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सेवा दो परियोजना में बिजली उत्पादन शुरू
कठुआ/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 19 Dec 2015 01:24 AM IST
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पेनस्टॉक के इनलेट वाल्व में आई तकनीकी खराबी के चलते बंद हुआ सेवा दो परियोजना में विद्युत उत्पादन एक बार फिर शुरू हो गया है। शुक्रवार को सेवा दो पावर स्टेशन में एक एक कर दो टरबाइनों को काम पर लगा दिया गया।
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टेस्टिंग प्रक्रिया के सफल रहने के बाद निर्धारित शट डाउन से दस दिन पूर्व ही बिजली उत्पादन को बहाल कर लिया गया है। हालांकि पहले इन्हें लो मोड पर चलाया गया लेकिन बाद में पूरे लोड पर बिजली उत्पादन शुरू हो गया।
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एनएचपीसी संचालित सेवा दो परियोजन के प्रभारी मुख्य अभियंता पीके लंगर ने बताया कि शाम 4.16 बजे एक टरबाइन को 38 मेगावाट पर चलाया गया है।
इसके साथ ही दूसरी टरबाइन को भी चलाने की तैयारी की गई और 6.30 बजे दूसरी टरबाइन को भी चालू कर दिया गया। मुख्य अभियंता ने बताया कि तीसरे टरबाइन को चलाने के लिए फिलहाल काम किया जा रहा है।
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सोमवार तक उसे भी चला लिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि सेवा दो प्रबंधन ने सात दिसंबर से बीस दिन का शटडाउन लिया था जिसके तहत पेनस्टॉक में इनलेट वाल्व को बदला जाना था।
शुरूआती दिनों में पेनस्टॉक का पानी खाली करने के साथ ही भीतर घुसकर वाल्व बदलना बड़ी चुनौती थी, जिसे पूरा कर लिया गया और शट डाउन के दस दिन बाद ही टरबाइन को फिर से सक्रिय कर दिया गया।
रावी दरिया की सहायक नदी सेवा पर बने सेवा दो पावर स्टेशन का बांध बनी के गत्ती में बनाया गया है। बांध की ऊंचाई 53 मीटर है।
सेवा और रावी नदियों के मिलन के गवाह हिमाचल और जम्मू कश्मीर की सीमा से सटे माश्का गांव में बने पावर स्टेशन तक पेनस्टॉक के जरिए बांध से पानी को पहुंचाया जाता है। 826.06 मीटर की यह पेनस्टॉक माश्का के पहाड़ों पर साफ देखी जा सकती हैं जिसका व्यास 2.4 मीटर का है।
वर्ष 2010 में सेवा दो परियोजना को कमीशन किया गया था। 533.52 मिलियन यूनिट प्रति वर्ष बनाने की क्षमता रखने वाली इस पनबिजली परियोजना में वित्तीय वर्ष 2014-15 के दौरान तय टारगेट से 11 फीसदी अधिक बिजली उत्पादन किया गया।
इसके साथ ही सेवा पावर स्टेशन ने इस दौरान एनएचपीसी के देशभर में चल रहे 18 पावर स्टेशनों में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। कमीशन के बाद से अब तक के सबसे बड़े बिजली उत्पादन को दर्ज किया गया जिसमें रोजाना 3.173 मिलियन बिजली यूनिट पैदा किया गए।
सेवा दो परियोजना में भारत हैवी इलेट्रिकल्स लिमिटेड भोपाल द्वारा पेल्टन तकनीकी की तीन टरबाइनें लगाई गई हैं। चालीस मेगावाट प्रति टरबाइन की क्षमता के साथ ही सेवा दो परियोजना की कुल क्षमता 120 मेगावाट है।
जहां से हीरानगर एक-दो ग्रिड, कठुआ ग्रिड और महानपुर ग्रिड को भी बिजली सप्लाई की जाती है। इसके साथ ही बाड़ी ब्रामणा, विजयपुर, सांबा, हीरानगर, घगवाल और कठुआ को राज्य की बिजली सप्लाई में सेवा का अहम योगदान है।