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सोमवती अमावस्या पर पवित्र बावली में श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
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ऐरवां स्थित मंदिर में आपशंभू का जलाभिषेक करने के लिए उमड़े भक्त। संवाद
- फोटो : KATHUA
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कठुआ। सोमवती अमावस्या के पावन मौके पर हजारों श्रद्धालुओं ने मिनी हरिद्वार के नाम से प्रसिद्ध ऐरावती मंदिर परिसर की पवित्र बावलियों में आस्था की डुबकी लगाई। इस मौके पर श्रद्धालुओं ने मंदिर में विराजमान आपशंभू का जलाभिषेक व दर्शन कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। सोमवार की भोर से ही मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं का क्रम दोपहर तक लगातार जारी रहा। इससे मंदिर में मेले जैसा माहौल देखने को मिला।
मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं ने बावलियों में स्नान के बाद दान पुण्य के साथ ही मंदिरों में दर्शन भी किए। वहीं बड़ी संख्या में भक्तों ने पितरों का तर्पण करके उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। जबकि महिलाओं ने मंदिर में स्थित पुराने वट वृक्ष का पारंपरिक पूजन किया। मंदिर में आने वाले भक्त जहां पूजन व अन्य धार्मिक गतिविधि में व्यस्त रहे। वहीं बच्चे और युवाओं ने वहां लगे मेले का आनंद लिया। वहीं सेवादारों ने मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भंडारा लगाकर प्रसाद वितरित किया। पिछले दो साल से कोरोना के कारण लगी पांबदियों के कारण पड़ोसी राज्यों से बड़ी संख्या में भक्त मंदिर नहीं आ रहे थे। इस बार पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने से मंदिर प्रांगण भर गया। हजारों की संख्या में भक्तों के पहुंचने से मंदिर के आसपास जाम की स्थिति बन गई। हालांकि मौके पर तैनात पुलिस कर्मी लगातार वाहनों के निकलने के लिए मार्ग बनाने के लिए मशक्कत करते रहे। लगातार आ रहे श्रद्धालुओं के कारण दोपहर तक मंदिर में ऐसी ही स्थिति बनी रही।
मंदिर में होने वाले कार्यक्रम के संबंध में पंडित हरिदत्त शिशु ने जानकारी दी। साथ ही कहा कि शिव पुराण में भी सोमवती अमावस्या का उल्लेख है। शास्त्रों के अनुसार भगवान राम और पांडवों ने भी पितृ तर्पण करके अपने पितरों के निमित्त पिंडदान और तर्पण किया था। आज भी मंदिर में आने वाले भक्त इसी कामना के साथ पहुंचे हैं। उन्होंने ऐरवां के ऐरावती मंदिर को जम्मू कश्मीर में शिवा टूूरिस्ट सर्किट बनाए जाने का स्वागत किया है।
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मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं ने बावलियों में स्नान के बाद दान पुण्य के साथ ही मंदिरों में दर्शन भी किए। वहीं बड़ी संख्या में भक्तों ने पितरों का तर्पण करके उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। जबकि महिलाओं ने मंदिर में स्थित पुराने वट वृक्ष का पारंपरिक पूजन किया। मंदिर में आने वाले भक्त जहां पूजन व अन्य धार्मिक गतिविधि में व्यस्त रहे। वहीं बच्चे और युवाओं ने वहां लगे मेले का आनंद लिया। वहीं सेवादारों ने मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भंडारा लगाकर प्रसाद वितरित किया। पिछले दो साल से कोरोना के कारण लगी पांबदियों के कारण पड़ोसी राज्यों से बड़ी संख्या में भक्त मंदिर नहीं आ रहे थे। इस बार पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने से मंदिर प्रांगण भर गया। हजारों की संख्या में भक्तों के पहुंचने से मंदिर के आसपास जाम की स्थिति बन गई। हालांकि मौके पर तैनात पुलिस कर्मी लगातार वाहनों के निकलने के लिए मार्ग बनाने के लिए मशक्कत करते रहे। लगातार आ रहे श्रद्धालुओं के कारण दोपहर तक मंदिर में ऐसी ही स्थिति बनी रही।
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मंदिर में होने वाले कार्यक्रम के संबंध में पंडित हरिदत्त शिशु ने जानकारी दी। साथ ही कहा कि शिव पुराण में भी सोमवती अमावस्या का उल्लेख है। शास्त्रों के अनुसार भगवान राम और पांडवों ने भी पितृ तर्पण करके अपने पितरों के निमित्त पिंडदान और तर्पण किया था। आज भी मंदिर में आने वाले भक्त इसी कामना के साथ पहुंचे हैं। उन्होंने ऐरवां के ऐरावती मंदिर को जम्मू कश्मीर में शिवा टूूरिस्ट सर्किट बनाए जाने का स्वागत किया है।
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