छह निकायों में पटाखों के भंडारण और बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। लखनपुर, बसोहली, बिलावर, हीरानगर और नगरी परोल में प्रशासन की ओर से चिह्नित और निकाय की हद से बाहर ही पटाखे बेचे जा सकेंगे। बाकायदा अग्निशमन विभाग, निकाय, पुलिस और जिला मेजिस्ट्रेट से एनओसी के बाद ही होलसेल और तहसीलदार से अनुमति के बाद रिटेल पटाखों की बिक्री की जा सकेगी। चॉकलेट बम, चेन पटाखों, धनी पटाखा, डुडूमा, सेवन शॉट, रॉकेट बम, हार पटाखों की बिक्री पर भी ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए प्रतिबंध लगाया गया है। जिला मेजिस्ट्रेट की ओर से जारी यह आदेश 17 नवंबर तक जारी रहेगा।
पेट्रोल पंप के सौ मीटर के दायरे में कई पटाखा होलसेल गोदाम
इसे विडंबना ही कहेंगे कि जहां आदेश कागजों पर जारी हो जाते हैं, वहीं सरकारी विभाग यह तक जानने की जरूरत नहीं समझते कि इन पटाखा गोदामों की दूरी प्रतिबंधित संस्थानों से कितनी है। इसका जीता जागता उदाहरण यह है कि शहर के नजदीक पटाखा होलसेल की एक बड़ी मार्केट पेट्रोल पंप के सौ मीटर दायरे में चल रही है।
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शहर के साथ कई रिहायशी इलाकों में पटाखों के कारोबार की प्रक्रिया नई नहीं है। हर साल नियमों को ताक पर रखकर पटाखों की बिक्री से लेकर संग्रह करने का काम शहर के कुछ पॉश इलाकों में किया जाता है। प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर नियम बनाने वालों को भी इसका पता रहता है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर महज औपचारिकता ही पूरी की जाती है।
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इस बार भी शहर में चल रहे पटाखों के होल सेल और रिटेल पर किसी ने भी यह सोचने की जहमत नहीं उठाई कि इन गोदामों को सुरक्षा के लिहाज से किन स्थानों पर चलाया जा रहा है। शहर में पटाखों का होल सेल और रिटेल बाजार काफी पुराना है। पंजाब से सटा इलाका होने के चलते चोरी-छिपे यहां पटाखों को लाया जाता है और यहां पर जम्मू सहित प्रदेश के अन्य हिस्सों से भी बड़ी संख्या में लोग पटाखे खरीदने पहुंचते हैं।
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जिला मेजिस्ट्रेट ने जारी किए हैं आदेश
जिला मेजिस्ट्रेट ने धारा 144 के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए लोगों की जान माल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आदेश जारी किए हैं। इसके तहत जिले के छह निकायों में पटाखों के भंडारण और बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। लखनपुर, बसोहली, बिलावर, हीरानगर और नगरी परोल में प्रशासन की ओर से चिह्नित और निकाय की हद से बाहर ही पटाखे बेचे जा सकेंगे। बाकायदा अग्निशमन विभाग, निकाय, पुलिस और जिला मेजिस्ट्रेट से एनओसी के बाद ही होलसेल और तहसीलदार से अनुमति के बाद रिटेल पटाखों की बिक्री की जा सकेगी। चॉकलेट बम, चेन पटाखों, धनी पटाखा, डुडूमा, सेवन शॉट, रॉकेट बम, हार पटाखों की बिक्री पर भी ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए प्रतिबंध लगाया गया है। जिला मेजिस्ट्रेट की ओर से जारी यह आदेश 17 नवंबर तक जारी रहेगा।
पेट्रोल पंप के सौ मीटर के दायरे में कई पटाखा होलसेल गोदाम
इसे विडंबना ही कहेंगे कि जहां आदेश कागजों पर जारी हो जाते हैं, वहीं सरकारी विभाग यह तक जानने की जरूरत नहीं समझते कि इन पटाखा गोदामों की दूरी प्रतिबंधित संस्थानों से कितनी है। इसका जीता जागता उदाहरण यह है कि शहर के नजदीक पटाखा होलसेल की एक बड़ी मार्केट पेट्रोल पंप के सौ मीटर दायरे में चल रही है।