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Kathua News: फंड के अभाव में लटका शहर का ड्रेनेज प्रोजेक्ट
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कठुआ। डेढ़ लाख की आबादी वाला जिला मुख्यालय का ड्रेनेज सिस्टम बदहाल हो चुका है। इसे संवारने के लिए 2022 में दो करोड़ रुपये की राशि पास भी हुई लेकिन दो साल में केवल 61 लाख 83 हजार फंड मिल पाया। ऐसे में आधे से अधिक शहर में ड्रेनेज नहीं है। इससे हर बरसात में लोगों को जल भराव से जूझना पड़ता है।
सबसे घनी आबादी वाले इलाकों में शुमार शिवानगर, शास्त्री नगर और तारानगर में अभी तक 20 फीसदी ही ड्रेनेज सिस्टम है। वह भी दमदार नहीं है क्योंकि उसका भी निकास नहीं होने से गाद जमने के कारण वह बंद हो जाता है। पटेल नगर के ऊपरी हिस्से में हाईवे का सारा पानी घरों में हर बरसात में घुसता है। पटेल नगर के लोग कई सालों से ड्रेनेज के अभाव में बरसात में नुकसान उठाते हैं। ऐसा ही शिवानगर का ऊपरी क्षेत्र हाईवे से जुड़ा है, जो पूरी तरह से बिना ड्रेनेज के है। यहां के लोग भी बरसात में हाईवे से आने वाले पानी से नुकसान झेल रहे हैं।
विकास हुआ, आबादी बढ़ी पर ड्रेनेज जस का तस
दो दशक से जिस शहर का व्यवसायिक तौर पर तेजी से विकास हुआ। आबादी डेढ़ लाख के करीब पहुंच गई, लेकिन उस हिसाब से ड्रेनेज नहीं के बराबर है। अभी शहर में 50 फीसदी ही ड्रेनेज है, वह भी दम तोड़ रहा है। हालांकि अब तक करोड़ों रुपये ड्रेनेज के निर्माण पर खर्च किए जा चुके हैं और अभी भी निर्माण जारी है लेकिन कई स्थानों पर आज भी बिना योजना के ही ड्रेनेज बनाई गई है, जिसका आगे जाकर कोई निकास नहीं है। नतीजतन निकासी बंद होने से आए दिन शहर में कई स्थानों पर बिना बारिश के ही गलियाें में पानी रहता है।
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साल दर साल डेंगू बरपाता है कहर
शहर का ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त न होने के कारण बरसात में पानी की सही ढंग से निकासी नहीं हो पाती। कई स्थानों पर पानी जमा रहता है। वहीं कई नाले भी ओवरफ्लो रहते हैं। यही कारण है कि कठुआ शहर में हर साल डेंगू का कहर बरपता है। बता दें कि 2023 में कठुआ में 600 से अधिक डेंगू और 100 से अधिक चिकनगुनिया के मामले सामने आए थे।
शहर के बीच बहने वाली खड्ड संभाल रही है आधा ड्रेनेज का भार
शहर के बीच बहने वाली बरसाती खड्ड नगर परिषद की ड्रेनेज व्यवस्था का आधा भार संभाल रही है। अधिकांश लोगों ने अपने घरों से निकलने वाली नालियों को इस खड्ड में जोड़ा हुआ है। कैप्टन सुनील चौधरी चौक से लेकर ड्रीमलैंड पार्क के एक साइड में घरों एवं संस्थानों का सारा व्यर्थ पानी खड्ड में बह जाता है। इसके अलावा वार्ड सात के सैकड़ों घरों एवं दुकानों का भी बिना ड्रेनेज के निकास खड्ड में जाता है।
-20 करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए 2022-23 में 61.83 लाख जारी हुए थे। इसे खर्च कर दिया गया है। अब नए वित्तीय वर्ष में फंड के लिए दोबारा मांग करनी पड़ेगी। फंड मिलने पर अधूरा काम पूरा कर लिया जाएगा।
-निनाद सेन, सीईओ, नगर परिषद, कठुआ
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सबसे घनी आबादी वाले इलाकों में शुमार शिवानगर, शास्त्री नगर और तारानगर में अभी तक 20 फीसदी ही ड्रेनेज सिस्टम है। वह भी दमदार नहीं है क्योंकि उसका भी निकास नहीं होने से गाद जमने के कारण वह बंद हो जाता है। पटेल नगर के ऊपरी हिस्से में हाईवे का सारा पानी घरों में हर बरसात में घुसता है। पटेल नगर के लोग कई सालों से ड्रेनेज के अभाव में बरसात में नुकसान उठाते हैं। ऐसा ही शिवानगर का ऊपरी क्षेत्र हाईवे से जुड़ा है, जो पूरी तरह से बिना ड्रेनेज के है। यहां के लोग भी बरसात में हाईवे से आने वाले पानी से नुकसान झेल रहे हैं।
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विकास हुआ, आबादी बढ़ी पर ड्रेनेज जस का तस
दो दशक से जिस शहर का व्यवसायिक तौर पर तेजी से विकास हुआ। आबादी डेढ़ लाख के करीब पहुंच गई, लेकिन उस हिसाब से ड्रेनेज नहीं के बराबर है। अभी शहर में 50 फीसदी ही ड्रेनेज है, वह भी दम तोड़ रहा है। हालांकि अब तक करोड़ों रुपये ड्रेनेज के निर्माण पर खर्च किए जा चुके हैं और अभी भी निर्माण जारी है लेकिन कई स्थानों पर आज भी बिना योजना के ही ड्रेनेज बनाई गई है, जिसका आगे जाकर कोई निकास नहीं है। नतीजतन निकासी बंद होने से आए दिन शहर में कई स्थानों पर बिना बारिश के ही गलियाें में पानी रहता है।
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साल दर साल डेंगू बरपाता है कहर
शहर का ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त न होने के कारण बरसात में पानी की सही ढंग से निकासी नहीं हो पाती। कई स्थानों पर पानी जमा रहता है। वहीं कई नाले भी ओवरफ्लो रहते हैं। यही कारण है कि कठुआ शहर में हर साल डेंगू का कहर बरपता है। बता दें कि 2023 में कठुआ में 600 से अधिक डेंगू और 100 से अधिक चिकनगुनिया के मामले सामने आए थे।
शहर के बीच बहने वाली खड्ड संभाल रही है आधा ड्रेनेज का भार
शहर के बीच बहने वाली बरसाती खड्ड नगर परिषद की ड्रेनेज व्यवस्था का आधा भार संभाल रही है। अधिकांश लोगों ने अपने घरों से निकलने वाली नालियों को इस खड्ड में जोड़ा हुआ है। कैप्टन सुनील चौधरी चौक से लेकर ड्रीमलैंड पार्क के एक साइड में घरों एवं संस्थानों का सारा व्यर्थ पानी खड्ड में बह जाता है। इसके अलावा वार्ड सात के सैकड़ों घरों एवं दुकानों का भी बिना ड्रेनेज के निकास खड्ड में जाता है।
-20 करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए 2022-23 में 61.83 लाख जारी हुए थे। इसे खर्च कर दिया गया है। अब नए वित्तीय वर्ष में फंड के लिए दोबारा मांग करनी पड़ेगी। फंड मिलने पर अधूरा काम पूरा कर लिया जाएगा।
-निनाद सेन, सीईओ, नगर परिषद, कठुआ