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Kathua News: फायर फाइटिंग सिस्टम से लैस हुआ जीएमसी कठुआ
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-60 के लगभग कर्मचारियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
पंकज मिश्रा
कठुआ। जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान में आग की घटनाओं से निपटने के इंतजाम का काम पूरा हो गया है। जीएमसी कठुआ और सहायक अस्पताल में अब तक आग बुझाने के पर्याप्त प्रबंध नहीं थे। पिछले तीन साल से चल रही प्रक्रिया के तहत लगभग पौने तीन करोड़ की लागत से इस संस्थान को अब आग से सुरक्षित कर लिया गया है।
बता दें कि पहले अग्निशमन दस्ते और छोटे अग्निशमन यंत्रों के भरोसे अस्पताल के मरीजों, तीमारदारों, स्टाफ और इमारत की सुरक्षा की जा रही थी। ऐसा तब था, जब रोजाना लगभग तीन हजार की ओपीडी और 300 बेड की व्यवस्था इस अस्पताल में उपलब्ध है। देश के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में आग लगने की घटनाओं के बाद जीएमसी कठुआ में आग की घटनाओं से निपटने के इंतजाम का कार्य किया जा रहा था। यहां करीब तीन हजार मीटर लंबी पाइप लाइनों का जाल बिछाया गया है।
इसके अलावा परिसर में एक बोरवेल, पंप हाउस, ढाई लाख लीटर क्षमता का अंडरग्राउंड वाटर टैंक और ट्रांसफार्मर जैसी सुविधाएं तैयार कर दी गई हैं, जबकि इसे ऑटोमेटिक फायर एंड स्मोक डिटेक्टर और फायर अलार्म जैसी सुविधा से लैस किया गया है।
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दरअसल, इस स्वास्थ्य संस्थान को आग से सुरक्षित रखने के लिए जून 2022 में सरकार की ओर से जारी किए गए निर्देश के बाद फायर फाइटिंग उपकरणों से लैस करने की कवायद शुरू हुई थी। इसके बाद परिसर में अगर आग लगने का हादसा पेश आता है तो परिसर स्वयं ही इनसे निपटने में सक्षम हो जाएगा।
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पहले परिसर अस्थायी इंतजामों व दमकल पर आश्रित था
इलाज के लिए प्रतिदिन पहुंचने वाले हजारों लोगों से गुलजार रहने वाला जीएमसी कठुआ के सहायक अस्पताल के मुख्य भवन का निर्माण करीब ढाई दशक पूर्व हुआ था। जिला अस्पताल के रूप में अपनी सेवा देने वाली इमारत को छह वर्ष पूर्व जीएमसी कठुआ के सहायक अस्पताल में तबदील कर दिया गया। इसके बाद से यहां बढ़ी स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण आने वाले लोगों की संख्या में भी तीन गुना से भी ज्यादा हो गई लेकिन परिसर में आग से सुरक्षा के नाम पर कहीं-कहीं पर लगे अग्निशमन यंत्रों के अलावा कुछ नहीं था। ऐसी हालत में यहां आग लगने की घटनाओं के दौरान दमकल विभाग की सेवा लेने के अलावा कोई अन्य साधन नहीं था।
...................
कोट...
जीएमसी कठुआ के सहायक अस्पताल परिसर को आग से सुरक्षित रखने के लिए सभी इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं। 60 कर्मचारियों को इसके लिए प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।अग्निशमन विभाग की ओर से भी परिसर में स्थापित किए गए संयंत्र को सर्टिफाई कर दिया गया है। परिसर के हर फ्लोर, भीतर और बाहर आग से निपटने के इंतजाम सुनिश्चित किए गए हैं।
- डॉ. सुरेंद्र अत्री, प्रधानाचार्य, जीएमसी कठुआ
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पंकज मिश्रा
कठुआ। जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान में आग की घटनाओं से निपटने के इंतजाम का काम पूरा हो गया है। जीएमसी कठुआ और सहायक अस्पताल में अब तक आग बुझाने के पर्याप्त प्रबंध नहीं थे। पिछले तीन साल से चल रही प्रक्रिया के तहत लगभग पौने तीन करोड़ की लागत से इस संस्थान को अब आग से सुरक्षित कर लिया गया है।
बता दें कि पहले अग्निशमन दस्ते और छोटे अग्निशमन यंत्रों के भरोसे अस्पताल के मरीजों, तीमारदारों, स्टाफ और इमारत की सुरक्षा की जा रही थी। ऐसा तब था, जब रोजाना लगभग तीन हजार की ओपीडी और 300 बेड की व्यवस्था इस अस्पताल में उपलब्ध है। देश के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में आग लगने की घटनाओं के बाद जीएमसी कठुआ में आग की घटनाओं से निपटने के इंतजाम का कार्य किया जा रहा था। यहां करीब तीन हजार मीटर लंबी पाइप लाइनों का जाल बिछाया गया है।
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इसके अलावा परिसर में एक बोरवेल, पंप हाउस, ढाई लाख लीटर क्षमता का अंडरग्राउंड वाटर टैंक और ट्रांसफार्मर जैसी सुविधाएं तैयार कर दी गई हैं, जबकि इसे ऑटोमेटिक फायर एंड स्मोक डिटेक्टर और फायर अलार्म जैसी सुविधा से लैस किया गया है।
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दरअसल, इस स्वास्थ्य संस्थान को आग से सुरक्षित रखने के लिए जून 2022 में सरकार की ओर से जारी किए गए निर्देश के बाद फायर फाइटिंग उपकरणों से लैस करने की कवायद शुरू हुई थी। इसके बाद परिसर में अगर आग लगने का हादसा पेश आता है तो परिसर स्वयं ही इनसे निपटने में सक्षम हो जाएगा।
पहले परिसर अस्थायी इंतजामों व दमकल पर आश्रित था
इलाज के लिए प्रतिदिन पहुंचने वाले हजारों लोगों से गुलजार रहने वाला जीएमसी कठुआ के सहायक अस्पताल के मुख्य भवन का निर्माण करीब ढाई दशक पूर्व हुआ था। जिला अस्पताल के रूप में अपनी सेवा देने वाली इमारत को छह वर्ष पूर्व जीएमसी कठुआ के सहायक अस्पताल में तबदील कर दिया गया। इसके बाद से यहां बढ़ी स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण आने वाले लोगों की संख्या में भी तीन गुना से भी ज्यादा हो गई लेकिन परिसर में आग से सुरक्षा के नाम पर कहीं-कहीं पर लगे अग्निशमन यंत्रों के अलावा कुछ नहीं था। ऐसी हालत में यहां आग लगने की घटनाओं के दौरान दमकल विभाग की सेवा लेने के अलावा कोई अन्य साधन नहीं था।
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कोट...
जीएमसी कठुआ के सहायक अस्पताल परिसर को आग से सुरक्षित रखने के लिए सभी इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं। 60 कर्मचारियों को इसके लिए प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।अग्निशमन विभाग की ओर से भी परिसर में स्थापित किए गए संयंत्र को सर्टिफाई कर दिया गया है। परिसर के हर फ्लोर, भीतर और बाहर आग से निपटने के इंतजाम सुनिश्चित किए गए हैं।
- डॉ. सुरेंद्र अत्री, प्रधानाचार्य, जीएमसी कठुआ