{"_id":"66fc947ed4014c24670264f4","slug":"election-news-kathua-news-c-201-1-knt1008-113658-2024-10-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kathua News: जम्हूरियत को मजबूत करने बाॅर्डर से निकलीं महिलाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kathua News: जम्हूरियत को मजबूत करने बाॅर्डर से निकलीं महिलाएं
विज्ञापन
आईबी (छन्न लाल दीन)। भारत पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जम्हूरियत को मजबूत करने के लिए इस बार बड़ी संख्या में महिलाएं भी निकलीं।
दस साल बाद सरकार बनाने की कवायद में उन्होंने भी अपने मुद्दों को प्राथमिकता से रखते हुए मजबूत लोकतांत्रिक सरकार के लिए इस महापर्व में आहुतियां डालीं। सीमावर्ती महिलाओं के अनुसार बाॅर्डर ने लंबे समय तक पाकिस्तानी गोलाबारी का दंश झेला है। यही वजह है कि इन इलाकों में विकास अन्य क्षेत्रों के मुकाबले कम हुआ। अब गोलाबारी थमी है तो विकास की आस भी बढ़ गई है।
जीरो लाइन के नजदीक छन्न लाल दीन में बने पोलिंग स्टेशन में मतदान के लिए पहुंची दिव्यांशी देवी ने मजबूत सरकार के लिए वोट दिया। दिव्यांशी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से बाॅर्डर पर गोलाबारी रुकी है। फिलहाल हालात सामान्य हैं। पिछले दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि बड़े त्योहारों से लेकर परीक्षाओं तक पाकिस्तानी गोलाबारी ने उनके जीवन को बुरी तरह से प्रभावित रखा। कई बार 15 दिन तो कई बार एक एक महीना रिश्तेदारों के घर या फिर शरणार्थी कैंपों में गुजर जाता था, जहां बाॅर्डर के लोग गोलीबारी से बचने के लिए आकर रुकते थे। उन्होंने कहा कि यह एक सदमे से कम नहीं था।
सुनीता देवी ने बताया कि हालात तो बदले हैं लेकिन अभी इलाके में बहुत कुछ करने की जरूरत है। न तो इस इलाके में लड़कियों की उच्च शिक्षा के लिए बेहतर संस्थान हैं और न आसपास उपलब्ध संस्थानों में विषय ही उपलब्ध हैं। रोजगार के साधन नहीं, स्वरोजगार को लेकर यह इलाका अभी भी अछूता है। उधर, पोलिंग स्टेशन पर आई महिलाएं भी इन इलाकों में जम्हूरियत को मजबूत करने के लिए उत्साहित दिखाई दीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
दस साल बाद सरकार बनाने की कवायद में उन्होंने भी अपने मुद्दों को प्राथमिकता से रखते हुए मजबूत लोकतांत्रिक सरकार के लिए इस महापर्व में आहुतियां डालीं। सीमावर्ती महिलाओं के अनुसार बाॅर्डर ने लंबे समय तक पाकिस्तानी गोलाबारी का दंश झेला है। यही वजह है कि इन इलाकों में विकास अन्य क्षेत्रों के मुकाबले कम हुआ। अब गोलाबारी थमी है तो विकास की आस भी बढ़ गई है।
जीरो लाइन के नजदीक छन्न लाल दीन में बने पोलिंग स्टेशन में मतदान के लिए पहुंची दिव्यांशी देवी ने मजबूत सरकार के लिए वोट दिया। दिव्यांशी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से बाॅर्डर पर गोलाबारी रुकी है। फिलहाल हालात सामान्य हैं। पिछले दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि बड़े त्योहारों से लेकर परीक्षाओं तक पाकिस्तानी गोलाबारी ने उनके जीवन को बुरी तरह से प्रभावित रखा। कई बार 15 दिन तो कई बार एक एक महीना रिश्तेदारों के घर या फिर शरणार्थी कैंपों में गुजर जाता था, जहां बाॅर्डर के लोग गोलीबारी से बचने के लिए आकर रुकते थे। उन्होंने कहा कि यह एक सदमे से कम नहीं था।
विज्ञापन
सुनीता देवी ने बताया कि हालात तो बदले हैं लेकिन अभी इलाके में बहुत कुछ करने की जरूरत है। न तो इस इलाके में लड़कियों की उच्च शिक्षा के लिए बेहतर संस्थान हैं और न आसपास उपलब्ध संस्थानों में विषय ही उपलब्ध हैं। रोजगार के साधन नहीं, स्वरोजगार को लेकर यह इलाका अभी भी अछूता है। उधर, पोलिंग स्टेशन पर आई महिलाएं भी इन इलाकों में जम्हूरियत को मजबूत करने के लिए उत्साहित दिखाई दीं।
विज्ञापन